एमपी ट्रांसको को राष्ट्रीय 'पावर लाइन ट्रांसटेक इंडिया अवॉर्ड': वेस्टर्न रीजन में सबसे कम ट्रांसमिशन लॉस के लिए मिला सम्मान (PowerTransmission EnergyEfficiency NationalAward)
- Dec 22, 2025
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मध्यप्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी ने विद्युत पारेषण (Transmission) के क्षेत्र में देश भर में अपनी धाक जमाई है। नई दिल्ली में आयोजित एक गरिमामय समारोह में कंपनी को 'सबसे कम ट्रांसमिशन लॉस' के लिए प्रतिष्ठित राष्ट्रीय पुरस्कार से नवाजा गया है।

प्रमुख उपलब्धियां और सम्मान:
पुरस्कार का नाम: पावर लाइन ट्रांसटेक इंडिया अवॉर्ड।
क्षेत्र (Region): वेस्टर्न रीजन (पश्चिमी क्षेत्र) में प्रथम स्थान।
उपलब्धि: पूरे क्षेत्र में सबसे न्यूनतम ट्रांसमिशन लॉस (बिजली की बर्बादी) दर्ज करना।
स्थान: यशोभूमि इंडिया इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर, नई दिल्ली।
PowerTransmission EnergyEfficiency NationalAward
पुरस्कार वितरण और भागीदारी:
किसने प्राप्त किया सम्मान: एमपी ट्रांसको की ओर से कार्यपालन अभियंता श्री लोकेश द्विवेदी ने यह पुरस्कार ग्रहण किया।
ट्रांसटेक इंडिया-2025: इस कॉन्फ्रेंस में देश भर की 2500 से अधिक ट्रांसमिशन यूटिलिटीज़ के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। यह मंच भारत सरकार के ऊर्जा मंत्रालय से मान्यता प्राप्त है, जहाँ नीति निर्माता और विशेषज्ञ भविष्य की ऊर्जा चुनौतियों पर चर्चा करते हैं।
सफलता का आधार (Evaluation Criteria):
यह चयन किसी एक आधार पर नहीं, बल्कि बेहद कड़े मानकों और आधिकारिक डेटा (CEA और PFC द्वारा जारी) के आधार पर किया गया:
न्यूनतम ट्रांसमिशन लॉस: बिजली एक स्थान से दूसरे स्थान भेजने में सबसे कम बर्बादी।
क्षमता विस्तार: ट्रांसफॉर्मेशन कैपेसिटी और लाइन लेंथ में उल्लेखनीय वृद्धि।
वित्तीय प्रदर्शन: कंपनी का बेहतर आर्थिक प्रबंधन।
ऊर्जा मंत्री की बधाई:
ऊर्जा मंत्री श्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने इस बड़ी जीत पर विभाग के सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को बधाई दी है। उन्होंने कहा:
"यह पुरस्कार प्रदेश की मजबूत ट्रांसमिशन व्यवस्था और तकनीकी दक्षता का प्रमाण है। हमारा लक्ष्य न्यूनतम बिजली बर्बादी के साथ जनता को 24x7 निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करना है।"
एमपी ट्रांसको की इस उपलब्धि का आम जनता पर प्रभाव:
ट्रांसमिशन लॉस कम होने का सीधा मतलब है कि बिजली उत्पादन का अधिकतम हिस्सा उपभोक्ताओं तक पहुँच रहा है। इससे न केवल विभाग का वित्तीय बोझ कम होता है, बल्कि भविष्य में बिजली की दरें स्थिर रखने और बेहतर वोल्टेज सप्लाई सुनिश्चित करने में भी मदद मिलती है।









