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संतों का सानिध्य और माता-पिता का आशीर्वाद ही जीवन की असली पूंजी: साध्वी अनुराग ज्योति BhagwatKatha, SpiritualGathering, CommunityEvent

  • Jan 19
  • 2 min read

भींडर में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में उमड़ा जनसैलाब, श्रीयादे जयंती पर भव्य आयोजनों की तैयारी

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भींडर (राजस्थान): प्रजापति समाज चोखला के तत्वावधान में आयोजित भव्य श्रीमद्भागवत कथा के दौरान भक्ति और अध्यात्म की अविरल धारा बह रही है। कथा के विशेष प्रसंगों पर प्रकाश डालते हुए प्रख्यात कथावाचिका साध्वी अनुराग ज्योति ने संतों की महिमा और पारिवारिक मूल्यों पर समाज को प्रेरक संदेश दिया।

सेवा और सत्संग का महत्व साध्वी अनुराग ज्योति ने कहा कि संतों का साथ कभी व्यर्थ नहीं जाता। उन्होंने सेवा भाव पर जोर देते हुए बताया कि संतों की निस्वार्थ सेवा से मोक्ष के द्वार खुलते हैं। वहीं, साध्वी वैराग्य ज्योति ने सत्संग की महत्ता बताते हुए कहा कि कलयुग में केवल सत्संग ही जीव को सही मार्ग दिखाता है और भगवान को भक्तों के अधीन कर देता है।

माता-पिता के आशीर्वाद से ही प्रगति संभव कथा में साध्वी जी ने भावुक अपील करते हुए कहा कि जो संतान अपने माता-पिता की सेवा करती है और उनका आशीर्वाद प्राप्त करती है, उसे जीवन के हर क्षेत्र में सफलता और प्रगति मिलती है। इस दौरान हजारों की संख्या में मौजूद श्रद्धालुओं ने भक्ति रस का आनंद लिया।

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20 जनवरी को मनेगी भव्य 'श्रीयादे जयंती', प्रतिभाओं का होगा सम्मान

प्रजापति समाज की आराध्य देवी माँ श्रीयादे की जयंती मंगलवार, 20 जनवरी को हर्षोल्लास के साथ मनाई जाएगी। इस अवसर पर समाज द्वारा कई महत्वपूर्ण कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार की गई है:

  • भव्य शोभायात्रा: नगर के प्रमुख मार्गों से एक विशाल जुलूस निकाला जाएगा, जिसमें हजारों की संख्या में समाजजन शामिल होंगे।

  • प्रतिभा सम्मान समारोह: समाज की उन उभरती प्रतिभाओं को सम्मानित किया जाएगा जिन्होंने विभिन्न क्षेत्रों में समाज का नाम रोशन किया है।

  • धार्मिक अनुष्ठान: जयंती के उपलक्ष्य में विशेष पूजा-अर्चना और धार्मिक सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन होगा।

मुख्यमंत्री से 'राजकीय अवकाश' की मांग

श्रीयादे जयंती की व्यापकता और समाज की आस्था को देखते हुए प्रजापति समाज ने प्रदेश के मुख्यमंत्री से इस दिन 'राजकीय अवकाश' घोषित करने की पुरजोर मांग की है। समाज के प्रतिनिधियों का कहना है कि माँ श्रीयादे की शिक्षाएं संपूर्ण मानव जाति के लिए कल्याणकारी हैं, अतः इस दिन को आधिकारिक मान्यता मिलना आवश्यक है।

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