शाहपुर कृषि उप मंडी में अव्यवस्थाएं किसानों के विश्राम गृह पर व्यापारियों का कब्जा, अधिकारियों के गैर-जिम्मेदाराना जवाब GovernanceImpactOnFarming, FarmerGrievances, AgriculturalProcurementIssu
- 3 days ago
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शाहपुर : मध्य प्रदेश में समर्थन मूल्य पर गेहूं और चना खरीदी की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, लेकिन शाहपुर कृषि उप मंडी में व्यवस्थाएं पूरी तरह चरमराई हुई नजर आ रही हैं। शासन के सख्त निर्देशों के बावजूद मंडी परिसर में अव्यवस्थाओं का बोलबाला है, जिसका सीधा खामियाजा क्षेत्र के किसानों को भुगतना पड़ रहा है।

टीन शेड में सड़ी मक्का और किसानों के हक पर डाका
मंडी प्रांगण के टीन शेड में व्यापारियों द्वारा एक माह पहले खरीदी गई मक्का अब तक डंप पड़ी हुई है। स्थानीय किसानों का आरोप है कि व्यापारियों ने न केवल टीन शेड, बल्कि किसानों के लिए बने विश्राम गृह (Rest Room) पर भी अवैध रूप से कब्जा कर रखा है। हालात यह हैं कि लंबे समय से खुले में पड़ी मक्का में अब घुन और कीड़े लग चुके हैं। इससे पास ही संचालित गेहूं खरीदी केंद्र के अनाज में भी संक्रमण (कीट लगने) का गंभीर खतरा मंडरा रहा है। किसानों का कहना है कि व्यापारी मंडी को मुफ्त गोदाम की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं, जबकि मंडी प्रबंधन मूकदर्शक बना हुआ है। इसके साथ ही, मंडी में सरसों की खरीदी शुरू न होने के बावजूद भारी मात्रा में सरसों का स्टॉक मिलना बाहरी खरीद की ओर इशारा कर रहा है।


बिना नंबर के ट्रकों का जमावड़ा और प्रबंधन की लापरवाही
मंडी परिसर में बिना नंबर के कई संदिग्ध वाहन और भारी ट्रक खड़े हुए हैं, जिससे परिसर में जगह की कमी हो गई है। जब इस संबंध में मंडी प्रभारी से सवाल किया गया, तो उन्होंने पल्ला झाड़ते हुए कहा कि "वहां खड़े वाहनों और ट्रकों की जिम्मेदारी आरटीओ (RTO) विभाग की है।" हैरानी की बात तब हुई जब पत्रकार द्वारा सुरक्षा और चोरी की आशंका पर सवाल पूछा गया। इस पर मंडी प्रभारी ने बेहद गैर-जिम्मेदाराना तर्क देते हुए कहा कि "अगर माल चोरी होगा तो हमारे पास सीसीटीवी (CCTV) है, हम उन ट्रकों को पकड़ लेंगे।"

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शनिवार को खरीदी बंद, फिर भी किसानों को बुलाकर घंटों कराया इंतजार
मंडी में शनिवार को खरीदी बंद होने के बावजूद सिलपटी ग्राम के किसानों को मैसेज भेजकर बुला लिया गया। किसान सुबह 10 बजे ही ट्रैक्टर-ट्रॉली लेकर पहुंच गए, लेकिन मंडी का मुख्य गेट तक बंद था। तपती धूप में किसान घंटों बाहर इंतजार करते रहे। करीब 3 घंटे बाद जब मामला मीडिया तक पहुंचा, तब जाकर गेट खुलवाया गया। एक पीड़ित किसान ने बताया कि वह 1200 रुपए किराया देकर ट्रैक्टर लाया था, यदि खरीदी नहीं होनी थी तो सूचना क्यों नहीं दी गई?
जिम्मेदारों का पक्ष
"आपके माध्यम से यह जानकारी मिली है, मैं जल्द ही टीम भेजकर पूरे मामले की जांच करवाता हूं और जो भी अव्यवस्थाएं हैं उन्हें दूर किया जाएगा।"— टी. वास्के, तहसीलदार, शाहपुर
किसानों की मांग
किसानों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि विश्राम गृह से व्यापारियों का कब्जा नहीं हटाया गया, सड़े हुए अनाज को वहां से विस्थापित नहीं किया गया और लापरवाह अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं हुई, तो वे उग्र आंदोलन के लिए मजबूर होंगे।

















