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Special Investigation: बैतूल की सिलपटी पंचायत में सरकारी संपत्ति का 'सुनियोजित खेल', किसानों की बर्बादी पर सरपंच-सचिव की 'चोरी' वाली दलील?CorruptionCase, SilpatiPanchayat, BetulDistrict

  • Jan 19
  • 4 min read

बैतूल, मध्य प्रदेश |GAMAKI MEDIA (आबादी की गूँज समाचार)

बैतूल: मध्य प्रदेश के बैतूल जिले में शासन की योजनाओं में भ्रष्टाचार का एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने केंद्र और राज्य सरकार के दावों की धज्जियां उड़ा दी हैं। सिलपटी पंचायत में सिंचाई के लिए बने स्टॉप डैम की प्लेट्स गायब होने के मामले में अब पंचायत प्रशासन और ग्रामीणों के बीच ठन गई है। यहां किसानों का सीधा आरोप है कि पंचायत ने स्वयं प्लेट्स निकालकर उसे 'चोरी' का रूप दे दिया है, ताकि भ्रष्टाचार को छिपाया जा सके!

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षड्यंत्र या चोरी? सरपंच और सचिव के दावों पर सुलगते सवाल

सिलपटी पंचायत में वर्ष 2005 में निर्मित स्टॉप डैम किसानों के लिए वरदान था। ग्रामीणों का आरोप है कि वर्ष 2026 की शुरुआत में पंचायत कर्मचारियों ने खुद इस डैम की लोहे की प्लेट्स निकाली थीं। लेकिन जब रबी सीजन की बोनी से पहले अक्टूबर 2026 में किसानों ने प्लेट्स वापस लगाने की मांग की, तो सरपंच प्रमिला बारस्कर और सचिव सकल सिंह चौहान ने यह कहकर पल्ला झाड़ लिया कि प्लेट्स 'चोरी' हो गई हैं।

हैरानी की बात यह है कि यदि इतनी बड़ी सरकारी संपत्ति चोरी हुई, तो पंचायत ने इसकी FIR दर्ज क्यों नहीं कराई? किसानों का आरोप है कि यह क्षेत्र के छोटे किसानों को आर्थिक रूप से बर्बाद करने की एक साजिश है।

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नियमों की दोहरी मार: MGNREGA और G RAM G का उल्लंघन

इस पूरे मामले में पुराने MGNREGA और नए G RAM G दोनों कानूनों के कड़े प्रावधानों की अनदेखी की गई है:

  1. MGNREGA (Asset Maintenance): मनरेगा के नियमानुसार, जल संरक्षण संरचनाओं (Water Structures) का रखरखाव और उनकी सुरक्षा ग्राम पंचायत की अनिवार्य जिम्मेदारी है। बिना किसी ठोस कारण के प्लेट्स हटाना और उन्हें सुरक्षित न रखना 'पब्लिक एसेट' को नुकसान पहुंचाने का गंभीर अपराध है।

  2. G RAM G (Viksit Bharat - Gramin) का नया नियम: केंद्र सरकार के नए G RAM G कानून के तहत, अब ग्रामीण इंफ्रास्ट्रक्चर (जैसे डैम, सड़कें) को Durable Assets (मजबूत संपत्ति) के रूप में विकसित करना अनिवार्य है। इसमें Digital Infrastructure (PM Gati Shakti) के जरिए मॉनिटरिंग का प्रावधान है। प्लेट्स का गायब होना इस नए मिशन के 'एसेट क्रिएशन' लक्ष्य का सीधा उल्लंघन है।

  3. जवाबदेही और ऑडिट: नए नियमों के अनुसार, पंचायत सचिव सरकारी संपत्तियों का कस्टोडियन होता है। यदि संपत्ति चोरी हुई है, तो उसकी तुरंत सूचना उच्च अधिकारियों को देना अनिवार्य है। बिना एफआईआर के चोरी का दावा करना वित्तीय गबन (Financial Fraud) की ओर इशारा करता है।

ग्राउंड रिपोर्ट: '700 एकड़' का सच और किसानों का आक्रोश

स्थानीय संपन्न किसान अनुराग सिनोटिया ने पंचायत की पोल खोलते हुए बताया कि पंचायत के पास छोटे किसानों (1/2 से 2 एकड़ वाले) के लिए कोई सहानुभूति नहीं है। अनुराग ने कहा— "हमने लिखित आवेदन दिया, गिड़गिड़ाए, लेकिन मौखिक आश्वासन देकर हमें भगा दिया गया। मैंने स्वयं बोरियां लगाकर पानी रोकने का विफल प्रयास किया। आज किसानों का गुस्सा चरम पर है।"

