कृषि क्रांति का नया ब्लूप्रिंट: केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान और CM चंद्रबाबू नायडू के बीच रणनीतिक बैठकRuralModernization, AgriTechInnovation, CropDiversification
- Feb 10
- 2 min read

नई दिल्ली | 10 फरवरी 2026 (COURTESY PIB)देश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था और कृषि क्षेत्र को आधुनिक ऊंचाइयों पर ले जाने के उद्देश्य से आज नई दिल्ली स्थित कृषि मंत्रालय में एक उच्च स्तरीय बैठक संपन्न हुई। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान और आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने राज्य की कृषि संभावनाओं और किसानों की समृद्धि के लिए एक विस्तृत रोडमैप पर चर्चा की।
प्रमुख घोषणाएं और प्रगति
बजट आवंटन में कीर्तिमान: श्री शिवराज सिंह चौहान ने मुख्यमंत्री नायडू को बधाई देते हुए कहा कि आंध्र प्रदेश 'विकसित भारत जी-राम-जी योजना' के तहत सबसे पहले बजट आवंटित करने वाला राज्य बन गया है। यह राज्य की कृषि और ग्रामीण विकास के प्रति गंभीर प्रतिबद्धता का प्रमाण है।
फसल विविधीकरण और संवर्धन: केंद्रीय बजट की प्राथमिकताओं को साझा करते हुए बताया गया कि आंध्र प्रदेश में नारियल, कोको और काजू जैसी बागवानी फसलों के उत्पादन, प्रसंस्करण (Processing) और निर्यात को बढ़ावा देने के लिए मंत्रालय की विशेषज्ञ टीम राज्य सरकार के साथ मिलकर काम करेगी।
किसानों को हरसंभव सहयोग: केंद्रीय मंत्री ने राज्य के लंबित मुद्दों के त्वरित निस्तारण और आंध्र प्रदेश को एक 'अग्रणी कृषि-विकास मॉडल' के रूप में विकसित करने का आश्वासन दिया।
RuralModernization, AgriTechInnovation, CropDiversification
क्यों महत्वपूर्ण है यह बैठक?
2026 के वर्तमान परिदृश्य और वैश्विक कृषि बाजार की स्थिति को देखते हुए, इस बैठक के निहितार्थ अत्यंत गहरे हैं:
आयात निर्भरता को कम करना: भारत वर्तमान में खाद्य तेलों और विशिष्ट बागवानी उत्पादों के आयात पर काफी खर्च करता है। आंध्र प्रदेश में तिलहन और बागवानी पर जोर देना केंद्र की 'आत्मनिर्भर भारत' रणनीति का हिस्सा है, ताकि विदेशी मुद्रा की बचत हो सके।
एग्री-टेक और स्मार्ट फार्मिंग: 2026 तक खेती में AI और ड्रोन का महत्व बढ़ चुका है। चंद्रबाबू नायडू के तकनीकी दृष्टिकोण और शिवराज सिंह चौहान के जमीनी अनुभव का मिलन आंध्र प्रदेश को भारत का पहला 'डिजिटल एग्री-हब' बना सकता है।
कोस्टल इकोनॉमी का लाभ: आंध्र प्रदेश की लंबी तटरेखा (Coastline) का उपयोग कोको और नारियल जैसे उत्पादों के सीधे निर्यात के लिए करने की योजना है। यह 'बैकवर्ड और फॉरवर्ड इंटीग्रेशन' की वह कड़ी है, जिसका जिक्र मुख्यमंत्री नायडू ने अपनी चर्चा में किया।
वैल्यू चेन का विकास: अब फोकस सिर्फ फसल उगाने पर नहीं, बल्कि उसे 'ब्रांड' बनाकर अंतरराष्ट्रीय बाजार में बेचने पर है। कोको डेवलपमेंट बोर्ड के माध्यम से आंध्र प्रदेश के किसानों को वैश्विक चॉकलेट और कन्फेक्शनरी उद्योग से जोड़ने की यह एक बड़ी कोशिश है।
मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने कृषि को अपना 'व्यक्तिगत जुनून' बताते हुए स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय कृषि परिदृश्य में आंध्र प्रदेश का 9.9% योगदान केवल शुरुआत है। केंद्रीय सहयोग के साथ, यह साझेदारी 2047 के 'विकसित भारत' के लक्ष्य को प्राप्त करने में आधारशिला साबित होगी।











