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संजीव चतुर्वेदी: भ्रष्टाचार के विरुद्ध अडिग 'व्हिसलब्लोअर'(Sanjeev Chaturvedi AntiCorruption Ramon Magsaysay Award | GAMÁKI MEDIA)

  • Dec 25, 2025
  • 2 min read

संजीव चतुर्वेदी (Sanjeev Chaturvedi) केवल एक भारतीय वन सेवा (IFS) अधिकारी नहीं हैं, बल्कि वे भारत में ईमानदारी और प्रशासनिक साहस का एक जीवंत उदाहरण बन चुके हैं। उनकी कार्यशैली और भ्रष्टाचार के प्रति उनकी 'जीरो टॉलरेंस' नीति ने उन्हें देश के सबसे चर्चित नौकरशाहों में से एक बना दिया है।

Sanjeev Chaturvedi AntiCorruption Ramon Magsaysay Award | GAMÁKI MEDIA

1. शुरुआती जीवन और पृष्ठभूमि

संजीव चतुर्वेदी का जन्म उत्तर प्रदेश के प्रयागराज (इलाहाबाद) में हुआ था। उन्होंने अपनी प्रारंभिक और उच्च शिक्षा यहीं से पूरी की। 2002 में वे भारतीय वन सेवा (IFS) के लिए चुने गए और उन्हें हरियाणा कैडर आवंटित किया गया।

2. हरियाणा में कार्यकाल: विवाद और न्याय की लड़ाई

हरियाणा में अपनी पहली ही पोस्टिंग से संजीव चतुर्वेदी ने भ्रष्टाचार के खिलाफ बिगुल फूंक दिया। उनके मुख्य संघर्षों में शामिल हैं:

सरस्वती वन्यजीव अभयारण्य (Saraswati Wildlife Sanctuary): कुरुक्षेत्र में एक नहर के अवैध निर्माण को रोककर उन्होंने पारिस्थितिकी तंत्र की रक्षा की।


Sanjeev Chaturvedi AntiCorruption Ramon Magsaysay Award | GAMÁKI MEDIA

हर्बल पार्क घोटाला (Fatehabad): फतेहाबाद में एक हर्बल पार्क के निर्माण में हुए सरकारी धन के दुरुपयोग को उन्होंने उजागर किया।

राजनीतिक टकराव: उनके द्वारा किए गए इन खुलासों की वजह से उन्हें भारी कीमत चुकानी पड़ी। उनका 12 बार तबादला (Transfer) किया गया और उन्हें निलंबित (Suspend) भी किया गया।

ऐतिहासिक जीत: भारत के राष्ट्रपति ने खुद इस मामले में हस्तक्षेप किया और हरियाणा सरकार के निलंबन आदेश को 'गैर-कानूनी' करार देते हुए रद्द किया। यह भारतीय प्रशासनिक इतिहास में एक दुर्लभ घटना थी।

3. एम्स (AIIMS) दिल्ली में भ्रष्टाचार विरोधी अभियान

2012 में संजीव चतुर्वेदी को प्रतिनियुक्ति (Deputation) पर एम्स, दिल्ली में मुख्य सतर्कता अधिकारी (CVO) नियुक्त किया गया। यहाँ उन्होंने भ्रष्टाचार के खिलाफ अपने अभियान को और तेज किया:

उन्होंने एम्स के भीतर दवाओं की खरीद, पुरानी मशीनों की मरम्मत और निर्माण कार्यों में हो रहे करोड़ों के घोटालों को पकड़ा।

लगभग 200 भ्रष्टाचार के मामलों में वरिष्ठ डॉक्टरों और प्रभावशाली नौकरशाहों के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश की।

2014 में उन्हें विवादास्पद तरीके से CVO के पद से हटा दिया गया, जिसके बाद देशभर में विरोध प्रदर्शन हुए और सरकार की आलोचना हुई।

4. रेमन मैग्सेसे पुरस्कार (Ramon Magsaysay Award - 2015)

2015 में संजीव चतुर्वेदी को प्रतिष्ठित रेमन मैग्सेसे पुरस्कार से सम्मानित किया गया। उन्हें यह सम्मान "सरकारी व्यवस्था में व्याप्त भ्रष्टाचार को उजागर करने के लिए उनके अनुकरणीय साहस" के लिए दिया गया।

विशेष: उन्होंने पुरस्कार में मिली पूरी राशि (लगभग 19.85 लाख रुपये) एम्स के उन निर्धन रोगियों के इलाज के लिए दान कर दी, जिन्हें आर्थिक सहायता की सख्त जरूरत थी।

5. उत्तराखंड में वर्तमान कार्य

हरियाणा सरकार के साथ लगातार तनाव के बाद, उन्होंने अपना कैडर बदलने की अपील की। वर्तमान में वे उत्तराखंड कैडर में कार्यरत हैं। यहाँ हल्द्वानी में शोध विंग के प्रमुख के रूप में उन्होंने कई नवाचार किए हैं, जैसे:

भारत का पहला 'Lichen Park' विकसित करना।

लुप्तप्राय पौधों की प्रजातियों का संरक्षण।

जैव विविधता (Biodiversity) पार्कों का निर्माण।


संजीव चतुर्वेदी का जीवन यह सिखाता है कि ईमानदारी का रास्ता कठिन हो सकता है, लेकिन वह कभी असफल नहीं होता। उन्होंने साबित किया है कि एक सरकारी अधिकारी अपनी शक्तियों का सही उपयोग करके व्यवस्था में आमूल-चूल परिवर्तन ला सकता है।


प्रमुख स्रोत और सार्वजनिक रिकॉर्ड




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