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बैतूल: भाजपा की नई योजना ने मजदूरों को बनाया 'बंधुआ', 11 लाख की मजदूरी के लिए दर-दर भटक रहे 39 आदिवासीLaborRights, MGNREGAIssues, WorkerExploitation

  • Feb 4
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बैतूल। जिले में मनरेगा कानून में बदलाव और नई सरकारी योजनाओं के दुष्परिणाम अब खुलकर सामने आने लगे हैं। नागपुर से ओडिशा तक बंधुआ मजदूरों की तरह काम कराए गए 39 आदिवासी मजदूर आज अपनी 11 लाख रुपये की बकाया मजदूरी के लिए कलेक्ट्रेट की जनसुनवाई में गुहार लगाने पहुंचे। इस मामले को लेकर कांग्रेस जिलाध्यक्ष निलय डागा ने सरकार की मजदूर विरोधी नीतियों पर तीखा प्रहार किया है।

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मनरेगा बनाम जी राम जी योजना: 'मजदूरों का अधिकार छीना'!

जिला कांग्रेस अध्यक्ष निलय डागा ने इस स्थिति को "दुर्भाग्यपूर्ण" बताते हुए कहा कि:

  • कानून में कमजोरी: मनरेगा कानून को कमजोर कर सरकार ने मजदूरों से 100 दिन के गारंटी वाले रोजगार का हक छीन लिया है।

  • मजबूरी का फायदा: गांवों में काम न मिलने के कारण आदिवासी मजदूर बाहरी ठेकेदारों के जाल में फंसकर ठगी और बंधुआ मजदूरी का शिकार हो रहे हैं।

  • सरकार की नाकामी: मजदूरों का मजदूरी के लिए कलेक्ट्रेट तक आना सरकार की मजदूर विरोधी सोच का प्रमाण है।

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ओडिशा के पावर प्लांट में कराया 'बलात श्रम'

शिकायत के अनुसार, सारनी के ठेकेदार विशाल सरकार और सूरज मालाकार ने सितंबर 2025 में इन मजदूरों को ₹1000 प्रतिदिन का लालच देकर ओडिशा भेजा था। वहां 18 दिनों तक लगातार काम कराने के बाद जब मजदूर लौटे, तो ठेकेदारों ने भुगतान करने से साफ इनकार कर दिया।

कलेक्टर से सख्त कार्रवाई की मांग

मजदूरों ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर अपनी ₹11 लाख की मजदूरी दिलाने और दोषियों के खिलाफ निम्नलिखित धाराओं में मामला दर्ज करने की मांग की है:

  1. बंधुआ मजदूरी और बलात श्रम

  2. जातिगत अपमान (Atrocity Act)

  3. धोखाधड़ी और ठगी

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