top of page

स्वच्छ भारत मिशन 2025: कागजों पर चमकते गांव, पर क्या जमीन पर सब 'स्वच्छ' है? ODF Plus Model SanitationChallenges RuralCleanliness

  • Jan 11
  • 2 min read

नई दिल्ली: केंद्र सरकार के पेयजल और स्वच्छता विभाग ने वर्ष 2025 की वार्षिक समीक्षा रिपोर्ट जारी की है। रिपोर्ट के अनुसार, भारत के 83% गांव अब 'ओडीएफ प्लस मॉडल' (ODF Plus Model) की श्रेणी में आ चुके हैं। जहाँ एक ओर सरकारी आंकड़े बड़ी सफलता की कहानी बयां कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर बुनियादी ढांचे की सुरक्षा और रखरखाव पर सवाल भी उठ रहे हैं।

ODF Plus Model SanitationChallenges RuralCleanliness

सरकारी रिपोर्ट की मुख्य बातें (PIB के अनुसार):

  • गांवों की प्रगति: देश के 4.89 लाख गांवों को ओडीएफ प्लस मॉडल घोषित किया गया है।

  • कचरा प्रबंधन: लगभग 5.27 लाख गांवों में ठोस कचरा और 5.41 लाख गांवों में तरल कचरा प्रबंधन की व्यवस्था का दावा किया गया है।

  • शौचालय निर्माण: 2014 से अब तक कुल 12 करोड़ से अधिक व्यक्तिगत शौचालयों का निर्माण हो चुका है।

  • जन भागीदारी: 'स्वच्छता ही सेवा' अभियान के तहत 18 करोड़ लोगों ने श्रमदान किया।

  • ODF Plus Model SanitationChallenges RuralCleanliness

सिक्के का दूसरा पहलू: चुनौतियां और सुरक्षा का अभाव

सरकारी आंकड़ों में भारत भले ही स्वच्छता की ओर तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन हाल ही में इंदौर जैसे शहरों और कई ग्रामीण इलाकों से आई खबरें व्यवस्था की खामियों को उजागर करती हैं।

  1. सुरक्षा मानकों में चूक: इंदौर, जिसे देश का सबसे स्वच्छ शहर कहा जाता है, वहां भी कचरा प्रबंधन या सफाई से जुड़े कार्यों के दौरान श्रमिकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल उठे हैं। मशीनीकरण के बावजूद कई जगहों पर सुरक्षा उपकरणों की कमी जानलेवा साबित हो रही है।

  2. रखरखाव की समस्या: 'हमारा शौचालय, हमारा भविष्य' अभियान के तहत 1 लाख शौचालयों की मरम्मत यह बताती है कि पहले बने हुए शौचालय उपयोग के लायक नहीं रह गए थे। केवल ढांचा खड़ा करना ही काफी नहीं है, उनका लंबे समय तक चालू रहना बड़ी चुनौती है।

  3. सत्यापन का अंतर: सरकारी पोर्टल पर 4.89 लाख गांव 'मॉडल' घोषित हैं, लेकिन भौतिक रूप से केवल 4.15 लाख का ही सत्यापन (Verification) हो पाया है। यह 74,000 गांवों का अंतर जमीनी हकीकत और कागजी दावों के बीच की दूरी को दर्शाता है।


निष्कर्ष:

इसमें कोई दो राय नहीं है कि स्वच्छ भारत मिशन ने देश में स्वच्छता के प्रति जागरूकता पैदा की है। लेकिन इंदौर जैसी घटनाएं हमें याद दिलाती हैं कि "नंबर वन" बनने की होड़ में सफाई कर्मचारियों की सुरक्षा और कचरा प्लांटों के वैज्ञानिक संचालन की अनदेखी नहीं की जानी चाहिए। सरकार को केवल आंकड़ों पर नहीं, बल्कि 'जीरो एक्सीडेंट' और 'सस्टेनेबल मॉडल' पर ध्यान देने की आवश्यकता है।

स्रोत: पीआईबी (PIB) एवं स्वतंत्र समाचार रिपोर्ट।


"जहाँ सरकारी पोर्टल (SBM-G IMIS) प्रगति की तस्वीर दिखा रहे हैं, वहीं सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियां और जमीनी मीडिया रिपोर्ट्स सफाई व्यवस्था में सुरक्षा और रखरखाव की गंभीर चुनौतियों की ओर इशारा करती हैं।"


Top Stories

bottom of page