भारत का परमाणु मिशन: BARC ने शुरू किया स्वदेशी 'Small Modular Reactors' (SMR) का विकास, 2033 तक का लक्ष्य CleanEnergyInnovation, IndigenousSMR, NuclearAdvancements
- Feb 4
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नई दिल्ली | 4 फरवरी, 2026 (Courtesy PIB)
भारत ने स्वच्छ ऊर्जा और कार्बन उत्सर्जन कम करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने बुधवार को लोकसभा में जानकारी दी कि भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (BARC) ने स्वदेशी लघु मॉड्यूलर रिएक्टरों (Small Modular Reactors - SMR) के डिजाइन और विकास पर काम शुरू कर दिया है। सरकार ने परमाणु ऊर्जा मिशन के तहत वर्ष 2033 तक इनके अनुसंधान एवं विकास (R&D) के लिए विशेष बजट भी आवंटित किया है।

SMR तकनीक की मुख्य विशेषताएं और उपयोग
ये रिएक्टर न केवल बिजली की जरूरतों को पूरा करेंगे, बल्कि पुराने कोयला आधारित (जीवाश्म ईंधन) पावर प्लांटों को आधुनिक बनाने में भी सहायक होंगे। इनका प्रमुख उपयोग निम्नलिखित क्षेत्रों में होगा:
कैप्टिव पावर प्लांट: उद्योगों की बिजली आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए।
रिमोट लोकेशन: ग्रिड से दूर स्थित सुदूरवर्ती क्षेत्रों में बिजली पहुँचाने के लिए।
हाइड्रोजन उत्पादन: भविष्य की ईंधन जरूरतों के लिए स्वच्छ हाइड्रोजन का निर्माण।
CleanEnergyInnovation, IndigenousSMR, NuclearAdvancements
प्रमुख प्रोजेक्ट्स और उनकी लोकेशन
सरकार ने फिलहाल तीन मुख्य डिजाइनों पर काम शुरू किया है:
BSMR-200 (220 मेगावाट): 'भारत लघु मॉड्यूलर रिएक्टर' की पहली यूनिट तारापुर (महाराष्ट्र) में स्थापित करने का प्रस्ताव है। इसकी अनुमानित लागत लगभग 27 करोड़ रुपये प्रति मेगावाट है।
SMR-55 (55 मेगावाट): इस लघु रिएक्टर का निर्माण भी तारापुर में ही प्रस्तावित है।
HIGHT-T-GAS REACTOR (5 मेगावाट): विशेष रूप से हाइड्रोजन उत्पादन के लिए उच्च तापमान वाले इस रिएक्टर को विशाखापत्तनम (आंध्र प्रदेश) स्थित BARC परिसर में बनाया जाएगा।
सुरक्षा और नियामक ढांचा (Regulatory Framework)
परमाणु ऊर्जा नियामक बोर्ड (AERB) इन रिएक्टरों की सुरक्षा की निगरानी करेगा। AERB ने स्पष्ट किया है कि:
भारत के मौजूदा सुरक्षा मानक अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के स्तर के हैं।
SMR के लिए मौजूदा विनियामक ढांचा (Regulatory Framework) पर्याप्त है, हालांकि तकनीक-विशिष्ट पहलुओं के लिए समय-समय पर समीक्षा की जाएगी।
हर 10 साल में इन प्लांटों की व्यापक 'आवधिक सुरक्षा समीक्षा' (Periodic Safety Review) की जाएगी।
लागत में कमी की संभावना
रिपोर्ट के अनुसार, एक बार तकनीक का सफल प्रदर्शन हो जाने के बाद, डिजाइनों के मानकीकरण और बड़े स्तर पर उत्पादन (Mass Production) से इन रिएक्टरों की लागत में काफी कमी आने की उम्मीद है। यह भारत को वैश्विक परमाणु ऊर्जा बाजार में एक अग्रणी देश के रूप में स्थापित कर सकता है।









