अमृत 2.0 योजना: शाहपुर में ठेकेदार की मनमानी, बीच सड़क खुदाई से जनता बेहाल MGNREGA Issues, Rural Corruption, Administrative Failure
- Jan 18
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Ashish Rathore (GAMAKI MEDIA)- 18 माह की योजना में 12 महीने बीते, काम हुआ सिर्फ 35 फीसदी - सड़क किनारे की जगह बीच रोड पर पाइपलाइन डालने से बढ़ा हादसों का खतरा - वार्डवासियों ने काम रुकवाया; नगर परिषद अध्यक्ष और ठेकेदार की भूमिका पर सवाल
शाहपुर। नगर परिषद शाहपुर में केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी 'अमृत 2.0' योजना नागरिकों के लिए सुविधा के बजाय मुसीबत का सबब बनती जा रही है। पेयजल पाइपलाइन बिछाने के नाम पर एस.के. कंस्ट्रक्शन द्वारा नियमों को ताक पर रखकर बीच सड़क पर खुदाई की जा रही है, जिससे लाखों की लागत से बनी पक्की सड़कें बर्बाद हो रही हैं।

धीमी रफ्तार ने बढ़ाई चिंता
करीब 10.50 करोड़ रुपये की इस योजना को पूरा करने के लिए 18 माह का समय निर्धारित किया गया था। विडंबना यह है कि 12 महीने बीत जाने के बाद भी अब तक केवल 35 प्रतिशत कार्य ही पूरा हो सका है। नगर में कुल 35 किलोमीटर पाइपलाइन बिछाई जानी है, लेकिन अब तक महज 10 किलोमीटर का ही काम हुआ है। पानी की टंकी का निर्माण भी अभी अधूरा है, जिससे समय सीमा के भीतर काम पूरा होना नामुमकिन नजर आ रहा है।
नियमों को दरकिनार कर बीच सड़क खुदाई
नियमों के अनुसार पाइपलाइन सड़क के किनारे (Shoulder) बिछाई जानी चाहिए, लेकिन ठेकेदार द्वारा बीच सड़क की खुदाई की जा रही है। इससे न केवल यातायात बाधित हो रहा है, बल्कि रात के समय अंधेरे के कारण हादसों का खतरा भी बढ़ गया है। कई स्थानों पर खुदाई के बाद मलबा और गड्ढे खुले छोड़ दिए गए हैं।MGNREGA Issues, Rural Corruption, Administrative Failure

वार्डवासियों का आक्रोश: काम रुकवाया
वार्ड क्रमांक 4 सहित अन्य वार्डों में जब ठेकेदार ने बीच सड़क खुदाई शुरू की, तो स्थानीय लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। नागरिकों ने मौके पर पहुंचकर काम रुकवा दिया। लोगों का आरोप है कि खुदाई के दौरान पुरानी पाइपलाइनें टूट रही हैं और जब कर्मचारी से शिकायत की जाती है, तो वे सुधारने के बजाय "सरकारी काम" का हवाला देकर विवाद पर उतारू हो जाते हैं।
बिना NOC के चल रहा कार्य?
नियमतः सीसी रोड की कटिंग के लिए अनुमति और क्षतिपूर्ति राशि जमा करना अनिवार्य है, ताकि बाद में मरम्मत की जा सके। लेकिन शाहपुर में बिना किसी एनओसी (NOC) के खुदाई जारी है। इस पर नगर परिषद अध्यक्ष का तर्क है कि कार्य परिषद का ही है, इसलिए किसी एनओसी की जरूरत नहीं है। स्थानीय लोगों का मानना है कि रोड रेस्टोरेशन की मोटी राशि बचाने के लिए नियमों की अनदेखी की जा रही है।
अधिकारियों का पक्ष
"अमृत 2.0 योजना का कार्य नगर परिषद का ही है, इसलिए ठेकेदार को अलग से एनओसी की आवश्यकता नहीं है। पाइपलाइन टेस्टिंग के बाद ठेकेदार द्वारा रोड को ठीक करके दिया जाएगा।" — रोहित 'विक्की' नायक, अध्यक्ष, नगर परिषद शाहपुर
"जहां भी सीमेंट रोड खोदा जा रहा है, काम पूरा होने के बाद वहां दोबारा सीमेंटिंग की जाएगी। फिलहाल समतलीकरण (Leveling) किया जा रहा है ताकि लोगों को आवागमन में असुविधा न हो।" — प्रियांक, इंजीनियर, एस.के. कंस्ट्रक्शन











