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बैतूल मेडिकल कॉलेज: पीपीपी मॉडल पर सियासत तेज, जनहित या निजी लाभ? (PPPModelDebate HealthcarePrivatization PublicHealthPolicy)

  • Dec 29, 2025
  • 2 min read
PPPModelDebate HealthcarePrivatization PublicHealthPolicy

निलय डागा ने पीपीपी मॉडल को बताया जनता के साथ वादाखिलाफी; सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं के निजीकरण पर उठाए सवाल

PPPModelDebate HealthcarePrivatization PublicHealthPolicy

बैतूल। बैतूल में मेडिकल कॉलेज के स्वरूप को लेकर राजनीतिक हलकों में बहस छिड़ गई है। जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष निलय डागा ने मेडिकल कॉलेज को पीपीपी (Public-Private Partnership) मॉडल पर लाने के सरकार के फैसले पर अपनी कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है। उन्होंने इसे चुनाव के समय किए गए 'पूर्ण सरकारी मेडिकल कॉलेज' के वादे के विपरीत बताते हुए जनता के हितों के साथ समझौता करार दिया है। PPPModelDebate HealthcarePrivatization PublicHealthPolicy

पीपीपी मॉडल: विकास या निजीकरण की राह?

निलय डागा ने अपनी राय रखते हुए कहा कि पीपीपी मॉडल लागू होने से जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था पर निजी कंपनियों का वर्चस्व बढ़ जाएगा। उनके अनुसार, इसके दूरगामी परिणाम चिंताजनक हो सकते हैं:

  • नियंत्रण का अभाव: डागा का मानना है कि अस्पताल और मेडिकल स्टाफ के निजी प्रबंधन के अधीन जाने से सरकार की भूमिका और नियंत्रण सीमित रह जाएगा।

  • इलाज बनाम व्यापार: उन्होंने आशंका जताई कि जब स्वास्थ्य सेवाएं मुनाफे के उद्देश्य से संचालित होंगी, तो आम मरीज की प्राथमिकता घट सकती है और इलाज एक व्यापार का रूप ले सकता है।

  • कर्मचारियों का भविष्य: उन्होंने डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ की सेवा सुरक्षा को लेकर भी चिंता जाहिर की, उनके अनुसार निजी दबाव में काम करने से इलाज की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है।

"संसाधन सरकारी, मुनाफा निजी क्यों?"

कांग्रेस जिलाध्यक्ष ने एक महत्वपूर्ण नीतिगत सवाल उठाते हुए कहा कि जब जमीन, भवन, बिजली और पानी जैसे तमाम संसाधन सरकार के हैं, तो फिर उसका संचालन निजी हाथों में क्यों सौंपा जा रहा है? उन्होंने तर्क दिया कि यह मॉडल गरीब और आदिवासी वर्ग के लिए शिक्षा और स्वास्थ्य को महंगा बना सकता है, जो सामाजिक न्याय के सिद्धांतों के अनुकूल नहीं है।

पूर्ण शासकीय मेडिकल कॉलेज की मांग

निलय डागा ने स्पष्ट किया कि जिले की स्वास्थ्य समस्याओं का एकमात्र स्थायी समाधान 'पूर्णतः शासकीय मेडिकल कॉलेज' ही है। उनके अनुसार, सरकारी संस्थान ही पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ सस्ता और सुलभ इलाज सुनिश्चित कर सकते हैं।

उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने इस फैसले पर पुनर्विचार नहीं किया, तो कांग्रेस जनता के हक के लिए लोकतांत्रिक तरीके से सड़क से लेकर सदन तक अपनी आवाज बुलंद करेगी।

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