मध्य प्रदेश के सारनीसतपुड़ा क्षेत्र में तेंदुए की दस्तक: सतपुड़ा-मेलघाट कॉरिडोर में बढ़ता संकट और वन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल (Leopard Encounters in Satpura: Wildlife Conservation & Human Conflic)
- Dec 20, 2025
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Updated: Jan 2
सारनी (मध्य प्रदेश): बैतूल जिले का सारनी क्षेत्र एक बार फिर मानव-वन्यजीव संघर्ष की चर्चाओं में है। बीती रात कोल हैंडलिंग प्लांट और व्यस्त स्टेट हाईवे के पास घंटों तक एक तेंदुए का विचरण करना न केवल स्थानीय निवासियों के लिए डर का विषय है, बल्कि यह वन्यजीव संरक्षण की चुनौतियों को भी उजागर करता है। सतपुड़ा-मेलघाट टाइगर कॉरिडोर का हिस्सा होने के कारण यह क्षेत्र बाघों और तेंदुओं के लिए एक प्रमुख आवागमन मार्ग (Corridor) है, लेकिन बढ़ते शहरीकरण और औद्योगिक गतिविधियों ने इस मार्ग को असुरक्षित बना दिया है। (Leopard Encounters Wildlife Conservation Human Wildlife Conflict)

(Leopard Encounters Wildlife Conservation Human Wildlife Conflict)
SBCS ने उठाई लापरवाही के खिलाफ आवाज
सतपुड़ा बायोडायवर्सिटी कंजर्वेशन सोसाइटी (SBCS) के अध्यक्ष आदिल खान ने इस घटना पर कड़ा रुख अपनाते हुए राज्य के प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यप्राणी) को पत्र लिखा है। पत्र में उन्होंने संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
आदिल खान के अनुसार, तेंदुआ काफी समय तक कोल प्लांट की बाउंड्री पार करने की कोशिश करता रहा। व्यस्त स्टेट हाईवे के इतने करीब तेंदुए की मौजूदगी उसकी जान के लिए भी बड़ा खतरा थी। उन्होंने आरोप लगाया कि सारनी में दशहरे के समय से ही एक मादा तेंदुआ अपने शावकों के साथ शहर में देखी जा रही है, इसके बावजूद वन विभाग की सक्रियता न के बराबर है।
सिकुड़ता कॉरिडोर और बढ़ता खतरा
सारनी रेंज की भौगोलिक स्थिति वन्यजीवों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। विशेषज्ञों का मानना है कि:
गलियारे का नुकसान: औद्योगिक परियोजनाओं और सड़क विस्तार के कारण वन्यजीवों का प्राकृतिक रास्ता (Corridor) सिकुड़ रहा है।
बस्तियों की ओर रुख: रास्ता बाधित होने के कारण वन्यजीव मजबूरन मानव बस्तियों और प्लांट क्षेत्रों की ओर रुख कर रहे हैं।
पुरानी घटनाओं से सबक की कमी: साल 2023 में भी इसी क्षेत्र की एबी टाइप कॉलोनी और कोल हैंडलिंग प्लांट में एक बाघ देखा गया था, लेकिन वन विभाग उसे ट्रैक करने में असफल रहा था।
संरक्षण हेतु तत्काल कदम उठाने की मांग
सतपुड़ा बायोडायवर्सिटी कंजर्वेशन सोसाइटी ने मुख्य वन्यजीव अभिरक्षक से निम्नलिखित मांगों पर त्वरित कार्रवाई का आग्रह किया है:
जवाबदेही तय हो: तेंदुए की मौजूदगी के बावजूद समय पर कार्रवाई न करने वाले लापरवाह अधिकारियों की जांच की जाए।
निगरानी और गश्त: संवेदनशील क्षेत्रों में तत्काल ट्रैप कैमरे लगाए जाएं और नियमित गश्त (Patrolling) सुनिश्चित की जाए।
सुरक्षा उपाय: स्टेट हाईवे और औद्योगिक क्षेत्रों के पास चेतावनी बोर्ड एवं अस्थायी बैरिकेड्स लगाए जाएं ताकि वन्यजीव और राहगीर दोनों सुरक्षित रहें।
संयुक्त रणनीति: वन विभाग और स्थानीय संरक्षण संगठनों के बीच समन्वय स्थापित कर एक ठोस एक्शन प्लान बनाया जाए।
यह स्थिति स्पष्ट करती है कि यदि समय रहते प्रशासन ने कोई ठोस कदम नहीं उठाए, तो आने वाले दिनों में किसी बड़ी अनहोनी से इनकार नहीं किया जा सकता।











