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संभागीय समय सीमा बैठक: मुख्य निर्णय और निर्देश सुशासन सप्ताह और डिजिटल गवर्नेंस

  • Dec 25, 2025
  • 2 min read

कमिश्नर श्री कृष्ण गोपाल तिवारी ने सुशासन सप्ताह और विभागीय लक्ष्यों की समीक्षा की।


1. सुशासन सप्ताह और डिजिटल गवर्नेंस (e-Office)

  • पोर्टल अपलोड: सभी विभागों को निर्देश दिए गए हैं कि सुशासन सप्ताह के अंतर्गत अपनी उत्कृष्ट गतिविधियां 25 दिसंबर तक अनिवार्य रूप से पोर्टल पर अपलोड करें।

  • ई-ऑफिस (e-Office): ब्लॉक और तहसील स्तर के सभी कार्यालयों में शत-प्रतिशत कार्य अब ई-ऑफिस सिस्टम के माध्यम से ही किया जाएगा।



2. विकास एवं निवेश (Growth Summit)

  • मुख्यमंत्री का कार्यक्रम: 25 दिसंबर को ग्वालियर में होने वाले 'अभ्युदय मध्य प्रदेश ग्रोथ समिट' का सीधा प्रसारण हर संभाग में होगा।

  • औद्योगिक सौगात: इस दौरान नर्मदापुरम जिले की विभिन्न औद्योगिक इकाइयों का लोकार्पण एवं भूमि पूजन मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा किया जाएगा।

3. दुग्ध समृद्धि संपर्क अभियान (द्वितीय चरण)

  • लक्ष्य: 30 दिसंबर तक चलने वाले इस अभियान में 1,400 पशुपालकों से संपर्क किया जाएगा।

  • उद्देश्य: 5 से 9 पशु रखने वाले पालकों को उन्नत नस्ल, पशु स्वास्थ्य और दुग्ध उत्पादन बढ़ाने हेतु जागरूक करना। सफल पशुपालकों की 'वीडियो बाइट' बनाकर दूसरों को प्रेरित किया जाएगा।

4. जल जीवन मिशन और अन्य निर्देश

  • नल-जल योजना: पूर्ण हो चुकी योजनाओं का 90 दिन का ट्रायल कर उन्हें तत्काल ग्राम पंचायतों को हैंडओवर करने के निर्देश दिए गए।

  • राजस्व संग्रहण: खनिज, परिवहन, आबकारी और पंजीयन विभाग को इस वित्तीय वर्ष के राजस्व लक्ष्यों को समय पर पूरा करने को कहा गया।

  • कर्मचारी कल्याण: परिक्षाधीन अवधि (Probation) पूर्ण करने वाले कर्मचारियों के इंक्रीमेंट और समय मान वेतनमान की प्रक्रिया जल्द पूरी करने के निर्देश।

5. जनहित एवं अतिक्रमण पर सख्ती

  • नहरों से अतिक्रमण हटाना और टेल (अंतिम छोर) तक पानी पहुँचाना सुनिश्चित करें।

  • स्व-सहायता समूहों को मध्याह्न भोजन का भुगतान प्रतिमाह समय पर किया जाए।

  • सापना नहर की मरम्मत और आंगनवाड़ी केंद्रों में नियमित नाश्ता वितरण के निर्देश।

विभागवार लंबित प्रकरणों की समीक्षा (एक नजर में):

बैठक में विभिन्न विभागों के लंबित प्रकरणों पर भी चर्चा हुई:

  • नगरीय प्रशासन: 54 प्रकरण

  • लोक निर्माण विभाग (PWD): 25 प्रकरण

  • जल संसाधन एवं परिवहन: 19-19 प्रकरण

  • जनजाति कार्य विभाग: 10 प्रकरण (इसके अलावा आबकारी, खनिज, कृषि और महिला बाल विकास विभागों की भी समीक्षा की गई)

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