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मालनपुर (भिंड): विकास के नाम पर उजाड़े गए सहरिया जनजाति के आशियाने | SahariyaTribeDisplacement, IndigenousRightsIndia, SocialJusticeStruggles

May 18
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'GAMAKI MEDIA' और 'आबादी की गूंज' की रिपोर्टिंग का बड़ा असर, खबर छपने के बाद मदद के लिए आगे आए हाथ |


मालनपुर / भिंड: मध्य प्रदेश के भिंड जिले के मालनपुर नगर परिषद अंतर्गत तिलोरी ग्राम से विकास के नाम पर आदिवासियों को उजाड़ने का एक बेहद दर्दनाक मामला सामने आया है। यहाँ सदियों से रह रहे सहरिया जनजाति के परिवारों के मकानों को सड़क निर्माण और औद्योगिक विकास के नाम पर जमींदोज कर दिया गया है। 'GAMAKI MEDIA' और 'आबादी की गूंज' अखबार के पत्रकार राजकमल गुप्ता द्वारा की गई साहसिक ग्राउंड रिपोर्टिंग के बाद अब प्रशासन और सामाजिक संगठन जागे हैं। रिपोर्टिंग के बाद ही पीड़ित परिवारों तक राहत सामग्री पहुंचाई गई है और प्रशासन ने भी व्यवस्था बनाने का काम शुरू कर दिया है।


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चुनौतियों भरी रही ग्राउंड रिपोर्टिंग, चाय वाले ने बताया रास्ता

पत्रकार राजकमल गुप्ता ने बताया कि इंडस्ट्रियल एरिया होने के कारण इस दुर्गम स्थान पर पहुंचना बेहद कठिन था। स्थानीय स्तर पर शुरुआत में टीम की उपस्थिति और आदिवासियों के अस्तित्व को ही नकारने का प्रयास किया गया। लेकिन एक चाय की दुकान वाले की मदद से सही जानकारी मिली। कच्ची सड़कों, पत्थरों और उद्योगों के विकास के नाम पर छिन्न-भिन्न किए जा चुके पहाड़ों को पार करते हुए टीम जैसे-तैसे इस सहरिया जनजाति के निवास स्थान तक पहुंची।


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बेघर हुए लोगों की दर्दभरी दास्तान: "हमें सामान तक निकालने का मौका नहीं दिया"

वहां पहुंचने पर पता चला कि सड़क बनाने के नाम पर इन गरीब परिवारों के आशियाने उजाड़ दिए गए हैं, जिससे यहां के लोगों और बच्चों की स्थिति अत्यंत दयनीय हो चुकी है।

  • बुजुर्ग बाबू की आपबीती: मोतियाबिंद से पीड़ित और अस्वस्थ बुजुर्ग बाबू ने रोते हुए बताया, "साहब, जब प्रशासन हमारे मकानों को तोड़ रहा था, मैं वहीं था। मैं बूढ़ा और असहाय हूं, इसलिए अपने घर के अंदर का सामान भी नहीं निकाल पाया और मेरी आंखों के सामने मेरा मकान गिरा दिया गया।" जब उनकी आंख के इलाज के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने दर्द साझा करते हुए बताया कि वे अस्पताल गए थे, लेकिन डॉक्टरों ने कह दिया कि इसका इलाज नहीं होता और अगर करवाना है तो 10,000 रुपये लगेंगे, जो उनके पास नहीं हैं।

  • नातिन का इंटरव्यू: बुजुर्ग बाबू की नातिन ने भावुक होकर बताया, "हम कई दशकों से यहां रहते आए हैं, मेरा तो जन्म भी यहीं हुआ है। जिस दिन प्रशासन ने कार्रवाई की, मैं पास के तालाब में नहाने गई थी और कई लोग काम पर गए थे। जब मैं वापस आई तो पूरा घर मलबे में तब्दील हो चुका था। पुलिस, तहसीलदार और कई नेता वहां मौजूद थे, लेकिन किसी ने हमारी एक न सुनी और सामान तक निकालने नहीं दिया।"

पीने के पानी का संकट: हैंडपंप भी उखाड़ फेंका

प्रशासनिक कार्रवाई के दौरान संवेदनहीनता की हदें तब पार हो गईं, जब इन गरीब आदिवासियों के पीने के पानी के एकमात्र स्रोत यानी हैंडपंप को भी उखाड़ कर फेंक दिया गया। इस भीषण गर्मी में आशियाने छिनने के बाद अब ये परिवार पानी की एक-एक बूंद के लिए तरसने को मजबूर हैं।


