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रामपुर भतोडी: जंगल की 'अवैध' कटाई पर गरमाया माहौल, वन कॉरपोरेशन और विभाग की मिलीभगत के आरोपBetul Forest News, Illegal Tree Cutting, Villagers Protest Betul

  • Feb 9
  • 2 min read

बैतूल। पर्यावरण संरक्षण के दावों के बीच रामपुर भतोडी क्षेत्र से एक गंभीर मामला सामने आया है। चिखली रैयत समिति के जंगलों में बिना अनुमति की जा रही कटाई ने ग्रामीणों के सब्र का बांध तोड़ दिया है। सोमवार को पूर्व कांग्रेस जिला अध्यक्ष हेमंत वागद्रे और आदिवासी नेता डॉ. रमेश काकोड़िया के नेतृत्व में दर्जनों ग्रामीणों ने डीएफओ (DFO) कार्यालय पहुंचकर इस "सिंडिकेट" के खिलाफ मोर्चा खोल दिया।

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क्या है मुख्य विवाद?

ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि वन कॉरपोरेशन ने नियमों को ताक पर रखकर समिति के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और सदस्यों की सहमति के बिना ही पेड़ों पर कुल्हाड़ी चलवा दी।

  • नियमों की अनदेखी: ग्रामीणों के अनुसार, पहले यह तय हुआ था कि समिति को सूचना दिए बिना कोई काम नहीं होगा, लेकिन धरातल पर अधिकारियों ने अपनी मनमानी की।

  • मिलीभगत का शक: ज्ञापन में स्पष्ट कहा गया है कि वन विभाग और कॉरपोरेशन के अधिकारियों के बीच साठगांठ है, जिसके चलते कीमती लकड़ियां बिना किसी रोक-टोक के बाहर ले जाई जा रही हैं।

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आंदोलन की चेतावनी

ग्रामीणों ने केवल ज्ञापन ही नहीं दिया, बल्कि प्रशासन को दो टूक चेतावनी भी दी है। रामकिशोर उइके और सविता यादव जैसे दर्जनों ग्रामीणों का कहना है कि यदि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच नहीं हुई और दोषी अधिकारियों पर गाज नहीं गिरी, तो वे सड़कों पर उतरकर उग्र आंदोलन करेंगे।

एक नजर: आखिर क्यों है ग्रामीण नाराज?

मुद्दा

ग्रामीणों का दावा

अनुमति

समिति और ग्रामवासियों से कोई सलाह नहीं ली गई।

पारदर्शिता

जंगल से लकड़ी बाहर ले जाने की प्रक्रिया गोपनीय रखी गई।

भरोसा

विभाग ने अपने पुराने वादों (समिति को सूचित करने) को तोड़ा है।


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