शाहपुर मंडी बनी 'डंपिंग यार्ड': व्यापारियों के मक्का भंडारण से गेहूं की फसल के लिए जगह का संकट, प्रशासन की चुप्पी पर सवाल MarketRegulations, AdministrativeNegligence, FarmerProtests
- 5 days ago
- 2 min read
शाहपुर: मध्य प्रदेश के शाहपुर स्थित कृषि उप-मंडी इन दिनों अव्यवस्थाओं का केंद्र बनी हुई है। एक ओर शुक्रवार से गेहूं की सरकारी खरीदी का आगाज़ हो चुका है, वहीं दूसरी ओर मंडी परिसर में व्यापारियों द्वारा हफ़्तों से डंप की गई मक्का किसानों के लिए जी का जंजाल बन गई है। ताजा स्थिति यह है कि इस मक्का में भारी मात्रा में 'घुन' लग चुका है, जो अब नई गेहूं की फसल के लिए बड़ा खतरा बन रहा है।

संक्रमण का खतरा: घुन लगी मक्का से गेहूं की गुणवत्ता पर आंच
मंडी के मुख्य टीन शेड के नीचे व्यापारियों ने पिछले एक महीने से मक्का का विशाल स्टॉक जमा कर रखा है। जानकारी के मुताबिक, लंबे समय से एक ही जगह पड़े रहने के कारण इस मक्का में बड़े पैमाने पर घुन (कीड़े) लग चुके हैं। किसानों की सबसे बड़ी चिंता यह है कि यदि इस घुन लगी मक्का के पास ताज़ा गेहूं रखा जाता है, तो संक्रमण गेहूं में भी फैल जाएगा। इससे गेहूं की गुणवत्ता खराब होगी और किसानों को उनकी मेहनत का सही दाम नहीं मिल पाएगा।

MarketRegulations, AdministrativeNegligence, FarmerProtests
जगह का अभाव: टीन शेड पर व्यापारियों का अवैध कब्जा
गेहूं खरीदी शुरू होने के बावजूद व्यापारियों ने अपना मक्का का स्टॉक नहीं हटाया है। व्यापारियों की इस 'फ्री वेयरहाउसिंग' नीति के कारण किसानों को अपना ताज़ा गेहूं उतारने और सुरक्षित रखने के लिए पर्याप्त जगह नहीं मिल पा रही है। नियमों के मुताबिक मंडी एक नीलामी और खरीदी केंद्र है, न कि व्यापारियों का निजी गोदाम। इस मनमानी से परिसर में अफरा-तफरी का माहौल है।

पुराना इतिहास: प्रशासन की पूर्व की सख्त कार्रवाई
शाहपुर मंडी में अवैध भंडारण का यह कोई नया मामला नहीं है। इससे पूर्व भी जब व्यापारियों ने नियमों को ताक पर रखकर अनाज का भंडारण किया था, तब प्रशासन ने कड़ी कार्रवाई करते हुए भारी जुर्माना लगाया था और परिसर खाली कराए थे। लेकिन वर्तमान में घुन लगी मक्का के ढेर और किसानों की परेशानी को देखकर लगता है कि प्रशासन अपनी पुरानी सख्ती भूल चुका है।

प्रशासनिक उदासीनता से किसानों में रोष
इतनी बड़ी अनियमितता और गेहूं की फसल पर मंडराते खतरे के बावजूद मंडी प्रशासन की चुप्पी संदेह पैदा कर रही है। किसानों का कहना है कि यदि प्रशासन ने जल्द ही निम्नलिखित कदम नहीं उठाए, तो वे आंदोलन के लिए मजबूर होंगे:
तत्काल निष्कासन: टीन शेड से घुन लगी सड़ी हुई मक्का को तुरंत बाहर किया जाए।
कीटनाशक छिड़काव: संक्रमण को रोकने के लिए पूरे परिसर का तत्काल कीटनाशक उपचार (Fumigation) किया जाए ताकि गेहूं सुरक्षित रहे।
दंडात्मक कार्यवाही: नियमों का उल्लंघन करने वाले व्यापारियों पर पुराना रिकॉर्ड देखते हुए कठोर आर्थिक दंड लगाया जाए।
गेहूं खरीदी के इस महत्वपूर्ण समय में प्रशासन की यह ढिलाई क्षेत्र के हजारों किसानों के भविष्य के साथ खिलवाड़ साबित हो सकती है।












