बैतूल में विकास का 'शक्ति प्रदर्शन': 8 इंजनों वाली सरकार के सामने 18 करोड़ के माचना पुल की अग्निपरीक्षा GovernmentOversight, InfrastructureDevelopment, CorruptionWatch
- Jan 18
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केंद्रीय मंत्री और विधायकों की मौजूदगी में भूमिपूजन; क्या अब रुकेगा निर्माण कार्यों में भ्रष्टाचार? - जनता का सवाल: भारी-भरकम 'वीआईपी' फौज की मौजूदगी में क्या गुणवत्ता से होगा समझौता? - 6 करोड़ से 18 करोड़ हुआ बजट, अब बारी है 100 साल टिकने वाले निर्माण की

बैतूल। बैतूल की सियासत में जब '8 बड़े इंजन' (एक केंद्रीय मंत्री और पांच विधायक) हों, तो उम्मीदें सातवें आसमान पर होती हैं। रविवार को करबला घाट पर माचना नदी पर 18.43 करोड़ की लागत से बनने वाले 4-लेन पुल का भूमिपूजन इसी भारी-भरकम लाव-लश्कर के बीच संपन्न हुआ। लेकिन इस भव्यता के पीछे जनता का एक ही चुभता हुआ सवाल है— क्या इतने बड़े चेहरों की मौजूदगी निर्माण में होने वाले भ्रष्टाचार और घटिया सामग्री के खेल को रोक पाएगी?
बजट तीन गुना, तो जवाबदेही भी हो तीन गुनी
विधायक हेमंत खंडेलवाल (BJP STATE PRESIDENT MP) ने मंच से ऐलान किया कि जनता की सुविधा के लिए उन्होंने इस पुल का बजट 6 करोड़ से बढ़ाकर 18.43 करोड़ करवाया और चौड़ाई भी दोगुनी कर दी। निश्चित तौर पर यह बड़ी उपलब्धि है, लेकिन वर्तमान में मध्यप्रदेश में जिस तरह निर्माण कार्यों में 'कमीशनखोरी' की खबरें आती हैं, उसे देखते हुए प्रशासन और ठेकेदार पर अब पैनी नजर रहेगी। जब पूरी राजनैतिक शक्ति (6 इंजन) इस प्रोजेक्ट के पीछे है, तो गुणवत्ता में एक प्रतिशत की भी कमी अक्षम्य होगी।
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भ्रष्टाचार मुक्त बैतूल का 'लिटमस टेस्ट'
बैतूल को महानगर बनाने का सपना देख रहे जनप्रतिनिधियों के लिए यह पुल एक 'लिटमस टेस्ट' की तरह है। केंद्रीय मंत्री दुर्गादास उइके और विधायक खंडेलवाल ने इसे आने वाले 100 सालों की जरूरत बताया है। 100 साल का दावा तभी सच होगा जब अधिकारी और ठेकेदार कागजों से निकलकर जमीन पर ईमानदारी से काम करेंगे। जनता अब केवल भूमिपूजन की तस्वीरों से खुश नहीं होने वाली, उसे 'जीरो करप्शन' वाला इंफ्रास्ट्रक्चर चाहिए।
पुरानी विरासत और नई जिम्मेदारी
120 साल पुरानी पुरानी पुलिया आज भी खड़ी है, जो उस दौर की ईमानदारी का प्रतीक है। नया 4-लेन पुल उसी के बगल में बनेगा। यह देखना दिलचस्प होगा कि 'आधुनिक तकनीक' और '2 इंजनों वाली सरकार' के दौर में बना यह पुल क्या उस पुरानी पुलिया जैसी मजबूती दिखा पाएगा?
विपक्ष और जनता की नजरें निर्माण पर
कार्यक्रम में भले ही भाजपा के दिग्गज नेताओं का जमावड़ा रहा, लेकिन अब इस 18.43 करोड़ के प्रोजेक्ट के हर एक पिलर और कंक्रीट की क्वालिटी पर शहरवासियों की नजर रहेगी। एसडीओ ब्रिज गिरीश हिंगवे ने 18 माह का समय दिया है। यह 18 महीने तय करेंगे कि बैतूल के ये '6 इंजन' जिले को विकास की नई पटरी पर ले जाते हैं या फिर पुराने ढर्रे पर ही गाड़ी चलती रहेगी।
एक नज़र में चुनौतियां:
6 इंजनों का तालमेल: क्या जिले के सभी बड़े नेता निर्माण के दौरान मॉनिटरिंग में भी यही एकजुटता दिखाएंगे?
भ्रष्टाचार पर लगाम: करोड़ों के इस खेल में क्या ठेकेदार पर नकेल कसी जाएगी?
समय सीमा: 18 महीने का लक्ष्य कागजों तक सीमित रहेगा या धरातल पर गुणवत्ता के साथ उतरेगा?











