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कानोड़: जतन संस्थान द्वारा 'सुरक्षित बचपन' जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन; किशोरियों को सिखाया 'गुड टच-बैड टच' का भेद ChildSafety, WomenHealth, CommunityAwareness

  • Jan 21
  • 2 min read

कानोड़ (उदयपुर)। बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और महिला स्वास्थ्य के प्रति सामाजिक चेतना जागृत करने के उद्देश्य से, मानपुरिया का गुड़ा स्थित 'नंद घर' आंगनबाड़ी केंद्र पर जतन संस्थान के तत्वावधान में एक विशेष कार्यशाला आयोजित की गई। इस कार्यक्रम में पोषण प्रबंधन और बाल सुरक्षा जैसे संवेदनशील विषयों पर गहन चर्चा की गई।

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पोषण और स्वास्थ्य पर वैज्ञानिक दृष्टिकोण

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता और जतन संस्थान के क्लस्टर प्रतिनिधि निशीथेश्वर चौबीसा ने धात्री महिलाओं और गर्भवती माताओं को संबोधित करते हुए कहा कि एक स्वस्थ समाज की नींव गर्भस्थ शिशु के सही पोषण पर टिकी होती है। उन्होंने आहार में सकारात्मक बदलाव लाने और वैज्ञानिक खान-पान अपनाने पर बल दिया, ताकि भविष्य की पीढ़ी शारीरिक और मानसिक रूप से सशक्त हो सके।

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बाल सुरक्षा: सहज और असहज स्पर्श की पहचान

सत्र का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा किशोरियों और बालिकाओं के लिए आयोजित 'गुड टच-बैड टच' जागरूकता रहा। श्री चौबीसा ने व्यवहारिक उदाहरणों के माध्यम से बालिकाओं को समझाया कि शारीरिक सुरक्षा के प्रति सजग रहना क्यों आवश्यक है।

  • सजगता का पाठ: उन्होंने स्पष्ट किया कि माता-पिता और अधिकृत चिकित्सकीय परामर्श के अतिरिक्त किसी भी व्यक्ति का अनुचित स्पर्श स्वीकार्य नहीं है।

  • अभिभावकों को परामर्श: अभिभावकों को आगाह किया गया कि वे बच्चों को किसी भी अपरिचित परिवेश में अकेला न छोड़ें। विशेष रूप से पलायन करने वाले परिवारों को नए शहरों और कार्यस्थलों पर बच्चों की सुरक्षा के प्रति अतिरिक्त सतर्कता बरतने की सलाह दी गई।

सामुदायिक सहभागिता और संकल्प

कार्यक्रम की शुरुआत आंगनबाड़ी कार्यकर्ता मोती डांगी के स्वागत उद्बोधन से हुई। सत्र के दौरान धात्री महिला भगवती ने सुरक्षा मार्गदर्शिका का वाचन किया, जिससे उपस्थित महिलाओं में इस विषय के प्रति वैधानिक और व्यवहारिक स्पष्टता आई।

निष्कर्ष: निशीथेश्वर चौबीसा ने आभार व्यक्त करते हुए कहा कि "सजगता ही सुरक्षा की प्रथम सीढ़ी है।" इस आयोजन ने न केवल क्षेत्र की किशोरियों को जागरूक किया, बल्कि अभिभावकों को भी उनकी जिम्मेदारियों के प्रति सचेत किया।

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