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कैबिनेट ने पड़ोसी देशों से होने वाले निवेश (FDI) के नियमों में बड़े बदलावों को दी मंजूरी IndiaForeignInvestment, StrategicSectorsFDI, BeneficialOwnershipRules

  • Mar 10
  • 2 min read

नई दिल्ली(COURTESY PIB): प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने भारत के साथ जमीनी सीमा साझा करने वाले देशों (LBC) से होने वाले निवेश की गाइडलाइंस में महत्वपूर्ण संशोधन किए हैं।

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इन बदलावों का मुख्य उद्देश्य प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) के नियमों को स्पष्ट करना, स्टार्टअप्स और डीप-टेक क्षेत्र में वैश्विक निवेश को बढ़ावा देना और 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' को मजबूती देना है।

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संशोधित एफडीआई नीति के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:

1. 'बेनिफिशियल ओनर' (BO) की स्पष्ट परिभाषा

अब निवेश करने वाली संस्था के 'बेनिफिशियल ओनर' के निर्धारण के लिए प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग रूल्स, 2005 के मानदंडों को अपनाया जाएगा। यह परिभाषा वैश्विक निवेश समुदाय में व्यापक रूप से मान्य है, जिससे नियमों में स्पष्टता आएगी।

2. 10% तक के निवेश के लिए 'ऑटोमेटिक रूट'

  • यदि किसी विदेशी निवेश इकाई में पड़ोसी देश के बेनिफिशियल ओनर की हिस्सेदारी 10% या उससे कम है और उनके पास कंपनी का नियंत्रण (Control) नहीं है, तो ऐसे निवेश को ऑटोमेटिक रूट के तहत अनुमति दी जाएगी।

  • ऐसे निवेशों के लिए संबंधित भारतीय कंपनी को केवल DPIIT को आवश्यक जानकारी और विवरण रिपोर्ट करना होगा।

3. रणनीतिक क्षेत्रों के लिए 60 दिनों की समय सीमा

सरकार ने निवेश प्रस्तावों पर त्वरित निर्णय लेने के लिए 60 दिनों की निश्चित समय सीमा तय की है। यह समय सीमा निम्नलिखित क्षेत्रों के लिए लागू होगी:

  • कैपिटल गुड्स और इलेक्ट्रॉनिक कैपिटल गुड्स।

  • इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स (Electronic Components)।

  • पॉलीसिलिकॉन, इंगट-वेफर और सोलर सेल।

4. भारतीय नियंत्रण और स्वामित्व की शर्त

इन विशिष्ट क्षेत्रों में निवेश के दौरान यह सुनिश्चित किया जाएगा कि निवेश प्राप्त करने वाली भारतीय संस्था का बहुमत शेयरहोल्डिंग और नियंत्रण (Control) हर समय भारतीय नागरिकों या भारतीय संस्थाओं के पास ही रहे।

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