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विज्ञान जगत में बड़ी खोज: अरावली की पहाड़ियों में मिली दुर्लभ वनस्पति, नाम दिया गया ‘पोर्चुलाका भारत’(New Plant Discovery Aravalli Flora Portulaca Bharat - GAMÁKI MEDIA)

  • Dec 20, 2025
  • 2 min read

एडिटोरियल/विज्ञान और वनस्पति जगत के लिए एक ऐतिहासिक खबर सामने आई है। सतपुड़ा जैवविविधता संरक्षण समिति, सारनी (SBCS) और भारतीय वनस्पति सर्वेक्षण (BSI) के शोधकर्ताओं ने राजस्थान की प्राचीन अरावली पर्वतमाला से एक बिल्कुल नई वनस्पति प्रजाति की खोज की है। इस दुर्लभ पौधे को हमारे देश के सम्मान में ‘पोर्चुलाका भारत’ (Portulaca bharat) नाम दिया गया है।

कैसे हुई इस दुर्लभ प्रजाति की खोज?

इस महत्वपूर्ण खोज की शुरुआत साल 2022 में हुई थी। SBCS के सदस्य और शोधकर्ता निशांत चौहान ने जयपुर के पास अमागढ़ तेंदुआ अभयारण्य (गलताजी क्षेत्र) के पथरीले ढलानों पर एक असामान्य पौधा देखा।

  • अवलोकन: निशांत ने इस पौधे के जीवित नमूनों को सुरक्षित किया और नियंत्रित वातावरण में इसके बढ़ने और फूलों के खिलने का बारीकी से अध्ययन किया।

  • वैज्ञानिक पुष्टि: भारतीय वनस्पति सर्वेक्षण (BSI), देहरादून के शोधकर्ता डॉ. अम्बर ने देश के विभिन्न हरबेरियमों से गहन तुलना करने के बाद यह पुष्टि की कि यह प्रजाति विज्ञान के लिए पूरी तरह नई है।

  • अंतरराष्ट्रीय मान्यता: इस खोज का औपचारिक विवरण जनवरी 2025 में अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक पत्रिका 'फाईटोटैक्सटा' (Phytotaxa) को भेजा गया, जिसे 13 जून 2025 को वैश्विक स्तर पर प्रकाशित किया गया।

(New Plant Discovery Aravalli Flora Portulaca Bharat - GAMÁKI MEDIA)

क्यों खास है ‘पोर्चुलाका भारत’?

  • सीमित संख्या: वर्तमान में यह प्रजाति दुनिया में केवल गलताजी पर्वतीय क्षेत्र तक ही सीमित है, जहाँ इसके मात्र 10 वन्य पौधे दर्ज किए गए हैं।

  • अत्यंत संवेदनशील: अपनी विशिष्ट पारिस्थितिक आवश्यकताओं के कारण यह जलवायु परिवर्तन और मानवीय हस्तक्षेप के प्रति बहुत संवेदनशील है। इसे वर्तमान में IUCN की 'डेटा डिफिशिएंट' श्रेणी में रखा गया है।

  • नाम का महत्व: निशांत चौहान के अनुसार, इस प्रजाति को ‘भारत’ नाम देना देश की समृद्ध पारिस्थितिक विरासत के प्रति एक सम्मान है।

विशेषज्ञों की राय

सतपुड़ा जैवविविधता संरक्षण समिति (SBCS) के अध्यक्ष आदिल खान ने इस उपलब्धि पर खुशी जताते हुए कहा कि यह खोज अरावली जैसी प्राचीन पर्वत श्रृंखलाओं के संरक्षण की आवश्यकता को रेखांकित करती है। उन्होंने कहा कि अरावली न केवल भारत की सबसे पुरानी पर्वतमाला है, बल्कि यह दुर्लभ प्रजातियों का खजाना भी है, जिसका व्यवस्थित सर्वेक्षण और संरक्षण बेहद जरूरी है।

भविष्य की राह

यह खोज भारतीय स्थानिक वनस्पतियों की सूची में एक मील का पत्थर साबित होगी। इससे भविष्य में वनस्पति-भूगोल (Plant Geography) और पारिस्थितिकी (Ecology) के क्षेत्र में अनुसंधान के नए द्वार खुलेंगे। सारनी की संस्था SBCS द्वारा किया गया यह शोध अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का मान बढ़ाने वाला है।

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