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विपरीत परिस्थितियों में भी बची रही आस्था

सब कुछ तबाह हो जाने, दाने-दाने को मोहताज होने और प्रशासनिक क्रूरता झेलने के बावजूद इन सहरिया आदिवासियों ने हिम्मत नहीं हारी। इन तमाम विपरीत परिस्थितियों के बाद भी उन्होंने अपने 'देव स्थान' (पूजा स्थल) को अक्षुण्ण बनाए रखा है। घर टूटने के बाद भी उनकी आस्था अडिग है और उन्होंने अपने देव स्थान को पूरी श्रद्धा के साथ सुरक्षित रखा है।


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बच्चों में कुपोषण और बीमारी का खतरा

ग्राउंड जीरो पर देखा गया कि यहां के बच्चे कुपोषित हैं और फटे-पुराने व गंदे कपड़े पहनने को मजबूर हैं। सड़क निर्माण के दौरान वहां संचालित एकमात्र अस्थाई स्कूल (जो उनकी शिक्षा का जरिया था) को भी मलबे में मिला दिया गया, जिससे बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह बंद हो गई है। वर्तमान में इन सहरिया लोगों ने पत्थरों की अस्थाई दीवारें खड़ी कर, उस पर घास-फूस और पन्नी (प्लास्टिक) डालकर जैसे-तैसे सिर छुपाने की जगह बनाई है, जहां कई बच्चे इस चिलचिलाती गर्मी में बीमार हो रहे हैं।


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रिपोर्टिंग का बड़ा असर: सामाजिक संगठन और प्रशासन आए आगे

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'GAMAKI MEDIA' और 'आबादी की गूंज' की इस ग्राउंड रिपोर्टिंग के बाद स्थानीय समाचार पत्र में खबर को प्रमुखता से प्रकाशित किया गया, जिसके बाद प्रशासन और समाजसेवियों में हलचल तेज हुई।

  • भारत विकास परिषद और मानवाधिकार संगठन द्वारा राहत: खबर का संज्ञान लेते हुए 'भारत विकास परिषद शाखा गोहद' और 'राष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन गोहद' के अध्यक्ष शैलेंद्र सोनी व परिषद के सदस्यों ( जेपी अग्रवाल, जगदीश नामधारी, राम अवतार गौर, जस्पाल सिंह कोरकू एवं शिक्षक डी.के. गांधी) द्वारा त्वरित कार्रवाई करते हुए 35 से अधिक सहरिया परिवारों को राशन किट, सब्जियां और गर्मी से राहत के लिए ठंडे पानी के मिट्टी के घड़े वितरित किए गए। इस पुनीत कार्य में नगर निरीक्षक मालनपुर भी अपनी टीम के साथ उपस्थित रहे। साथ ही ब्रह्मकुमारी आश्रम से बहन ज्योति, अनामिका, अंजली एवं जीतू जी भी मौजूद रहे।

  • प्रशासनिक अधिकारियों का आश्वासन: नगर परिषद सीएमओ रिहान अली एवं तहसीलदार राकेश श्रीवास्तव ने पीड़ित परिवारों के रहने के लिए अस्थाई टेंट और भोजन की व्यवस्था करने का आश्वासन दिया है। इसके साथ ही थाना प्रभारी (नगर निरीक्षक) प्रदीप सोनी द्वारा बच्चों के स्कूल की पुनर्स्थापना के लिए स्थानीय कंपनियों से सहयोग लेने का भरोसा दिलाया गया है।

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कलेक्टर ने दिया उचित व्यवस्था का भरोसा

इस पूरे गंभीर और मानवीय मामले को लेकर जब भिंड कलेक्टर किरोड़ी लाल मीणा से सीधी चर्चा की गई, तो उन्होंने मामले को गंभीरता से लेते हुए तुरंत पूरी स्थिति को दिखवाने (जांच कराने) की बात कही है। साथ ही उन्होंने आश्वस्त किया है कि बेघर हुए पीड़ित सहरिया परिवारों के लिए जल्द से जल्द पीने के पानी सहित उचित और ठोस व्यवस्थाएं कराई जाएंगी।


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