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शीतला सप्तमी पर श्रद्धा का सैलाब: माता की पूजा-अर्चना के साथ मनाया गया 'बसोड़ा' पर्व CommunityInvolvement, HinduFestivals, RitualsAndBeliefs

  • Mar 10
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चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि को मनाया जाने वाला शीतला सप्तमी (बसोड़ा) का पर्व इस बार सोमवार और मंगलवार, दोनों दिन बड़े ही उत्साह और पारंपरिक श्रद्धा के साथ मनाया गया। ग्रहण और तिथियों के विशेष संयोग के कारण महिलाओं ने दो दिनों तक माता की विशेष पूजा-अर्चना की।

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तड़के ही उमड़ी मंदिरों में भीड़

पर्व के अवसर पर शीतला माता मंदिरों में सुबह से ही उत्सव जैसा माहौल रहा। महिलाएं पारंपरिक आकर्षक परिधानों में सजी-धजी, हाथों में पूजा की थाली लिए माता के दर्शन के लिए पहुंचीं। श्रद्धालुओं ने माता रानी का 16 श्रृंगार किया और सुख-समृद्धि की कामना की।

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बासी भोजन का लगाया भोग

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शीतला माता को ठंडी चीजें अत्यंत प्रिय हैं। इसी परंपरा का निर्वाह करते हुए:

  • माता को दही-चावल से निर्मित औलिया, लापसी, ढोकले और विभिन्न मीठे व्यंजनों का भोग लगाया गया।

  • परंपरा के अनुसार, इस दिन घरों में चूल्हा नहीं जलाया गया।

  • एक दिन पूर्व (संडे/मंडे) तैयार किया गया 'बासी भोजन' ही सुबह और शाम प्रसाद के रूप में ग्रहण किया गया।

निरोगी काया की प्रार्थना

पूजा के दौरान महिलाओं ने शीतला माता से अपने परिवार की सुख-शांति और विशेष रूप से 'निरोगी काया' (अच्छे स्वास्थ्य) का आशीर्वाद मांगा। मंदिरों में दर्शनार्थियों की सुविधा के लिए प्रशासन और मंदिर समितियों द्वारा विशेष इंतजाम किए गए थे।

बसोड़ा का महत्व

हिंदू पंचांग के अनुसार, ऋतु परिवर्तन के समय यह पर्व स्वास्थ्य के प्रति सचेत रहने का संदेश देता है। माता शीतला को स्वच्छता और शीतलता की देवी माना जाता है, इसलिए उन्हें बासी और ठंडे भोजन का भोग लगाने की प्राचीन परंपरा चली आ रही है।

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