सीएमओ-इंजीनियर के बिना चल रही शाहपुर नगर परिषद, 20 करोड़ के निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर बड़ा सवाल
- Mar 20
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Updated: Mar 21
शाहपुर (आशीष राठौर) नगर परिषद शाहपुर इन दिनों अधिकारियों की भारी कमी से जूझ रही है। हालात यह हैं कि नगरीय क्षेत्र में 20 करोड़ रुपये से अधिक के निर्माण कार्य स्वीकृत हैं और कई करोड़ रुपये के कार्य वर्तमान में चल रहे हैं, लेकिन इनकी गुणवत्ता की जांच और निगरानी के लिए न तो स्थायी मुख्य नगर पालिका अधिकारी (सीएमओ) मौजूद हैं और न ही इंजीनियर। ऐसे में ठेकेदारों द्वारा मनमाने ढंग से कार्य किए जाने की शिकायतें सामने आ रही हैं, जिससे निर्माण कार्यों में अनियमितता और भ्रष्टाचार की आशंका बढ़ गई है।
जानकारी के अनुसार नगर परिषद में मुख्य नगर पालिका अधिकारी अरुण कुमार श्रीवास्तव पिछले करीब तीन माह से अवकाश पर थे तथा 12 मार्च को उनका तबादला नप मालथोन जिला सागर कर दिया उनके स्थान पर परिषद का प्रभार भैंसदेही के सीएमओ को दिया गया है, लेकिन वे भी कभी-कभार ही शाहपुर आते हैं और केवल जरूरी फाइलों पर हस्ताक्षर कर वापस चले जाते हैं। इससे नगर परिषद के प्रशासनिक कार्य प्रभावित हो रहे हैं। वहीं तकनीकी स्तर पर भी स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। सिविल इंजीनियर का पद खाली होने के कारण मुलताई नगर परिषद के इलेक्ट्रिकल इंजीनियर को सिविल का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है, जो समय-समय पर केवल औपचारिक हस्ताक्षर के लिए आते हैं। नियमित तकनीकी निगरानी नहीं होने के कारण निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। नगर में इस समय करीब 10 करोड़ रुपये की लागत से अमृत 2.0 योजना के तहत कार्य किए जा रहे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि ठेकेदार अपनी सुविधा के अनुसार कार्य कर रहे हैं और गुणवत्ता का ध्यान नहीं रखा जा रहा है। इसके अलावा नगर के विभिन्न वार्डों में नाली निर्माण के कार्य भी प्रस्तावित हैं, जिनकी टेंडर प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। लेकिन अधिकारियों की अनुपस्थिति के कारण इन कार्यों की शुरुआत में भी देरी हो रही है। नगर परिषद में कई स्वीकृत पद वर्षों से खाली पड़े हुए हैं, जिसके कारण विकास कार्यों की गति धीमी हो गई है। साथ ही निर्माण कार्यों की गुणवत्ता की जांच और तकनीकी निरीक्षण भी प्रभावी ढंग से नहीं हो पा रहा है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि जल्द ही नगर परिषद में स्थायी सीएमओ और इंजीनियर की नियुक्ति नहीं की गई, तो करोड़ों रुपये के निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर गंभीर असर पड़ सकता है और शासन की योजनाओं का लाभ भी प्रभावित होगा।













