सतपुड़ा के जलाशयों पर उमड़ा विदेशी मेहमानों का डेरा: दो दिवसीय पक्षी गणना में दिखे कई दुर्लभ पक्षी SatpuraBirdSurvey AquaticBirdsMP WildlifeConservation
- Jan 7
- 2 min read
मध्य प्रदेश के सतपुड़ा अंचल में जलीय पक्षियों की चहचहाहट ने प्रकृति प्रेमियों और वन विभाग का ध्यान अपनी ओर खींचा है। हाल ही में एशियन वॉटर बर्ड सेंसस (AWBC) और वन विभाग के संयुक्त तत्वाधान में दो दिवसीय विशेष सर्वेक्षण अभियान चलाया गया, जिसमें सतपुड़ा डेम और आसपास के जलाशयों में कई दुर्लभ और प्रवासी पक्षियों की मौजूदगी दर्ज की गई।

सर्वेक्षण में शामिल रहे प्रमुख क्षेत्र
यह गणना 3 और 4 जनवरी को बैतूल जिले के विभिन्न रेंजों में की गई। इसमें मुख्य रूप से शामिल थे:
सारनी व सतपुड़ा डेम: यहाँ का शांत वातावरण पक्षियों के लिए पसंदीदा स्थल बना।
प्रमुख जलाशय: कोसमी डेम, थानी तालाब, कोयलारी, कोठा डेम, मुढ़ा कुप्पा और रानीपुर डेम।
नदियां: राजडोह नदी और राख बांध के आसपास भी सर्वेक्षण किया गया।
दिखे ये दुर्लभ 'विदेशी मेहमान'
सर्वेक्षण के दौरान विशेषज्ञों और वन विभाग की टीम को कई ऐसी प्रजातियां मिलीं जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण मानी जाती हैं। इनमें प्रमुख हैं:
प्रवासी पक्षी: रेड क्रिस्टेड पोचर्ड (Red Crested Pochard), गढवाल, रोसी स्टारलिंग और रड्डी शेल डक।
विशेष प्रजातियां: रिवर लेपविंग, ब्लैक हेडेड बंटिंग, रेड हेडेड बंटिंग, और सुंदर पूंछ वाले फिसनटेल्ड जेकाना।
डिजिटल तकनीक का उपयोग (eBird App)
इस बार के सर्वे की खास बात यह रही कि पक्षियों का डेटा पारंपरिक कागजों के बजाय 'इबर्ड (eBird)' मोबाइल ऐप पर दर्ज किया गया।
SatpuraBirdSurvey AquaticBirdsMP WildlifeConservation
सतपुड़ा बायोडायवर्सिटी कंजर्वेशन सोसायटी के अध्यक्ष आदिल खान ने बताया कि:
"eBird ऐप के माध्यम से प्रत्येक पक्षी की जानकारी जीपीएस लोकेशन के साथ दर्ज की गई है। यह डेटा अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अनुसंधान और संरक्षण कार्यों के लिए उपलब्ध रहेगा।"
टीम और नेतृत्व
वन विभाग द्वारा इस कार्य के लिए विधिवत नोडल अधिकारी नियुक्त किए गए थे। ट्रेनी IFS एस निवेदन के नेतृत्व में सभी रेंज के रेंजर, वनकर्मी और स्वयंसेवकों ने इस अभियान को सफल बनाया। स्वयंसेवकों ने वन विभाग के स्टाफ को पक्षियों की पहचान करने और ऐप के तकनीकी उपयोग की ट्रेनिंग भी दी।
इस सर्वेक्षण का मुख्य उद्देश्य जलीय पक्षियों के संरक्षण के लिए एक ठोस कार्ययोजना बनाना और उनके आवास (Habitats) की निगरानी करना है।









