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21 वीं सदी के भारत में बाबा साहब के विचारों की प्रासंगिकता

  • 1 day ago
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14 अप्रैल जन्मजयंती पर विशेष


भारत के गौरवशाली इतिहास में कही वैचारिक विद्वान हुये हैं जिन्होंने ने अपने जीवन के समसामयिक परिदृश्य में प्रचलित विषयों के प्रभाव के कारण अपने जीवन में आये अनुभवों के आधार पर समाज में अपने विचार का प्रतिपादन कर अपने विचार दर्शन से भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान देकर राष्ट्र निर्माण में अपनी महती भुमिका का निर्वहन किया हैं। कुछ विचार ऐसे होते हैं जिनकी प्रासंगिकता का महत्व दुरगामी होता हैं। ऐसे विचारों का महत्व समय के साथ बढ़ता जाता हैं। ऐसे विचारों का प्रवाहमान समय के साथ धुमिल नही पड़ता बल्कि बढ़ते समय के साथ उन विचारों की जड़े और अधिक गहरी होती चली जाती हैं।

दार्शनिक बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकरजी के जीवन में जातिगत विषमताओं की विसंगति के कारण जो क्रूर प्रभाव उनके जीवन पर पड़ा उस जातिगत विषमता के कारण बाबा साहब के जीवन पर जो व्यापक असर हुआ उस असर के कारण भारतीय समाज में जो विषमता के भाव विकसीत हुये थे उन भावों से भारतीय समाज को बाहर निकालने के लिये उन्होंनें अपने कष्टमय जीवन से भारतीय समाज में समरस समाज की अवधारणा को मूर्तरुप प्रदान करने की दिशा में जो दिशासूत्र अपने विचार से भारतीय समाज के सामने समाज परिवर्तन के लिये व्यक्त किये थे वह विचार भारतीय समाज के निर्माण में मील का पत्थर सिद्व हुये थे।


बाबा साहब के चिंतन ने भारतीय समाज को दिशा देकर भारत के उज्जवल निर्माण के लिये अपने विचार से भारत के भविष्य के लिये मार्ग सुझाया था। बाबा साहब का चिंतन जातिगत विषमता के कारण समाज में जहाँ भेदभॉव, छुआछुत जैसी विषमता जैसे विचार के कारण कुरीतियों समाज में व्याप्त थी। जिसके कारण भारत के समक्ष भविष्य में उत्पन्न होने वाली चुनौतियों के समाधान की दिशा में बाबा साहब ने असमानता, अस्पृश्यता, छुआछुत, और जाति प्रथा के कारण जो वैमनस्यता के बीज समाज में बोये जा रहे थे उन समास्याओं का समाधान करने के लिये उनका चिंतन समाज में एकरुपता के भाव विकसीत करने की दिशा में था। बाबा साहब ने अपने ज्ञान कौशल से भारतीय समाज को एकता के सूत्र में पिरोने के लिये शिक्षा पर बाबा साहब ने अत्यधिक बल प्रदान किया था।


बाबा साहब ने उनके जीवन में सहे कष्ट किसी और व्यक्ति को ना सहना पड़े इसलिये उन्होनें शिक्षा को अपना साधन बनाकर देश के उच्च संस्थानों से शिक्षा प्राप्त कर अपने ज्ञानार्जन का विस्तार किया। बाबा साहब का विचार था कि समाज के समक्ष जो यक्ष प्रश्न उत्पन्न हुये हैं उनका समाधान केवल शिक्षा के माध्यम से ही किया जा सकता है। सामज को उच्च शिक्षित कर समाज में व्याप्त विषमताओं को समाप्त कर समाज को असमानता एवं अज्ञानता और अन्याय के अभिशाप से मुक्त कराया जा सकता है।


भारतीय राजनीतिक चिंतन के इतिहास में बाबा साहब एकमात्र ऐसे चिंतक एवं विचारक हैं जिन्होंने अस्पृश्यता से उत्पन्न होने वाली समास्यों को स्वंय अनुभव किया और विचारक होने के नातें इस समास्या पर विचार कर उसके निराकरण का संकल्प लिया। बाबा साहब ने ना केवल इस समास्या पर विचार किया बल्कि उसके निराकरण करने की दिशा में स्वंय का समर्पित कर दिया। बाबा साहब एकमात्र ऐसे व्यक्ति थे जिन्होंने ने समाज में छुआछुत और अस्पृश्यता के विरोध में अपनी आवाज मुखर कि थी। समाज में फैली कुरीतियों को समाप्त कर समाज स्वाबलंबी एवं आत्मसम्मान के साथ जीवन यापन कर सकें इसके लिये बाबा साहब अस्पृश्यता एवं छुआछुत से समाज को मुक्त करने के लिये बाबा साहब ने तीन सुत्रीय ध्येय वाक्य का सृजन किया "शिक्षित बनों, संगठित बनो, संघर्ष करों," का तीन सुत्रीय विचार मंत्र समाज के सामने प्रस्तुत किया जिससे समाज आपस में सहयोग एवं एकता के भाव के साथ जीवन यापन कर सकें।


