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बैतूल में उम्मीदों को मिले नए हाथ: दो दिवसीय शिविर में 70 दिव्यांगों को नि:शुल्क इलेक्ट्रॉनिक कृत्रिम हाथ का वितरणHealthcareInitiatives, ProstheticSupport, CommunityHealth

  • Jan 17
  • 2 min read

बैतूल: जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की एक अनूठी पहल के तहत बैतूल जिला चिकित्सालय में 'मुस्कान' लौट आई है। कलेक्टर श्री नरेन्द्र कुमार सूर्यवंशी के मार्गदर्शन में, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) और इनाली फाउंडेशन के सहयोग से आयोजित दो दिवसीय विशेष शिविर में उन लोगों को नई शक्ति प्रदान की गई, जिन्होंने किसी दुर्घटना या कारणवश अपने हाथ खो दिए थे।

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तकनीक से बदली जिंदगी: अपर कलेक्टर ने देखा डेमो

शुक्रवार को शिविर का शुभारंभ अपर कलेक्टर श्रीमती वंदना जाट द्वारा किया गया। उन्होंने क्रिटिकल केयर यूनिट में चल रहे 'फिटमेट एरिया' का बारीकी से निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने कृत्रिम हाथ लगवा चुके हितग्राहियों से बात की और यह देखा कि कैसे ये 'प्रोस्टेटिक इलेक्ट्रिक हैंड' एक सेंसर युक्त सॉकेट की मदद से काम करते हैं। यह तकनीक कोहनी के निचले हिस्से में फिट की जाती है, जिससे व्यक्ति अपने दैनिक कार्य आसानी से कर सकता है।HealthcareInitiatives, ProstheticSupport, CommunityHealth

पहली बार सरकारी प्रयास से मिला नि:शुल्क लाभ

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. मनोज कुमार हुरमाड़े ने बताया कि जिले में यह पहला अवसर है जब शासन द्वारा इतने बड़े स्तर पर नि:शुल्क इलेक्ट्रॉनिक हाथ उपलब्ध कराए जा रहे हैं।

  • पात्रता: 15 वर्ष से अधिक आयु के ऐसे व्यक्ति जिनके कोहनी के नीचे का हिस्सा नहीं है।

  • चिन्हांकन: आरबीएसके दल, आशा कार्यकर्ताओं और एएनएम ने घर-घर जाकर कुल 126 हितग्राहियों की पहचान की।

  • सहयोग: इस पुनीत कार्य में जिला प्रशासन और सामाजिक न्याय विभाग का विशेष योगदान रहा।

क्षेत्रवार वितरण: 16 जनवरी का लेखा-जोखा

आरबीएसके मैनेजर योगेन्द्र दवण्डे के अनुसार, पहले दिन विभिन्न विकासखंडों के 70 हितग्राहियों को लाभान्वित किया गया, जिसका विवरण इस प्रकार है:

  • शाहपुर: 17, घोड़ाडोंगरी व सेहरा: 16-16

  • प्रभात पट्टन: 06, हरदा: 07

  • अन्य: आठनेर (02), आमला (02), भैंसदेही, चिचोली, मुलताई और भीमपुर से 1-1 हितग्राही।

आज भी जारी रहेगा शिविर

शिविर का दूसरा चरण 17 जनवरी (शनिवार) को भी जिला चिकित्सालय में जारी है। इसमें आमला, आठनेर, भैंसदेही, मुलताई और बैतूल शहरी क्षेत्र के शेष चिन्हित हितग्राहियों को कृत्रिम हाथ प्रदान किए जाएंगे।

शिविर की सफलता में डॉ. शैलेष वर्मा (NHM), प्रभारी सिविल सर्जन डॉ. रूपेश पद्माकर, नोडल अधिकारी डॉ. केदार सिंह जाटव और उनकी पूरी टीम का सक्रिय योगदान रहा।


  • आत्मनिर्भरता की ओर कदम: इलेक्ट्रॉनिक हाथ मिलने से दिव्यांग अब स्वावलंबन के साथ जीवन जी सकेंगे।

  • सटीक निगरानी: भोपाल से आई NHM की टीम खुद शिविर की मॉनिटरिंग कर रही है।

  • मानवीय संवेदना: प्रशासन का यह चेहरा जनता के बीच एक सकारात्मक संदेश दे रहा है।

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