पत्रकारों की सुरक्षा के लिए उठी आवाज: बेतुल से सतना तक 'पत्रकार सुरक्षा कानून' लागू करने की मांग JournalistProtection, MediaFreedom, PressRights
- Feb 9
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भोपाल/बेतुल/सतना | 9 फरवरी 2026 प्रदेश में पत्रकारों पर बढ़ते फर्जी मुकदमों और प्रशासनिक प्रताड़ना के खिलाफ पत्रकार कल्याण परिषद ने मोर्चा खोल दिया है। संगठन द्वारा बेतुल और सतना सहित विभिन्न जिलों में केंद्रीय मंत्रियों और जन-प्रतिनिधियों को ज्ञापन सौंपकर 'पत्रकार सुरक्षा कानून' (Journalist Protection Act) को जल्द से जल्द लागू करने की मांग की गई है।

केंद्रीय राज्यमंत्री और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष को सौंपा ज्ञापन
बेतुल में पत्रकार कल्याण परिषद के पदाधिकारियों ने केंद्रीय राज्यमंत्री डीडी उइके और भाजपा प्रदेशाध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल से मुलाकात की। परिषद के संभागीय प्रभारी राधेश्याम सिन्हा ने बताया कि प्रदेश में लंबे समय से पत्रकारों पर झूठे और प्रताड़ना संबंधी गंभीर मामले दर्ज किए जा रहे हैं, जिससे वे स्वतंत्र रूप से अपना दायित्व नहीं निभा पा रहे हैं।
जिलाध्यक्ष कैलाश अग्निहोत्री ने जोर देते हुए कहा, "पत्रकार लोकतंत्र का चौथा स्तंभ है और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार का नैतिक दायित्व है।"
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भ्रष्ट अधिकारियों पर हो सख्त कार्रवाई: बेदान्ती त्रिपाठी
संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष बेदान्ती त्रिपाठी के नेतृत्व में इस अभियान को गति दी गई है। त्रिपाठी ने सतना सांसद गणेश सिंह को ज्ञापन सौंपते हुए स्पष्ट किया कि पुलिस विभाग के कुछ भ्रष्ट तत्व अपनी कमियों को छिपाने के लिए पत्रकारों को निशाना बनाते हैं और वरिष्ठ अधिकारियों को गुमराह करते हैं।
सांसद का आश्वासन: सतना सांसद गणेश सिंह ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल पुलिस अधीक्षक (SP) को निर्देशित किया कि पत्रकारों के खिलाफ किसी भी शिकायत पर बिना निष्पक्ष जांच के कार्रवाई न की जाए। उन्होंने आश्वस्त किया कि ईमानदार पत्रकारों को पूर्ण संरक्षण दिया जाएगा।
परिषद की मुख्य मांगें और अपील
पत्रकार कल्याण परिषद के महासचिव संजय द्विवेदी और सचिव गिरीश अग्रवाल के मार्गदर्शन में इस अभियान के तहत निम्नलिखित बिंदुओं पर जोर दिया गया है:
सुरक्षा कानून: मध्य प्रदेश में अन्य राज्यों की तर्ज पर 'पत्रकार सुरक्षा कानून' तत्काल लागू हो।
फर्जी मुकदमों पर रोक: पत्रकारों के विरुद्ध आने वाली शिकायतों की उच्च स्तरीय जांच के बाद ही प्राथमिकी (FIR) दर्ज की जाए।
पारदर्शिता: पत्रकारों की शिकायतों पर पुलिस प्रशासन की लीपापोती बंद हो।











