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बैतूल: जयस की 'सामुदायिक वन अधिकार यात्रा' का तीसरा चरण संपन्न, 15 गांवों में जगाई अलखCommunityForestRights, IndigenousEmpowerment, EnvironmentalJustice

  • Feb 7
  • 2 min read

बैतूल। जय आदिवासी युवा शक्ति (JAYAS) के तत्वावधान में जल-जंगल-जमीन और संवैधानिक अधिकारों के संरक्षण हेतु निकाली जा रही 'सामुदायिक वन अधिकार यात्रा' अपने तीसरे दिन और भी प्रखर होकर उभरी। शनिवार, 7 फरवरी को यात्रा का तीसरा चरण बांसपुर से प्रारंभ हुआ, जो क्षेत्र के विभिन्न ग्रामीण अंचलों से होते हुए पावरझंडा पहुँचा।

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जनसंवाद और अधिकारों पर चर्चा

निर्धारित रोड चार्ट के अनुसार, सुबह 11:30 बजे बांसपुर से शुरू हुई यह यात्रा गोलई, भातना, रानापुरा, धासई, डेंडपुरा, गुवाड़ी, छिंदी, गुरगुंदा, भौरा, मरदानपुर, पहावाड़ी, रायपुर और सारपानी जैसे 15 प्रमुख गांवों से होकर गुजरी। यात्रा का समापन पावरझंडा में रात्रि विश्राम के साथ हुआ।

प्रत्येक पड़ाव पर जयस कार्यकर्ताओं ने ग्रामीणों के साथ चौपाल लगाकर सीधा संवाद किया। इस दौरान मुख्य रूप से निम्नलिखित बिंदुओं पर जोर दिया गया:

  • वन अधिकार अधिनियम 2006: कानून के प्रभावी क्रियान्वयन और इसके लाभों की जानकारी।

  • ग्रामसभा की शक्ति: पेसा एक्ट और ग्रामसभा के अधिकारों के प्रति जागरूकता।

  • पारंपरिक दावेदारी: जल, जंगल और जमीन पर आदिवासियों के पुश्तैनी हक की मजबूती।

23 फरवरी को होगा कलेक्ट्रेट का घेराव

जयस संरक्षक राजा धुर्वे ने जनसंवाद के दौरान कहा कि इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य ग्राम स्तर पर जनजागरण करना और सामुदायिक वन अधिकारों के लिए एक मजबूत जनसमर्थन तैयार करना है। संगठन ने स्पष्ट किया है कि यह अभियान जिले के सभी ब्लॉकों में निरंतर जारी रहेगा।


"हमारी लड़ाई अपने जल-जंगल और जमीन के हक को सुरक्षित करने की है। यह यात्रा केवल जनसंपर्क नहीं, बल्कि अपने अधिकारों की रक्षा का संकल्प है।" — जयस नेतृत्व

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अगली रणनीति

यात्रा के माध्यम से जुटाए गए जनसमर्थन और स्थानीय समस्याओं को संकलित कर, आगामी 23 फरवरी को जिला मुख्यालय में एक विशाल प्रदर्शन किया जाएगा। इस दौरान जिला कलेक्टर को सामुदायिक वन अधिकारों के समर्थन में ज्ञापन सौंपा जाएगा।

तीसरे दिन की इस यात्रा में राजा धुर्वे सहित बड़ी संख्या में जयस कार्यकर्ता और ग्रामीण उपस्थित रहे, जिन्होंने जोश-खरोश के साथ पारंपरिक नारों के बीच अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।

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