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कांग्रेस का 'शराब स्टंट': विरोध या नशे का विज्ञापन?PoliticalSatire, CongressCritique, PublicIssues

Jan 21
2 min read

देवास में कांग्रेस ने एक बार फिर साबित कर दिया कि उनके पास जनता के असली मुद्दों की कमी है। नौवेल्टी चौराहे पर जो नज़ारा दिखा, उसे देखकर लोग हैरान हैं कि यह विरोध प्रदर्शन था या शराब की होम डिलीवरी का कोई नया स्टार्टअप?



1. विरोध के नाम पर शराब का 'प्रमोशन'

युवक कांग्रेस के पूर्व जिलाध्यक्ष जितेंद्र सिंह गौड़ के नेतृत्व में कांग्रेसियों ने हाथ में पोस्टर तो लिए थे, लेकिन उनके ठेले पर सजी शराब की बोतलें कुछ और ही कहानी बयां कर रही थीं। जो विपक्षी दल शहर को नशा मुक्त करने की बात करता है, वही खुद 'घर-घर शराब की होम डिलीवरी' के नारे लगाता सड़कों पर घूम रहा था। क्या यह विरोध का तरीका है या नशे को बढ़ावा देने का घटिया हथकंडा?

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2. फोटो-ऑप के लिए शहर की छवि से खिलवाड़

'नशे में उड़ता देवास' जैसे स्लोगन लिखकर कांग्रेसियों ने न केवल प्रशासन पर निशाना साधा, बल्कि पूरे शहर की छवि को भी धूमिल करने की कोशिश की। राजनीतिक रोटियां सेंकने के लिए इस तरह का 'तमाशा' करना अब कांग्रेस की नई पहचान बनता जा रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर अवैध शराब बिक रही है, तो सबूत दीजिए, लेकिन ठेले पर शराब सजाकर घूमना सिर्फ मीडिया में बने रहने की एक नाकाम कोशिश है।

3. कांग्रेस की 'दोहरी राजनीति' पर सवाल

एक तरफ कांग्रेस अवैध अहातों और शराब बिक्री पर रोक लगाने की मांग कर रही है, और दूसरी तरफ खुद ही शराब की बोतलों के साथ जुलूस निकाल रही है। जनता अब पूछ रही है:

  • क्या कांग्रेस के पास विकास या बेरोजगारी जैसे कोई ठोस मुद्दे नहीं बचे?

  • क्या शराब की बोतलों के साथ फोटो खिंचवाना ही कांग्रेस का 'अनोखा' विरोध है?

  • क्या इस तरह के प्रदर्शनों से समाज में गलत संदेश नहीं जा रहा?

4. मुद्दे से भटकाने की राजनीति

आबकारी विभाग पर आरोप मढ़ना आसान है, लेकिन समाधान के लिए गंभीर प्रयास करने के बजाय ठेला लेकर सड़क पर उतरना यह दर्शाता है कि कांग्रेस सिर्फ 'राजनीतिक स्टंट' में माहिर है। देवास की जनता को अब कांग्रेस के इन 'अनोखे' ड्रामों की असलियत समझ आने लगी है।

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