वहीं, पंच राजेश वर्मा ने एक और चौंकाने वाला दावा किया है। उन्होंने बताया कि ग्राम में लगभग 700 एकड़ शासकीय भूमि है। इस भूमि और पंचायत विकास के नाम पर आने वाला बजट G RAM G के तहत 'विकसित ग्राम पंचायत योजना' में लगना चाहिए था, लेकिन यह पैसा धरातल के बजाय कागजों में ही 'खपा' दिया जाता है।

सियासी सवाल: भाजपा के गढ़ में किसान बेहाल

बैतूल जिला वर्तमान में भारतीय जनता पार्टी का मजबूत गढ़ है। यहां की 5 विधानसभा सीटों पर भाजपा विधायक और सांसद भी भाजपा के ही हैं। केंद्र की 'विकसित भारत' की गारंटी और MGNREGA/'G RAM G' जैसे मजबूत कानून होने के बावजूद, सिलपटी पंचायत में किसानों की सुनवाई न होना प्रशासन की मंशा पर बड़े सवाल खड़े करता है।


प्रशासन और पंचायत से 5 चुभते सवाल:

  1. FIR दर्ज क्यों नहीं कराई गई? जब सरपंच और सचिव दावा कर रहे हैं कि स्टॉप डैम की प्लेट्स चोरी हुई हैं, तो अब तक पंचायत ने पुलिस में FIR दर्ज क्यों नहीं कराई? सरकारी संपत्ति के गायब होने पर कानूनी कार्रवाई न करना क्या इस बात का संकेत नहीं है कि 'चोरी' की यह कहानी केवल भ्रष्टाचार को छिपाने के लिए रची गई है?

  2. G-RAM-G और मनरेगा के नियमों का उल्लंघन क्यों? नए G-RAM-G कानून और मनरेगा की धारा 19 के तहत सरकारी संपत्तियों (Assets) की सुरक्षा और रखरखाव की सीधी जिम्मेदारी सरपंच और सचिव की होती है। इतनी भारी लोहे की प्लेट्स गायब हो जाने पर सचिव सकल सिंह चौहान ने अपनी जिम्मेदारी क्यों नहीं निभाई? क्या यह सरकारी कर्तव्य में लापरवाही का मामला नहीं है?

  3. किसानों के लिखित आवेदन को दरकिनार क्यों किया गया? जब अक्टूबर 2026 में किसानों ने सिंचाई के लिए प्लेट्स लगाने हेतु लिखित आवेदन दिया था, तो उस पर तत्काल कार्रवाई क्यों नहीं हुई? किसानों की जायज मांग को नजरअंदाज करना क्या प्रशासनिक तानाशाही और किसानों के अधिकारों का हनन नहीं है?

  4. बजट का 'कागजी खेल' कब बंद होगा? पंच राजेश वर्मा के अनुसार, ग्राम में 700 एकड़ शासकीय भूमि के नाम पर भारी बजट आता है। जिला प्रशासन यह स्पष्ट करे कि G-RAM-G के तहत 'विकसित ग्राम पंचायत' बनाने के लिए आने वाला यह पैसा धरातल पर क्यों नहीं दिख रहा? क्या कभी इन कार्यों का भौतिक सत्यापन (Physical Verification) किया गया?

  5. किसानों की आर्थिक बर्बादी का जिम्मेदार कौन? पंचायत की इस मनमानी के कारण जो पानी व्यर्थ बह गया और अब दो दर्जन किसानों की फसलें सूख रही हैं, उनके वित्तीय नुकसान की भरपाई कौन करेगा? क्या शासन इन दोषी अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों पर वसूली और निलंबन की कार्रवाई करेगा?

निष्कर्ष

सिलपटी का 'प्लेट कांड' महज एक चोरी नहीं, बल्कि किसानों की आजीविका पर हमला है। यदि जिला प्रशासन ने सरपंच प्रमिला बारस्कर और सचिव सकल सिंह चौहान के कार्यकाल की निष्पक्ष जांच नहीं की, तो यह भारत कि किसान राजनीती और वर्त्तमान सर्कार कि कथनी ओर करनी को स्पष्ट दर्शाती है ।

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