top of page

सेवा तीर्थ और कर्तव्य भवन: नए भारत का नया ढांचाSevaTeerthInauguration, DigitalGovernance, SustainableDevelopment

  • Feb 12
  • 1 min read

प्रधानमंत्री के विजन 'सुगम और सक्षम प्रशासन' को साकार करते हुए, ये नए परिसर देश की शासन व्यवस्था को नई ऊंचाई प्रदान करेंगे:

  • शक्ति का केंद्र ‘सेवा तीर्थ’: अब प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO), राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय और कैबिनेट सचिवालय एक ही परिसर 'सेवा तीर्थ' से संचालित होंगे। इससे नीतिगत निर्णयों में तेजी आएगी और विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित होगा।

  • एक छत के नीचे महत्वपूर्ण मंत्रालय: 'कर्तव्य भवन-1 और 2' में देश के प्रमुख मंत्रालय जैसे रक्षा, वित्त, स्वास्थ्य, शिक्षा और कृषि मंत्रालय शिफ्ट होंगे। अब फाइलों और समन्वय के लिए अलग-अलग कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।

  • डिजिटल और आधुनिक कार्यसंस्कृति: ये सभी कार्यालय पूरी तरह डिजिटल और 'फ्यूचर-रेडी' हैं। इसमें आम नागरिकों के लिए विशेष इंटरफेस जोन बनाए गए हैं, जिससे जनता और सरकार के बीच संवाद सरल और प्रभावी होगा।

  • पर्यावरण संरक्षण का संदेश: 4-स्टार GRIHA रेटिंग के साथ बनी ये इमारतें पर्यावरण के प्रति सरकार की संवेदनशीलता को दर्शाती हैं। यहाँ सौर ऊर्जा और जल संरक्षण की विश्वस्तरीय तकनीक का उपयोग किया गया है।

SevaTeerthInauguration, DigitalGovernance, SustainableDevelopment

प्रधानमंत्री का कार्यक्रम (13 फरवरी 2026)

  • दोपहर 1:30 बजे: प्रधानमंत्री श्री मोदी 'सेवा तीर्थ' परिसर का नामकरण और औपचारिक उद्घाटन करेंगे।

  • शाम 6:00 बजे: प्रधानमंत्री एक विशाल सार्वजनिक कार्यक्रम को संबोधित करेंगे, जहाँ वे देश के सामने सुशासन का नया रोडमैप रखेंगे।


यह नया परिसर भारत की पुरानी और बिखरी हुई प्रशासनिक व्यवस्था को पीछे छोड़कर एक संगठित, आधुनिक और सुरक्षित कार्यप्रणाली की शुरुआत है। यह प्रधानमंत्री के 'आत्मनिर्भर भारत' और 'रिफॉर्म, परफॉर्म और ट्रांसफॉर्म' के मंत्र का जीता-जागता उदाहरण है।

Top Stories

bottom of page