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राजस्थान विधानसभा में गूँजी 'खेजड़ी' की पुकार: विधायक डूंगर राम गेदर ने सरकार को घेरा, आंदोलनकारियों के लिए माँगा न्याय KhejriConservation, BishnoiProtests, EnvironmentalActivism

Feb 4
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जयपुर | 4 फरवरी, 2026

राजस्थान के राज्य वृक्ष खेजड़ी की अंधाधुंध कटाई और बीकानेर क्षेत्र में चल रहे बिश्नोई समाज के लंबे आंदोलन को लेकर आज विधानसभा में भारी गरमागरमी देखी गई। सूरतगढ़ विधायक डूंगर राम गेदर ने शून्यकाल के दौरान इस मुद्दे को उठाते हुए राज्य सरकार की कार्यप्रणाली और उदासीनता पर कड़े सवाल खड़े किए।

KhejriConservation, BishnoiProtests, EnvironmentalActivism

"जुमला साबित हुआ मुख्यमंत्री का आश्वासन"

विधायक गेदर ने सदन में आरोप लगाया कि सरकार ने खेजड़ी संरक्षण को लेकर केवल चुनावी राजनीति की है। उन्होंने कहा:

  • नवंबर 2024 में उपचुनावों के दौरान मुख्यमंत्री ने बिश्नोई समाज के संतों को सख्त कानून बनाने का आश्वासन दिया था, जिसे चुनाव बाद भुला दिया गया।

  • सरकार ने हाल ही में जुर्माने की राशि में जो बदलाव किए हैं, वे संरक्षण के बजाय उद्योगपतियों को लाभ पहुँचाने वाले हैं। सजा के प्रावधानों को कम कर केवल जुर्माने तक सीमित करना खेजड़ी की कटाई को अप्रत्यक्ष रूप से बढ़ावा देना है।

आमरण अनशन और बिगड़ते हालात

विधायक ने सदन को अवगत कराया कि बीकानेर में आंदोलन अपने चरम पर है:

  • नोखादहिया में रामगोपाल बिश्नोई के नेतृत्व में धरना पिछले 567 दिनों से जारी है।

  • वर्तमान में बीकानेर में चल रहे महापड़ाव के तीसरे दिन 29 संत, एक साध्वी और सैकड़ों महिलाएं-पुरुष अन्न-जल त्याग कर आमरण अनशन पर हैं।

  • अनशनकारियों की तबीयत बिगड़ने के बावजूद सरकार का कोई भी प्रतिनिधि संवाद के लिए नहीं पहुँचा है।

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विपक्ष का समर्थन: टीकाराम जूली ने उठाई आवाज

नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने भी इस विषय को अत्यंत गंभीर बताते हुए कहा कि यह सरकार की नैतिक जिम्मेदारी है कि वह अनशन पर बैठे साधु-संतों से बातचीत करे और पर्यावरण संरक्षण के लिए एक स्पष्ट और प्रभावी नीति बनाए।

"मां अमृता देवी का बलिदान व्यर्थ नहीं जाना चाहिए। खेजड़ी केवल एक पेड़ नहीं, हमारा देव वृक्ष है। अगर खेजड़ी बचेगी, तभी राजस्थान बचेगा।" > — डूंगर राम गेदर, विधायक (सूरतगढ़)

विधायक की प्रमुख मांगें:

  1. कठोर कानून: खेजड़ी की कटाई रोकने के लिए तत्काल प्रभाव से सख्त वैधानिक प्रावधान किए जाएं।

  2. त्वरित वार्ता: आमरण अनशन पर बैठे संतों और आंदोलनकारियों से सरकार तुरंत संवाद स्थापित करे।

  3. स्पष्ट नीति: पर्यावरण और राज्य वृक्ष के संरक्षण को लेकर सरकार अपनी नीति और मंशा सार्वजनिक करे।

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