top of page

नारी शक्ति वंदन अधिनियम: '2029 के चुनावों में लागू हो महिला आरक्षण' - प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साझा किए अपने लेख के विचार DemocraticInclusivity, Women'sReservation, LegislativeReforms

  • 6 days ago
  • 2 min read

नई दिल्ली | 09 अप्रैल, 2026

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को विधायी निकायों में महिलाओं के आरक्षण पर आधारित अपने एक विशेष लेख की झलकियां साझा कीं। मोदी ने स्पष्ट किया कि महिला आरक्षण की दिशा में उठाया गया यह कदम केवल एक विधायी प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह भारत की 'नारी शक्ति' की बढ़ती आकांक्षाओं का प्रतिबिंब है।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर लेख के प्रमुख अंशों को साझा करते हुए उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि आरक्षण के क्रियान्वयन में होने वाली कोई भी देरी लोकतंत्र की समावेशिता को कमजोर करती है।

DemocraticInclusivity, Women'sReservation, LegislativeReforms

2029 का लक्ष्य: विधानसभा और लोकसभा में बदलाव की तैयारी

प्रधानमंत्री ने अपने लेख में भविष्य की स्पष्ट रूपरेखा प्रस्तुत की है। उन्होंने लिखा, "अब समय आ गया है कि 2029 के लोकसभा चुनाव और विभिन्न राज्यों के आगामी विधानसभा चुनाव महिला आरक्षण के साथ कराए जाएं।" उल्लेखनीय है कि सितंबर 2023 में संसद द्वारा सर्वसम्मति से पारित 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' इस दिशा में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर है।

लेख के मुख्य बिंदु: शासन और समाज पर प्रभाव

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने लेख में महिला नेतृत्व के कई महत्वपूर्ण पहलुओं को रेखांकित किया है:

  • निर्णय प्रक्रिया में सुधार: मोदी के अनुसार, जब महिलाएं प्रशासन और नीति निर्धारण का हिस्सा बनती हैं, तो उनके अनुभव और अंतर्दृष्टि से चर्चा समृद्ध होती है, जिससे सीधे तौर पर शासन की गुणवत्ता में सुधार होता है।

  • सामाजिक प्रगति का आधार: लेख में तर्क दिया गया है कि समाज की प्रगति का सीधा संबंध महिलाओं की प्रगति से है। आर्थिक और सामाजिक जीवन में उनकी भागीदारी को मजबूत करना ही राष्ट्र की नींव को सुदृढ़ करना है।

  • लोकतंत्र की गुणवत्ता: महिलाओं के प्रतिनिधित्व में देरी को उन्होंने लोकतंत्र की गुणवत्ता और समावेशिता में देरी बताया। उन्होंने आग्रह किया कि इस विधेयक के क्रियान्वयन में अधिकतम व्यापक सहमति और राष्ट्रीय हित की भावना झलकनी चाहिए।

DemocraticInclusivity, Women'sReservation, LegislativeReforms

संवैधानिक मूल्यों को सुदृढ़ करने का आह्वान

प्रधानमंत्री ने अंत में एक सामूहिक प्रयास का आह्वान करते हुए कहा कि नारी शक्ति को सशक्त बनाना केवल राजनीतिक मुद्दा नहीं, बल्कि राष्ट्रीय प्रगति के लिए अनिवार्य है। उन्होंने जनता से संवैधानिक मूल्यों को मजबूत करने और राष्ट्रीय विकास में महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने की अपील की।

इस लेख के माध्यम से सरकार ने एक बार फिर 2029 तक विधायी निकायों में महिलाओं की 33% भागीदारी सुनिश्चित करने के अपने संकल्प को दोहराया है।

Top Stories

1/3
bottom of page