भारत की वैश्विक धाक: आत्मनिर्भरता और निर्यात में वृद्धि, आंकड़े... IndiaEconomicGrowth, KeySectors, GovernmentInitiatives
- Mar 2
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भारत ने वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद खुद को एक तेज़ गति से बढ़ती अर्थव्यवस्था के रूप में स्थापित किया है। आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 के अनुसार, भारत की विकास दर दुनिया के लिए "ईर्ष्या का विषय" है।
प्रमुख आर्थिक आंकड़े (अप्रैल-जनवरी 2025-26)
क्षेत्र | कुल मूल्य (USD) | वृद्धि (YoY) |
कुल निर्यात (वस्तु एवं सेवाएँ) | 720.76 बिलियन | +6.15% |
सेवा निर्यात | 354.13 बिलियन | +10.57% |
प्रमुख क्षेत्रों में 'मेक इन इंडिया' का जादू
1. इलेक्ट्रॉनिक्स और मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग
भारत अब दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल निर्माता बन गया है।
उत्पादन: 2014-15 में ₹18,000 करोड़ से बढ़कर 2024-25 में ₹5.45 लाख करोड़ (28 गुना वृद्धि)।
सेमीकंडक्टर: 'इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन 2.0' के तहत ₹40,000 करोड़ के परिव्यय के साथ घरेलू चिप डिजाइन और निर्माण पर जोर दिया जा रहा है।

2. ऑटोमोटिव उद्योग
भारत दुनिया का सबसे बड़ा दोपहिया और तिपहिया वाहनों का बाजार है।
पैसेंजर और कमर्शियल वाहनों के मामले में भारत वैश्विक स्तर पर तीसरे स्थान पर है।
PM E-DRIVE: ₹10,900 करोड़ की इस योजना के माध्यम से इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) को बढ़ावा दिया जा रहा है।
3. रक्षा क्षेत्र (Self-Reliance in Defence)
रक्षा उत्पादन रिकॉर्ड ₹1.54 लाख करोड़ (FY 2024-25) तक पहुँच गया है।
भारत अब अपनी रक्षा जरूरतों का 65% घरेलू स्तर पर बना रहा है।
लक्ष्य: 2029 तक ₹50,000 करोड़ का रक्षा निर्यात हासिल करना।
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4. फार्मास्युटिकल्स: "दुनिया की फार्मेसी"
भारत मात्रा (Volume) के हिसाब से दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा दवा उत्पादक है।
Penicillin G जैसे महत्वपूर्ण कच्चे माल (API) के लिए 'PLI Scheme' के तहत आत्मनिर्भरता बढ़ाई जा रही है।
निर्यात पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूती: निर्यात प्रोत्साहन मिशन (EPM)
सरकार ने ₹25,060 करोड़ के परिव्यय के साथ Export Promotion Mission को मंजूरी दी है, जिसके मुख्य स्तंभ हैं:
निर्यात फैक्टरिंग: MSMEs के लिए सस्ती कार्यशील पूंजी।
ई-कॉमर्स निर्यात: ऑनलाइन निर्यातकों के लिए ₹50 लाख तक की ऋण सुविधा।
TRACE: अंतरराष्ट्रीय प्रमाणन और अनुपालन के लिए वित्तीय सहायता।
LIFT & FLOW: रसद (Logistics) और विदेशी वेयरहाउसिंग में मदद।
निष्कर्ष
भारत की रणनीति स्पष्ट है: "भारत में निर्माण करें, केवल भारत के लिए नहीं, बल्कि दुनिया के लिए।" आयात प्रतिस्थापन (Import Substitution) और निर्यात प्रोत्साहन के इस अनूठे संगम ने भारत को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला (Global Supply Chain) का एक विश्वसनीय केंद्र बना दिया है।












