बैतूल के सरकारी स्कूलों में 'राम-भरोसे' शिक्षा; छात्रों से लगवाया झाड़ू, क्या अतिथि शिक्षक चलाएंगे प्रशासनिक व्यवस्था?EducationCrisis, BaitulEducation, SchoolNeglect
- Jan 23
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Updated: Jan 24
बैतूल (बंजारी ढाल)। मध्य प्रदेश के बैतूल जिले में जनजातीय कार्य विभाग के अंतर्गत आने वाली शिक्षण संस्थाएं भ्रष्टाचार और भारी लापरवाही का केंद्र बनती जा रही हैं। बंजारी ढाल के शासकीय माध्यमिक शाला में जो दृश्य देखने को मिला, वह न केवल शर्मनाक है बल्कि प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था पर एक बड़ा प्रश्नचिन्ह लगाता है। केंद्रीय राज्य मंत्री दुर्गा दास उइके के संसदीय क्षेत्र में व्याप्त यह अव्यवस्था बताती है कि धरातल पर शासन के आदेशों की क्या दुर्दशा हो रही है।
10:35 पर पहुँचे शिक्षक, बच्चों ने थामा झाड़ू
सुबह 10:15 बजे से स्कूल के बाहर खड़े 50 मासूमों का इंतज़ार तब खत्म हुआ, जब गांव में मीडिया की दस्तक की खबर फैली। सुबह 10:35 मिनट पर अतिथि शिक्षक अनिल कास्दे आनन-फानन में भागते हुए स्कूल पहुंचे। ताज्जुब की बात यह रही कि स्कूल के क्लास रूम खुलने के बाद सफाई कर्मचारी के बजाय नन्हे-मुन्ने छात्रों को ही झाड़ू लगानी पड़ी। मध्य प्रदेश शासन के 'बाल अधिकार संरक्षण' और 'शिक्षा का अधिकार अधिनियम' (RTE) के तहत बच्चों से श्रम करवाना प्रतिबंधित है, लेकिन यहाँ शिक्षक की मौजूदगी में बच्चे पढ़ाई करने के बजाय सफाई करते नजर आए।
प्रशासनिक सवाल: क्या अतिथि शिक्षक के भरोसे चल सकता है संस्थान?
इस पूरे प्रकरण में सबसे बड़ा कानूनी और प्रशासनिक सवाल यह उठता है कि क्या किसी सरकारी संस्थान की 'चाबी' और 'प्रशासनिक जिम्मेदारी' किसी अतिथि शिक्षक को सौंपी जा सकती है?
नियम क्या कहते हैं: प्रशासनिक नियमों के अनुसार, संस्था का प्रधान पाठक या कोई नियमित शासकीय शिक्षक ही स्कूल के संचालन और चाबियों का उत्तरदायी होता है।
अधिकारों का उल्लंघन: अतिथि शिक्षक केवल शैक्षणिक कार्य के लिए अनुबंधित होते हैं। उन्हें स्कूल की प्रशासनिक चाबियां सौंपना और नियमित स्टाफ का गायब रहना यह दर्शाता है कि मुख्य शिक्षक और प्रधान पाठक अपनी जिम्मेदारियों से पल्ला झाड़ चुके हैं।
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छात्रावास में 'अंधेर नगरी चौपट राजा'
एक तरफ स्कूल में ताले पड़े थे, वहीं दूसरी तरफ छात्रावास के हालात और भी बदतर मिले। अरुण, आदेश, कुलदीप और सौरभ जैसे छात्रों की फटी हुई यूनिफॉर्म चीख-चीख कर बजट की बंदरबांट की कहानी कह रही थी।
पोषण के नाम पर खिलवाड़: शासन द्वारा जनजातीय छात्रों के लिए विशेष डाइट चार्ट निर्धारित है, लेकिन यहाँ बच्चों को केवल चाय और खिचड़ी पर टरकाया जा रहा है। एवं भोजन में बैंगन की मौसमी सब्जी जो की नियम विरुद्ध तरीके से फंड कि बन्दर बाँट करते हुए परोसी जा रही |
