top of page

बैतूल: जनजाति कार्य विभाग कार्यालय में हड़कंप, रसोईया महिला ने की आत्मदाह की कोशिश BetulIncident TribalAffairs JobProtest: Protest Sparks at Betul Office

  • Jan 1
  • 2 min read

बैतूल (मध्य प्रदेश): बैतूल जिले के जनजाति कार्य विभाग कार्यालय में आज उस वक्त अफरा-तफरी मच गई, जब अपनी मांगों को लेकर परेशान एक महिला रसोईया ने खुद पर पेट्रोल डालकर आग लगाने की कोशिश की। सहायक आयुक्त (Assistant Commissioner) के कक्ष में हुई इस घटना से पूरे विभाग में सनसनी फैल गई।

BetulIncident TribalAffairs JobProtest

घटना का पूरा घटनाक्रम

बताया जा रहा है कि जिले के विभिन्न छात्रावासों में कार्यरत रसोईया महिलाएँ अपनी शिकायतों को लेकर सहायक आयुक्त से मिलने पहुँची थीं। जब अधिकारी के साथ चर्चा चल रही थी, तभी अचानक एक महिला ने अपने पास रखा पेट्रोल अपने ऊपर उड़ेल लिया और आत्मदाह का प्रयास किया।

इससे पहले कि महिला खुद को आग लगा पाती, वहाँ मौजूद स्टाफ और अन्य महिला कर्मचारियों ने तत्परता दिखाते हुए उसे रोक लिया। पुलिस को तुरंत सूचना दी गई, जिसके बाद महिला को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहाँ उसका इलाज जारी है।

क्यों उठाया महिला ने यह कदम?

पीड़ित महिला का कहना है कि वह कई वर्षों से छात्रावास में रसोईया के रूप में अपनी सेवाएँ दे रही थी। लेकिन विभाग ने 'रिक्त पद नहीं होने' का हवाला देकर उसे और उसके जैसी कई अन्य महिलाओं को अचानक नौकरी से निकाल दिया है।

  • लगातार अनदेखी: ये महिलाएँ लंबे समय से इस फैसले के विरोध में आंदोलन और आवेदन-निवेदन कर रही थीं।

  • मानसिक तनाव: महिला के अनुसार, बार-बार गुहार लगाने के बावजूद जब कोई सुनवाई नहीं हुई, तो वह मानसिक रूप से टूट गई और उसने यह आत्मघाती कदम उठाया।

BetulIncident TribalAffairs JobProtest: Protest Sparks at Betul Office

प्रशासन का पक्ष

इस पूरे मामले पर सहायक आयुक्त ने स्पष्ट किया कि विभाग शासन के निर्देशों का पालन कर रहा है। उन्होंने बताया:

  • शासन से निर्देश मिले थे कि जिन छात्रावासों में स्वीकृत पदों से अधिक रसोईया कर्मचारी हैं, उन्हें नियमानुसार हटाया जाए।

  • इसी आदेश के तहत छात्रावास अधीक्षकों को छंटनी की कार्रवाई के निर्देश दिए गए थे।

  • अधिकारी के अनुसार, जब यह घटना हुई तब महिलाओं को समझाइश ही दी जा रही थी।

वर्तमान स्थिति: फिलहाल पुलिस मामले की बारीकी से जांच कर रही है और अस्पताल में महिला की स्थिति पर नजर रखी जा रही है। इस घटना ने एक बार फिर छंटनी का सामना कर रहे कर्मचारियों के दर्द और प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।


GAMÁKI MEDIA के सवाल :

  1. क्या प्रशासन वर्षों से कार्यरत कर्मचारियों को सिर्फ इस लिए निकाल देगा कि एक आदेश आजीविका से ऊपर है ?

  2. क्या वर्षों तक एक मजदूर की तरह जिन्होंने सरकारी कार्यालयों या संसथान में सेवा दी उसका कोई न्याय नहीं ?

  3. क्या सिर्फ अधिकारीयों की मनमानी से गरीब परिवारों को आर्थिक रूप से हानि नहीं पहुंचाई जा रही ?

Top Stories

bottom of page