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बचत से सशक्तिकरण तक: सुकन्या समृद्धि योजना के 11 सफल वर्ष और बेटियों का सुनहरा भविष्य BetiBachaoBetiPadhao, WomenEmpowerment, GirlChildEducation

  • Jan 21
  • 2 min read

नई दिल्ली (COURTESY-PIB) | 21 जनवरी 2026 भारत सरकार के 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ' अभियान के तहत शुरू की गई सुकन्या समृद्धि योजना (SSY) आज महिला सशक्तिकरण का सबसे बड़ा प्रतीक बन चुकी है। 22 जनवरी 2025 को इस योजना के 11 वर्ष पूरे हो रहे हैं। दिसंबर 2025 तक के आंकड़ों के अनुसार, देशभर में 4.53 करोड़ से अधिक खाते खोले जा चुके हैं, जिनमें ₹3.33 लाख करोड़ से ज्यादा की राशि जमा है।

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COURTESY PIB

योजना की मुख्य विशेषताएं और लाभ

यह योजना केवल एक बचत खाता नहीं है, बल्कि बेटियों की शिक्षा और उनके आत्मनिर्भर भविष्य की गारंटी है।

  • आकर्षक ब्याज दर: वर्तमान में इस योजना पर 8.2% वार्षिक ब्याज मिल रहा है, जो बेटियों के लिए निवेश के अन्य साधनों की तुलना में सबसे अधिक है।


  • टैक्स में छूट: आयकर अधिनियम की धारा 80C के तहत निवेश पर टैक्स लाभ मिलता है।

  • न्यूनतम निवेश: मात्र ₹250 से खाता खोला जा सकता है, जिससे यह आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए भी सुलभ है। अधिकतम निवेश सीमा ₹1.5 लाख प्रति वर्ष है।

खाता कौन और कैसे खोल सकता है?

  • पात्रता: जन्म से लेकर 10 वर्ष की आयु तक की बेटी के नाम पर माता-पिता या कानूनी अभिभावक खाता खोल सकते हैं।

  • कहाँ खोलें: किसी भी पोस्ट ऑफिस या अधिकृत सरकारी/निजी बैंकों (जैसे HDFC, Axis, ICICI, IDBI) में।

  • जरूरी दस्तावेज: आवेदन फॉर्म, बेटी का जन्म प्रमाण पत्र, माता-पिता का आधार कार्ड और पैन (PAN) कार्ड।

  • खाता संचालन: 18 वर्ष की आयु होने पर बेटी स्वयं अपने खाते का संचालन कर सकती है।

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निकासी और परिपक्वता (Maturity) के नियम

  1. शिक्षा के लिए निकासी: बेटी के 18 वर्ष का होने या 10वीं कक्षा पास करने के बाद, उच्च शिक्षा के लिए खाते में जमा राशि का 50% हिस्सा निकाला जा सकता है।

  2. परिपक्वता: खाता खोलने की तारीख से 21 वर्ष बाद यह पूरी तरह मैच्योर हो जाता है।

  3. समय से पूर्व बंद करना: यदि बेटी की शादी 18 वर्ष के बाद और 21 वर्ष से पहले हो रही हो, तो शादी के खर्च के लिए खाता बंद कर पूरी राशि निकाली जा सकती है।

एक सामाजिक परिवर्तन की लहर

सुकन्या समृद्धि योजना ने समाज की सोच में बड़ा बदलाव लाया है। यह योजना सुनिश्चित करती है कि बेटी के वयस्क होने तक परिवार के पास उसकी पढ़ाई और करियर के लिए पर्याप्त कोष (Fund) उपलब्ध हो। यह 'आत्मनिर्भर भारत' के सपने को साकार करने की दिशा में एक सशक्त कदम है।

"सजग अभिभावक, सुरक्षित बेटी: आज की छोटी बचत, कल की बड़ी सफलता।"

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