GAMĀKI JOURNAL™ विश्वसनीय समाचार, सटीक विश्लेषण:CAQM की बड़ी कार्रवाई: दिल्ली-NCR के 6 ताप विद्युत संयंत्रों पर 61.85 करोड़ रुपये का जुर्माना BiomassCoFiring, ThermalPowerPlants, PollutionControl
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बायोमास सह-दहन (Co-firing) नियमों का उल्लंघन करने पर लगा भारी जुर्माना; 15 अप्रैल तक राशि जमा करने के निर्देश

नई दिल्ली | 08 अप्रैल 2026 वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने दिल्ली के 300 किलोमीटर के दायरे में स्थित छह प्रमुख ताप विद्युत संयंत्रों (Thermal Power Plants) पर लगभग 61.85 करोड़ रुपये की पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति (Environmental Compensation) लगाई है। यह कार्रवाई कोयले के साथ 5 प्रतिशत बायोमास पेलेट्स (धान के भूसे से बने) का मिश्रण उपयोग करने के अनिवार्य नियमों का पालन न करने पर की गई है।
क्या है अनिवार्य नियम?
'तापीय विद्युत संयंत्रों द्वारा फसल अवशेषों का उपयोग करने संबंधी पर्यावरणीय नियम, 2023' के तहत सभी कोयला आधारित संयंत्रों के लिए 5 प्रतिशत बायोमास का उपयोग अनिवार्य है। वित्तीय वर्ष 2024-25 के लिए जुर्माने से बचने हेतु इस सीमा को न्यूनतम 3 प्रतिशत रखा गया था। इस नियम का मुख्य उद्देश्य धान की पराली जलाने की घटनाओं को कम करना और दिल्ली-NCR में वायु प्रदूषण पर नियंत्रण पाना है।
BiomassCoFiring, ThermalPowerPlants, PollutionControl
इन संयंत्रों पर लगा जुर्माना (संक्षिप्त सूची)
आयोग द्वारा गठित विशेषज्ञ समिति की समीक्षा के बाद निम्नलिखित संयंत्रों पर जुर्माना तय किया गया है:
ताप विद्युत संयंत्र का नाम | स्थान | अनुमानित जुर्माना (करोड़ रुपये) |
तलवंडी साबो पावर लिमिटेड (वेदांता) | मनसा, पंजाब | 33.02 |
पानीपत थर्मल पावर स्टेशन (HPGCL) | पानीपत, हरियाणा | 8.98 |
दीनबंधु छोटू राम थर्मल पावर प्लांट | हरियाणा | 6.69 |
राजीव गांधी थर्मल पावर प्लांट | हरियाणा | 5.55 |
गुरु हरगोबिंद थर्मल पावर प्लांट (PSPCL) | पंजाब | 4.87 |
हरदुआगंज थर्मल पावर स्टेशन (UPRVUNL) | उत्तर प्रदेश | 2.74 |
कठोर रुख: 15 अप्रैल तक की समय सीमा
आयोग ने स्पष्ट किया कि इन संयंत्रों द्वारा प्रस्तुत स्पष्टीकरण संतोषजनक नहीं थे और यह साबित नहीं हुआ कि उन्होंने वैधानिक निर्देशों का निष्ठापूर्वक पालन करने का प्रयास किया। CAQM ने सभी संबंधित संयंत्रों को 15.04.2026 तक निर्धारित राशि जमा करने और उसका प्रमाण प्रस्तुत करने का सख्त निर्देश दिया है।
आयोग ने दोहराया कि बायोमास सह-दहन, पराली के प्रभावी प्रबंधन और स्वच्छ वायु सुनिश्चित करने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है। भविष्य में भी नियमों का उल्लंघन करने वाले संस्थानों पर इसी प्रकार की कड़ी कार्रवाई जारी रहेगी।