अधीक्षक की चुप्पी: छात्रावास अधीक्षक मदन यादव द्वारा इस घोर लापरवाही पर चुप्पी साधना और सवालों से बचना यह सिद्ध करता है कि दाल में कुछ काला नहीं, बल्कि पूरी दाल ही काली है।
एकलव्य कांड से 'सफेद हाथी' बना प्रशासन
विगत वर्ष बैतूल के एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय में बच्चों ने घटिया खाने और सुविधाओं के अभाव में कलेक्टर कार्यालय तक पैदल मार्च निकाला था। उस समय पूरे प्रदेश में हड़कंप मचा था, लेकिन परिणाम शून्य रहा।
भ्रष्टाचार को संरक्षण: एकलव्य कांड के मुख्य आरोपी प्राचार्य पंकज शरण जैसे अधिकारियों को जिला प्रशासन आज तक कुर्सी से नहीं हटा पाया। महज तबादले की औपचारिकता कर जनता की आंखों में धूल झोंकी गई।
कोई कार्रवाई नहीं: जब एक चपरासी तक पर गाज नहीं गिरी, तो बड़े अधिकारियों के हौसले बुलंद होना लाजमी है। यही कारण है कि आज बंजारी ढाल जैसे स्कूलों में चपरासी नदारद हैं और छात्राएं चाबी लेकर खड़ी रहती हैं।
निष्कर्ष और जवाबदेही
एक तरफ 'पढ़ेगा इंडिया, तभी तो बढ़ेगा इंडिया' के नारे गूँज रहे हैं, वहीं बैतूल में जनजातीय बच्चों का भविष्य फटी यूनिफॉर्म और बंद दरवाजों के पीछे सिसक रहा है।
क्या जनजातीय कार्य विभाग इन लापरवाह नियमित शिक्षकों पर दंडात्मक कार्रवाई करेगा?
क्या चपरासी और सफाई कर्मचारी के पदों की रिक्तियों को भरा जाएगा?
क्या जिला प्रशासन उन अधिकारियों को बचाना बंद करेगा जो इन अनियमितताओं के सूत्रधार हैं?
23.01.2026 को gamaki media को सूत्रों के माध्यम से सन्देश दिया गया है कि प्रधान पाठक छुट्टी पर थीं जो कि निंदनीय है ओर प्रशासनिक लचरता को उजागर करती है |
यह ग्राउंड रिपोर्ट केवल एक स्कूल की नहीं, बल्कि बैतूल जिले के सैकड़ों बच्चों की आवाज है जो व्यवस्था के भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ रहे हैं।
संकुल अधिकारी ने स्वीकारी लापरवाही, कड़ी कार्रवाई का आश्वासन
जब इस पूरे मामले को लेकर संकुल अधिकारी (बटकी डोह) मिहिर कुमार दास से विस्तृत चर्चा की गई, तो उन्होंने स्कूल की बदहाली पर गहरी चिंता व्यक्त की। साथ ही संकुल परिवार की ओर से क्षमा भी मांगी , श्री दास ने स्वीकार किया कि "इस स्कूल में लंबे समय से अनियमितताएं बनी हुई हैं, जिसे लेकर हमने पहले भी अधीक्षक और प्रधान पाठक को सख्त हिदायत दी थी।" मीडिया द्वारा मौके पर बनाई गई बच्चों की वीडियो और सबूत देखने के बाद उन्होंने स्पष्ट किया कि "आज आपके माध्यम से बच्चों की जो स्थिति मेरे संज्ञान में आई है, वह अत्यंत गंभीर है। मेरे द्वारा मामले की उचित जांच करते हुए प्रशासन के उच्च अधिकारियों को कड़ी दंडात्मक कार्रवाई हेतु प्रतिवेदन (Report) तत्काल प्रेषित किया जाएगा।"









