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(ORDER-PDF)NHRC ने ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के कल्याण के लिए जारी की 'एडवाइजरी 2.0'; 11 मंत्रालयों और सभी राज्यों को दिए बड़े निर्देश HumanRightsAdvocacy, TransgenderRights, LegalReformsIndia

  • May 21
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नई दिल्ली: राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के मानवाधिकारों की रक्षा और उनके कल्याण को सुनिश्चित करने के लिए एक नई 'एडवाइजरी 2.0' जारी की है। आयोग ने केंद्र सरकार के 11 मंत्रालयों, भारत के महापंजीयक एवं जनगणना आयुक्त कार्यालय और सभी राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों को यह दिशा-निर्देश भेजे हैं।

यह एडवाइजरी सितंबर 2023 में जारी की गई पिछली गाइडलाइंस की निरंतरता में आई है, जिसका उद्देश्य ट्रांसजेंडर समुदाय के सामने आ रही मौजूदा और नई चुनौतियों का समाधान करना है। NHRC ने सभी संबंधित विभागों से अगले दो महीने के भीतर इस पर की गई कार्रवाई की रिपोर्ट (Action Taken Report) मांगी है।


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एडवाइजरी के 10 मुख्य क्षेत्र और प्रमुख सिफारिशें:

  • जनगणना में अलग कैटेगरी: आगामी राष्ट्रीय जनगणना (Census) और अन्य राष्ट्रीय सर्वेक्षणों में केवल 'थर्ड जेंडर' के बजाय 'इंटरसेक्स' (Intersex), 'ट्रांसमेन' (Transmen) और 'ट्रांसवुमन' (Transwomen) जैसी अलग-अलग कैटेगोरी को शामिल किया जाए, ताकि सटीक डेटा मिल सके।

  • कानूनों की समीक्षा और संपत्ति का अधिकार: जन्म-मृत्यु पंजीकरण अधिनियम, जुवेनाइल जस्टिस एक्ट और उत्तराधिकार कानूनों की समीक्षा की जाए। ट्रांसजेंडर और इंटरसेक्स व्यक्तियों को बिना किसी भेदभाव के समान विरासत, आवास और संपत्ति का अधिकार मिलना चाहिए।

  • शिक्षा और बिना मेडिकल प्रूफ के एडमिशन: शिक्षण संस्थानों में ट्रांसजेंडर छात्रों को उनके द्वारा स्वयं निर्धारित जेंडर (Self-identified gender) के आधार पर एडमिशन दिया जाए। इसके लिए किसी मेडिकल प्रूफ की मांग न की जाए। साथ ही स्कूलों-कॉलेजों में जेंडर-न्यूट्रल सुविधाएं (जैसे शौचालय) और शिकायत निवारण तंत्र बनाए जाएं।

  • हेल्थकेयर और मेडिकल प्रोटोकॉल: जेंडर-अफर्मिंग हेल्थकेयर (Gender-affirming healthcare) के लिए मानक और नैतिक मेडिकल प्रोटोकॉल विकसित किए जाएं। सेक्स रीअसाइनमेंट सर्जरी (SRS) के खर्चों को रेगुलेट किया जाए और स्वास्थ्य बीमा (Insurance) में इनके इलाज को कवर किया जाए।

  • पुलिस और जेलों के लिए SOP: पुलिस और जेलों के लिए गिरफ्तारी, तलाशी, पूछताछ और हिरासत को लेकर एक व्यापक एसओपी (SOP) बनाई जाए, जिसमें उनकी गोपनीयता और अधिकारों का सम्मान हो। इसके अलावा भेदभाव और हिंसा के खिलाफ समर्पित लीगल एड सेल और हेल्पलाइन बनाई जाएं।

  • सुरक्षित कार्यस्थल (Workplace Reforms): कंपनियों और दफ्तरों में जेंडर-न्यूट्रल इंफ्रास्ट्रक्चर, समावेशी एचआर (HR) नीतियां और अनिवार्य रूप से डायवर्सिटी डिस्क्लोजर (विविधता का खुलासा) लागू किया जाए।

  • बुजुर्गों का कल्याण और गरिमा गृह: बुजुर्ग ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के लिए कल्याणकारी योजनाओं की दस्तावेजीकरण प्रक्रिया को आसान बनाया जाए और उनके लिए विशेष ओल्ड-एज होम व कम्युनिटी शेल्टर स्थापित किए जाएं। इसके साथ ही इंटरसेक्स बच्चों पर उनकी सहमति के बिना किए जाने वाले मेडिकल ऑपरेशनों पर रोक लगाने की सिफारिश की गई है।

सकारात्मक बदलाव की उम्मीद: आयोग ने साल 2019 के ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम और 'गरिमा गृह' जैसी सरकारी पहलों की सराहना की है, लेकिन साथ ही यह भी माना है कि ज़मीनी स्तर पर अभी भी शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक स्वीकार्यता के मामले में बड़े सुधारों की जरूरत है।

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