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विशेष रिपोर्ट: बैतूल कि (सिलपटी) पंचायत में 'नियमों की बलि', मशीनों से हो रहा मनरेगा! का कार्य और भ्रष्टाचार? का 'नगीना' खेल!MGNREGA Issues, Rural Corruption, Administrative Failure

  • Jan 17
  • 3 min read

Updated: Jan 18

बैतूल (मध्यप्रदेश): जिले की ग्राम पंचायतों में सामाजिक उत्थान के लिए लागू की गई MGNREGA और GRAMG जैसी कल्याणकारी नीतियां भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ रही हैं। सिलपटी पंचायत में पिछले 5-6 वर्षों से भ्रष्टाचार की जड़ें इतनी गहरी हो चुकी हैं कि प्रशासन की 'दिखावे की कार्रवाई' (जैसे रोजगार सहायक का निलंबन) बेअसर साबित हुई है!




ग्राउंड जीरो की हकीकत: मानकों की धज्जियां उड़ाती 'सर्पाकार' जैसी सड़क

पत्रकार राजकमल गुप्ता की ग्राउंड रिपोर्ट में निर्माणाधीन CC रोड में गंभीर तकनीकी खामियां पाई गईं। पंच राजेश वर्मा ने अगुवाई करते हुए बताया कि शासन की योजनाओं से ग्राम के मजदूर वर्ग को दूर रखा जा रहा है, जिससे उनके सामने भरण-पोषण का संकट खड़ा हो गया है।

  • घटिया सामग्री: सीमेंट का उपयोग मानक से कम है और कंक्रीट मिक्सचर में रेत के बजाय घटिया मिट्टी युक्त रेत का उपयोग किया जा रहा है।

  • तकनीकी विफलता: कंक्रीट को बिना वाइब्रेटर के सेट किया जा रहा है और सड़क का आकार 'S' यानी सर्पाकार जैसा टेढ़ा-मेढ़ा है।

  • अनुभवी मजदूर का दर्द: ग्रामीण रामनारायण कहार ने बताया कि रोड के बेस को ठोस करने के बजाय बीच में सिर्फ बजरी डाल दी गई है। उन्होंने दुःख जताते हुए कहा, "साहब, जब हम काम करते थे तो कंक्रीट सेट करते थे, अब घटिया काम हो रहा है और हमें रोजगार भी नहीं मिल रहा।"


MGNREGA Issues, Rural Corruption, Administrative Failure

मीडिया पर दबाव और नियमों की गंभीर अनदेखी

रिपोर्टिंग के दौरान ग्राम निवासी अर्जुन कजोड़े (ग्रामीणों द्वारा संदर्भित कथित अवैध रेत कारोबारी) द्वारा मीडिया पर दबाव बनाने की कोशिश की गई। ग्रामीणों के अनुसार, अर्जुन और उसके साथियों द्वारा ही इस रोड का निर्माण कराया जा रहा है।

  • भ्रामक दावा: दबाव बनाते हुए अर्जुन कजोड़े ने कैमरे के सामने यह तर्क दिया कि "पक्के निर्माण (CC रोड) में मजदूरों को मस्टर रोल से भुगतान नहीं किया जाता।"

  • सच्चाई और नियम (G-RAM-G एवं मनरेगा): अर्जुन कजोड़े का यह दावा पूरी तरह आधारहीन और गैर-कानूनी है। G-RAM-G (Gram Rural Assurance for Minimum Growth) वास्तव में MGNREGA के उद्देश्यों से प्रेरित एक आधुनिक और पारदर्शी ढांचा है। इसका मुख्य लक्ष्य ग्रामीण परिवारों को न्यूनतम आय सुरक्षा और आजीविका प्रदान करना है। चूँकि G-RAM-G बुनियादी तौर पर मनरेगा के सिद्धांतों और डिजिटल गवर्नेंस (जैसे GramG पोर्टल) पर आधारित है, इसलिए इसमें प्रत्येक कार्य के लिए मस्टर रोल (E-Muster) जारी करना सबसे पहली और अनिवार्य कानूनी शर्त है।

