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कोविड के बाद पटरी से उतरीं बरबतपुर की उम्मीदें, 700 रुपये बस का किराया देने को मजबूर गरीब ग्रामीण।(Railway Stoppage Barbatpur Station Penchveli Express - GAMÁKI MEDIA )

  • Dec 26, 2025
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बैतूल (Gamakimedia.in): मध्य प्रदेश का बैतूल जिला, जहां से स्थानीय सांसद केंद्र में मंत्री हैं और जिले के ही विधायक सत्ताधारी दल के प्रदेश अध्यक्ष जैसे कद्दावर पद पर हैं, वहां के ग्रामीण आज भी बुनियादी रेल सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं। मामला शाहपुर ब्लॉक मुख्यालय के बरबतपुर रेलवे स्टेशन का है, जहां पेंचवेली एक्सप्रेस के ठहराव (Stoppage) की मांग बरसों से अधूरी है। Railway Stoppage Barbatpur Station Penchveli Express - GAMÁKI MEDIA

Railway Stoppage Barbatpur Station Penchveli Express - GAMÁKI MEDIA

कोविड काल की मार, अब तक नहीं मिला सुधार क्षेत्रवासियों का कहना है कि कोविड काल के दौरान सुरक्षा कारणों से बरबतपुर में पेंचवेली एक्सप्रेस का स्टॉपेज बंद किया गया था, जो स्थिति सामान्य होने के बाद भी आज तक बहाल नहीं हो सका। पूर्व में यहाँ 'पेंचवेली फर्स्ट पैसेंजर' का ठहराव भी था, जिसे बंद कर दिया गया। वर्तमान में भोपाल, देवास और इंदौर जाने के लिए पेंचवेली एक्सप्रेस ही एकमात्र सहारा थी, जिसे अब ग्रामीण तरस रहे हैं।


रूट का विस्तार हुआ, पर ठहराव भूली सरकार

हैरानी की बात यह है कि रेलवे बोर्ड पेंचवेली एक्सप्रेस का विस्तार तो लगातार कर रहा है। इंदौर से छिंदवाड़ा और सिवनी होते हुए यह ट्रेन अब नैनपुर तक जा रही है। मंडला सांसद फग्गन सिंह कुलस्ते इसे मंडला फोर्ट तक ले जाने की तैयारी में हैं, लेकिन शाहपुर जैसे आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र के मुख्य स्टेशन बरबतपुर पर इसे 2 मिनट के ठहराव की अनुमति नहीं मिल रही है।

मजदूरों और छात्रों पर आर्थिक बोझ शाहपुर ब्लॉक के सैकड़ों युवक इंदौर के पीथमपुर और मंडीदीप जैसे औद्योगिक क्षेत्रों में रोजगार के लिए जाते हैं। वहीं बड़ी संख्या में छात्र और व्यापारी भी भोपाल-इंदौर की यात्रा करते हैं।

  • आर्थिक मार: इंदौर तक बस का किराया 500 से 700 रुपये है।

  • सस्ता सफर: पेंचवेली एक्सप्रेस में यही सफर मात्र 150 रुपये में पूरा होता था। आर्थिक रूप से कमजोर आदिवासी वर्ग के लिए बस का भारी-भरकम किराया देना मुश्किल हो रहा है।

नगरवासियों की चेतावनी नगरवासियों और स्थानीय संगठनों ने मांग की है कि बरबतपुर की उपेक्षा बंद की जाए। अगर जल्द ही पेंचवेली एक्सप्रेस का स्टॉपेज बहाल नहीं हुआ, तो क्षेत्र की जनता बड़े आंदोलन के लिए मजबूर होगी। अब देखना यह है कि दिल्ली और भोपाल में ऊंचे पदों पर बैठे जिले के दिग्गज नेता अपने ही क्षेत्र की इस जायज मांग को कब तक पूरा करवा पाते हैं।

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