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विशेष रिपोर्ट: सिलपटी पंचायत में भ्रष्टाचार का 'सर्कल'—नल से पानी गायब, स्टॉप डैम से प्लेट्स चोरी और सड़कों पर 'नागिन' चाल!PanchayatCorruption, WaterCrisisBetul, LocalGovernanceIssues

  • Feb 10
  • 3 min read

बैतूल: केंद्र की G-RAM-G और मनरेगा जैसी योजनाओं की धज्जियां उड़ा रहा पंचायत प्रशासन; ग्रामीणों ने घेरा तो ताला लगाकर भागे जिम्मेदार ?

बैतूल, मध्य प्रदेश | 10 फरवरी 2026 प्रधानमंत्री के 'विकसित भारत' और 'हर घर जल' के संकल्प को मध्य प्रदेश के बैतूल जिले की सिलपटी पंचायत में सरपंच और सचिव की कार्यप्रणाली खुली चुनौती दे रही है। आज ग्राम सिलपटी में उस समय भारी आक्रोश देखा गया जब महीनों से पानी की किल्लत झेल रहे ग्रामीण पंचायत भवन पहुंचे, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी ताला लगाकर नदारद मिले। यह घटना केवल पानी की समस्या नहीं, बल्कि वर्षों से चले आ रहे उस संस्थागत भ्रष्टाचार का हिस्सा है जिसमें सरकारी संपत्ति की चोरी से लेकर घटिया निर्माण तक के संगीन आरोप शामिल हैं।

ताजा घटनाक्रम: 'नल-जल' योजना केवल कागजों पर?

नल-जल योजना के तहत समय पर और पर्याप्त पानी न मिलने से परेशान ग्रामीणों ने आज पंचायत कर्मचारियों को सूचित कर मिलने का समय तय किया था। लेकिन जब ग्रामीण अपनी व्यथा लेकर पहुंचे, तो पंचायत भवन बंद मिला। ग्रामीणों का आरोप है कि यह पंचायत प्रायः बंद ही रहती है और सचिव सकल सिंह चौहान जनता के प्रति जवाबदेही से लगातार बच रहे हैं।

सिलपटी पंचायत के 'भ्रष्टाचार' का काला चिट्ठा (Case Studies)

1. स्टॉप डैम 'प्लेट कांड': चोरी या वित्तीय गबन?

वर्ष 2005 में निर्मित स्टॉप डैम की लोहे की प्लेट्स, जो रबी सीजन में सिंचाई का मुख्य आधार थीं, 2026 की शुरुआत में रहस्यमयी ढंग से हटा दी गईं।

  • नियम का उल्लंघन: मनरेगा और G-RAM-G (Gram Rural Assurance for Minimum Growth) के तहत जल संरचनाओं का रखरखाव पंचायत की जिम्मेदारी है।

  • गंभीर सवाल: बिना FIR दर्ज कराए भारी भरकम लोहे की प्लेट्स को 'चोरी' घोषित करना सीधे तौर पर सचिव की कस्टोडियल लापरवाही है, जो वित्तीय धोखाधड़ी की श्रेणी में आता है।

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2. मानकों की धज्जियां उड़ाती 'सर्पाकार' सड़कें

पत्रकार राजकमल गुप्ता की ग्राउंड रिपोर्ट के अनुसार, ग्राम में बन रही CC रोड में सीमेंट का अनुपात मानक से कम है और वाइब्रेटर का उपयोग नहीं हो रहा है। सड़क का आकार 'S' (टेढ़ा-मेढ़ा) होना तकनीकी विफलता और कमीशनखोरी का जीता-जागता प्रमाण है।

3. मजदूरों के हक पर 'मशीनों' और 'ठेकेदारों' का कब्जा

ग्राम निवासी अर्जुन कजोड़े जैसे कथित अघोषित ठेकेदारों द्वारा मीडिया पर दबाव बनाना और यह दावा करना कि "पक्के निर्माण में मस्टर रोल की जरूरत नहीं होती", पूरी तरह गैर-कानूनी है।

  • कानूनी हकीकत: G-RAM-G और मनरेगा की धारा 19 के तहत प्रत्येक कार्य के लिए E-Muster अनिवार्य है। मशीनों का उपयोग और ठेकेदारी प्रथा इन कानूनों के तहत पूरी तरह प्रतिबंधित है।

विषय

सरकारी नियम / कानून

सिलपटी में हकीकत

जनता की सुनवाई

MP पंचायती राज अधिनियम: पंचायत को नियत समय पर खुला रहना अनिवार्य है।

पंचायत बंद मिलती है, सचिव गायब रहते हैं।

संपत्ति सुरक्षा

Asset Maintenance Rules: सरकारी संपत्ति गायब होने पर तत्काल FIR अनिवार्य है।

बिना FIR के प्लेट्स गायब कर दी गईं।

मजदूरी भुगतान

G-RAM-G डिजिटल गवर्नेंस: मशीनों का उपयोग प्रतिबंधित, स्थानीय मजदूरों को काम अनिवार्य।

मशीनों से काम और मस्टर रोल गायब करने की साजिश।

निर्माण गुणवत्ता

Technical Sanction (TS): वाइब्रेटर का उपयोग और गुणवत्ता मानक अनिवार्य।

बिना बेस के मिट्टी युक्त रेत से घटिया निर्माण।

प्रशासन और सरकार से 5 सीधे सवाल:

  1. तालेबंदी क्यों?: जब ग्रामीण पानी जैसी मूलभूत समस्या के लिए मिलने आए, तो पंचायत भवन में ताला लगाकर भागना क्या 'लोक सेवा गारंटी अधिनियम' का उल्लंघन नहीं है?

  2. FIR पर चुप्पी क्यों?: स्टॉप डैम की कीमती सरकारी प्लेट्स गायब होने के महीनों बाद भी सरपंच प्रमिला बारस्कर और सचिव ने FIR क्यों नहीं कराई? क्या इसमें उनकी संलिप्तता है?

  3. मस्टर रोल का खेल: किस नियम के तहत पक्के निर्माण (CC रोड) में स्थानीय मजदूरों का हक छीनकर बाहरी मशीनों और अघोषित ठेकेदारों को काम दिया जा रहा है?

  4. 700 एकड़ का बजट कहां गया?: पंच राजेश वर्मा के अनुसार, 700 एकड़ शासकीय भूमि और विकास के नाम पर आने वाला भारी बजट धरातल पर क्यों नहीं दिख रहा?

  5. प्रशासनिक मौन: बैतूल भाजपा का गढ़ है, फिर भी 'विकसित भारत' की योजनाओं की ऐसी दुर्दशा पर जिला प्रशासन और जनप्रतिनिधि मौन क्यों हैं?

निष्कर्ष

सिलपटी पंचायत की स्थिति यह दर्शाती है कि यहाँ भ्रष्टाचार की जड़ें गहरी हैं। नल-जल योजना की विफलता, स्टॉप डैम की लूट और घटिया सड़क निर्माण एक ही सिक्के के पहलू हैं। यदि जिला प्रशासन ने सचिव और सरपंच के विरुद्ध धारा 40 और 92 (वित्तीय वसूली और निष्कासन) के तहत कार्रवाई नहीं की, तो ग्रामीणों का लोकतंत्र से भरोसा उठना लाजमी है।

'GAMAKI MEDIA' (आबादी की गूँज) इस मुद्दे पर अपनी पैनी नजर बनाए रखेगा।

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