ताप्ती प्रवाह क्षेत्र की जमीन पर कब्जे की साजिश? 108 साल पुराने रिकॉर्ड में छेड़छाड़ का खुलासा HistoricalLandRecords, AdministrativeIrregularities, RevenueFraud
- Mar 12
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मुलताई (बैतूल)। पवित्र नगरी मुलताई में ताप्ती नदी के प्रवाह क्षेत्र की बेशकीमती जमीन को लेकर एक बड़ा भूमि घोटाला सामने आया है ! राजस्व रिकॉर्ड और नामांतरण प्रक्रिया में हुई कथित अनियमितताओं ने प्रशासन के सामने गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं! ताप्ती विकास प्राधिकरण की शिकायत के बाद तहसील प्रशासन द्वारा की गई जांच में 1917 से लेकर अब तक के खसरों और नामों में हुए चौंकाने वाले बदलाव उजागर हुए हैं।

विवाद की जड़: खसरा नंबर 242 और 0.58 एकड़ जमीन
पूरा विवाद मुलताई स्थित खसरा नंबर 242 की 0.58 एकड़ जमीन से जुड़ा है। ताप्ती विकास प्राधिकरण समिति द्वारा प्रस्तुत आवेदन के अनुसार, वर्ष 1917-18 के रिकॉर्ड में यह भूमि नदी के प्रवाह क्षेत्र में दर्ज थी, जिसे कालांतर में षड्यंत्रपूर्वक निजी नामों पर परिवर्तित कर दिया गया। वर्तमान में इस भूमि पर छह बटांकन (बंटवारे) दर्ज हो चुके हैं, जिनका आधार संदिग्ध माना जा रहा है।
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तहसील की जांच में सामने आए मुख्य तथ्य:
तहसीलदार मुलताई द्वारा गठित विशेष जांच दल ने 12 मार्च 2026 को मौके पर पहुंचकर पंचनामा तैयार किया, जिसमें रिकॉर्ड के विखंडन का पूरा इतिहास सामने आया:
वर्ष 1917-18: मूल खसरा नंबर 242, कुल रकबा 0.58 एकड़ दर्ज था।
वर्ष 1954-55: इस भूमि को तीन हिस्सों में बांटा गया:
242/1 (0.38 एकड़) - नालाबंदी
242/2 (0.10 एकड़) - सत्यनारायण मंदिर
242/3 (0.10 एकड़) - नाला
वर्ष 1972-73: रिकॉर्ड में हेरफेर करते हुए पुराने खसरा 242/1 को नया नंबर 563 (0.38 एकड़) दिया गया, जिसका एक हिस्सा नदी क्षेत्र में दर्ज बताया गया।
वर्तमान स्थिति: अब खसरा नंबर 560 के तहत छह अलग-अलग व्यक्तियों के नाम दर्ज पाए गए हैं। जांच में पता चला कि खसरा 560/2 (0.247 एकड़) का संबंध पुराने खसरा 242/3 (0.10 एकड़) से जोड़ा जा रहा है, जो क्षेत्रफल में विसंगति को दर्शाता है।
इन संबंधित पक्षों को थमाया गया नोटिस
तहसीलदार कार्यालय ने 10 मार्च 2026 को सूचना पत्र जारी कर निम्नलिखित पक्षों को साक्ष्यों के साथ तलब किया है:
हनुमानदास पिता मोतीदास, किसनदास पिता नानकदास उदासी।
मुरलीधर, पुरुषोत्तम, लक्ष्मीचंद, संतोष पिता सूरजमल अग्रवाल।
साधना पति सुरेश, प्रेमलता देवी, आशादेवी, किरण देवी अग्रवाल।
उषा बाई पति वासुदेव (कुनबी) एवं अन्य संबंधित।
प्रशासनिक कार्रवाई और चेतावनी
जांच दल (जिसमें घनश्याम सोनी, दिनेश कालभोर, रोहित करदाते और वीरेंद्र सहित अन्य अधिकारी शामिल थे) ने मौके की स्थिति का विस्तृत पंचनामा तैयार किया है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यदि संबंधित पक्ष संतोषजनक दस्तावेज पेश नहीं करते हैं, तो कड़ी एकपक्षीय कार्रवाई की जाएगी।
निष्कर्ष: 108 साल पुराने दस्तावेजों से छेड़छाड़ का यह मामला यदि साबित होता है, तो यह जिले का सबसे बड़ा राजस्व घोटाला हो सकता है। फिलहाल, प्लॉटिंग और अवैध कब्जों को लेकर जांच जारी है।











