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ईको अनुभूति कैंप: स्कूली बच्चों ने जंगल में सीखी जीवन की पाठशाला, पक्षी दर्शन और फॉरेस्ट ट्रेल का लिया आनंद EcoTourism NatureCamp WildlifeEducation Insights

  • Dec 28, 2025
  • 2 min read

खरगोन। मध्य प्रदेश ईको पर्यटन विकास बोर्ड, भोपाल के तत्वाधान में सामान्य वनमण्डल खरगोन के बरुड परिक्षेत्र में 'ईको अनुभूति कैंप' का शानदार आयोजन किया गया। सबरेंज सेगाव की ऊन बीट (कक्ष क्रमांक 1079) के सघन वन क्षेत्र में आयोजित इस शिविर में स्कूली बच्चों ने प्रकृति के करीब रहकर वन और जैव विविधता के महत्व को समझा।

प्रकृति के बीच बच्चों का अनूठा अनुभव

यह कार्यक्रम जिला वनमण्डल अधिकारी (DFO) श्री रमेश राठौर के मार्गदर्शन एवं उप वनमण्डल अधिकारी श्री हीरालाल पटेल की गरिमामयी उपस्थिति में संपन्न हुआ। कैंप में शासकीय हाई स्कूल व मिडिल स्कूल मोहना और शासकीय मिडिल स्कूल बड़ी के विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

कार्यक्रम की मुख्य गतिविधियां:

  • पक्षी दर्शन: सुबह की शुरुआत तालाब के समीप पक्षी दर्शन से हुई। मास्टर ट्रेनर श्री राम राठौर ने बच्चों को दूरबीन की मदद से विभिन्न पक्षियों की पहचान कराई और उनकी विशेषताओं के बारे में बताया।

  • फॉरेस्ट ट्रेल (वन भ्रमण): बच्चों को लगभग 3 किलोमीटर लंबे फॉरेस्ट ट्रेल पर ले जाया गया। इस दौरान वन परिक्षेत्र अधिकारी श्री राजेश रंधावे और उनकी टीम ने सागौन, शीशम, धावड़ा, करंज, पीपल और आंवला जैसे औषधीय व छायादार वृक्षों के महत्व की जानकारी दी।

  • वन्य प्राणी पहचान: प्रेरक श्री अजय गुप्ता ने बच्चों को एक रोमांचक अनुभव देते हुए वन्य प्राणियों (चीतल, हिरण, चिंकारा आदि) की उपस्थिति को उनके पदचिन्हों और विष्टा (मल) के माध्यम से पहचानना सिखाया।

प्रतियोगिता और पुरस्कार वितरण

वन भ्रमण और भोजन के पश्चात विद्यार्थियों के ज्ञान को परखने के लिए एक प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता आयोजित की गई। 35 मिनट की इस प्रतियोगिता में बच्चों से वनों और वन्यजीवों से जुड़े 25 वस्तुनिष्ठ प्रश्न पूछे गए। प्रतियोगिता के परिणाम इस प्रकार रहे:

  1. प्रथम स्थान: प्रदीप गरासे (कक्षा 9, हाई स्कूल मोहना)

  2. द्वितीय स्थान: राज मंडलोई (कक्षा 8, मिडिल स्कूल मोहना)

  3. तृतीय स्थान: कुमारी तमन्ना सेन (कक्षा 9, हाई स्कूल मोहना)

वनों का संरक्षण हमारा दायित्व

कार्यक्रम के दौरान विशेषज्ञों ने बच्चों को समझाया कि पेड़ हमारे सच्चे मित्र हैं जो हमें प्राणवायु देते हैं। अतः इनका संरक्षण और संवर्धन हम सभी का नैतिक दायित्व है।

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