  • मस्टर रोल और जवाबदेही: G-RAM-G प्लेटफॉर्म का उद्देश्य ही मजदूरी भुगतान, मस्टर रोल और लाभार्थी के अधिकारों की जानकारी को पारदर्शी बनाना है। पक्के निर्माण (CC रोड) में भी पत्थर बिछाने, कंक्रीट तैयार करने और क्युरिंग जैसे कार्यों में स्थानीय जॉब कार्ड धारक मजदूरों का नियोजन अनिवार्य है। मस्टर रोल को नकारना सीधे तौर पर मजदूरों के हक के पैसे को 'अघोषित ठेकेदारों' की जेब में डालने की साजिश है।

  • मशीनों और ठेकेदारी पर पूर्ण प्रतिबंध: मनरेगा के उन्नत स्वरूप के रूप में G-RAM-G में भी भारी मशीनों का उपयोग और ठेकेदारी प्रथा पूरी तरह प्रतिबंधित है, ताकि 'सीजनल माइग्रेशन' (मौसमी पलायन) को रोका जा सके और ग्रामीणों को गाँव में ही रोजगार मिल सके।

निष्कर्ष: अर्जुन कजोड़े द्वारा मस्टर रोल की अनिवार्यता को चुनौती देना यह स्पष्ट करता है कि सिलपटी पंचायत में G-RAM-G के डिजिटल गवर्नेंस और पारदर्शिता के नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। "पक्का निर्माण" का बहाना बनाकर मस्टर रोल गायब करना और मशीनों से कार्य कराना न केवल वित्तीय अनियमितता है, बल्कि शासन की ग्रामीण विकास नीतियों पर एक सोची-समझी चोट है।

MGNREGA Issues, Rural Corruption, Administrative Failure

रोजगार की लूट: सरपंच और सचिव की भूमिका !

  1. मेट का खुलासा: पंचायत मेट हरी भजन सिरोरिया ने स्वीकार किया कि सरपंच प्रमीला बारसकर और सचिव सकल सिंह चौहान द्वारा नियमों को ताक पर रखकर अघोषित ठेका दे कर मशीनों से काम कराया जा रहा है।

  2. मजदूरों का विरोध: सरपंच द्वारा ग्रामीणों पर लगाए गए 'काम न करने' के आरोपों का वहां मौजूद ग्रामीणों ने पुरजोर विरोध किया और इसे काम न देने का बहाना बताया।

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प्रशासन से 'GAMAKI MEDIA' के 5 तीखे सवाल ?

  1. अर्जुन कजोड़े के दावे पर जांच क्यों नहीं?: किस नियम के तहत यह कहा जा रहा है कि पक्के निर्माण में मस्टर रोल की जरूरत नहीं? क्या यह मजदूरों का पैसा डकारने की सोची-समझी साजिश है?

  2. मशीनों का अवैध उपयोग क्यों?: जब MGNREGA के तहत मशीनों का उपयोग प्रतिबंधित है, तो सरपंच प्रमीला बरसकर और सचिव सकल सिंह चौहान के संरक्षण में मशीनों से काम क्यों हो रहा है?

  3. मजदूरों का हक किसने छीना?: अनुभवी मजदूर रामनारायण कहार जैसे ग्रामीणों को काम न देकर 'अघोषित ठेकेदारी' प्रथा को बढ़ावा क्यों दिया जा रहा है?

  4. गुणवत्ता की जांच शून्य क्यों?: रोड का बेस ठोस न होना और 'नागिन' जैसा आकार होना क्या इंजीनियरिंग विभाग की मिलीभगत नहीं है?

  5. अवैध रेत माफिया का दखल क्यों?: निर्माण कार्य में अर्जुन कजोड़े जैसे कथित रेत कारोबारियों का हस्तक्षेप क्यों है? क्या पंचायत उनके दबाव में काम कर रही है?

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