बाबा साहब के विचार किसी एक जाति वर्ग या समाज के लिये नही थे बल्कि उनका विचार संपूर्ण समाज के लिये था। बाबा साहब ने युवाओं के लिये चिंतन करते हुये उनसे आहवान किया था कि युवा शिक्षित बनकर समाज में व्याप्त कुरीतियों को दुर करने के लिये संघर्ष करें। शिक्षा को लेकर बाबा साहन ने कहा था कि "शिक्षा शेरनी का वह दूध हैं जो इसे पियेगा वह दहाड़ेगा। बाबा साहब का उक्त विचार वर्तमान परिदृश्य में प्रांसगिक हैं।


आज शिक्षा के साथ साथ महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में बाबा साहब का विचार प्रासंगिक हैं महिला शिक्षा, महिलाओ को समान अधिकार, समान कार्य के बदले समान वेतन, कार्यस्थल पर लैंगिक शोषण से महिलाओं के बचाव, शिक्षा के अवसर समान रुप से प्रदान करने के लिये महत्वपूर्ण प्रयास किये उन प्रयासों का परिणाम आज समाज में देखने को मिलता हैं। आज सामाजिक जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में महिलाऐं प्रगति कर रही हैं। ग्रह की चार दीवारी से बाहर निकालकर वह फाइटर प्लेन भी उड़ाकर जंग के मैदान में दुश्मनो को नैस्तानाबुद करने का कार्य कर रही हैं।


राजनीतिक रुप से महिलाओं की भागीदारी बढाकर 33 प्रतिशत आरक्षण महिलाओं प्रदान करने का कार्य आज आज अगर संभव हुआ हैं तो उसके पीछे बाबा साहब का विचार ही था जिन्होनें कहा था कि "मैं किसी समुदाय की प्रगति को उस प्रगति के पैमाने से मापता हूँ जो समाज में महिलाओं ने हासिल की हैं"। आज हम जब महिलाओं के जिस विकास की बात कर रहे हैं उस विकास की नींव बाबा साहब ने 1947 में हिन्दु कोड बिल का मसौदा तैयार कर संविधान सभा में रखकर कि थी।


बाबा साहब ने आर्थिक एवं सामाजिक प्रगति पर विचार करते हुये बाबा साहब ने समग्र समाज के विकास के विषय में विचार किया हैं। उनका मानना था कि समाज कि बीच मे जो आर्थिक असमानता बड़ रही हैं उसको कम करने के लिये प्रयास करने की आवश्यकता हैं। आर्थिक असमानता को दूर करने की दिशा में उनका विचार था कि नीतियो का निर्धारण इस प्रकार हो कि उसका लाभ समग्र समाज को प्राप्त हो ना कि मुठठी भर लोगों को आर्थिक लाभ पहुँचाने के लिये हो। आर्थिक समानता में सुधार करने के लिये उनके द्वारा सुझाये गये श्रम सुधार के लिये 1936 में इंडियन लैबर पार्टी का गठन कर मजदूर वर्ग की समास्याओं के निराकरण के लिये विचार किया और मजूदरों के काम के घंटो की कमी कराई, काम के बदले निश्चित् वेतन मिले उसके लिये विचार किया, मजदूर वर्ग को चिकित्सा सुविधाएँ मुहैया कराने के लिये विचार किया था। आज समाज मे मजदूर वर्ग जो गरिमामय जीवन व्यतित कर रहे हैं उसमें बाबा साहब के विचारों का महत्वपूर्ण योगदान हैं।


बाबा साहब के विचारों का चितन किसी एक समाज एवं कालखंड के लिये नही था। बाबा साहब ने भारतीय समाज में व्याप्त चुनौतियों के समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण कार्य किये हैं। दलितों के सामाजिक उत्थान के लिये बाबा साहब ने 1920 मे मुकनायक पत्रिका एवं 1927 में बहिष्कृत भारत को जारी कर दलितों के उत्थान के लिये समग्र विचार समाज के सामने प्रस्तुत किया था। सन् 1923 में मुंबई असेंबली में काननू पास कराकर सार्वजनिक स्थलों जैसे पनघट, पाठशाला, अस्पताल, अदालत आदि जगह पर पानी लेने पर रोक हटा ली गई हैं। 1924 में बहिष्कृत हितकारिणी नामक सभा का गठन किया। महाराष्ट्र में निवास करने वाले दलितों को सार्वजनिक स्थानो पर पीने के पानी के लिये भेदभाव का सामना ना करना पड़ें महाड़ तालाब से सभी दलितों को पीने का पानी मिले इसके लिये 20 मार्च 1927 को महाड़ आदोलन चलाया। आदोलन के स्वरुप सभी को महाड़ तालाब से पीने के लिये पानी की उपलब्धता प्राप्त हुई।


सन् 1927 में साइमन कमिशन के भारत आने पर बाबा साहब के प्रयासों को देखते हुये उन्हें 1928 में साइमन कमिशन का सदस्य मनोनीत किया गया। साइमन कमिशन का सदस्य नियुक्त करने पर उनके द्वारा दलितों के उत्थान के लिये किये जा रहे प्रयास के कारण उन्हें दलित समाज में जागरुकता के लिये सन् 1930, 1931,1932 में हुये गोलमेज सम्मेलन में भाग लेने के लिये लंदन बुलाया था। सन् 1930 में हितकारिणी सभा के द्वारा नासिक महाराष्ट्र में कालाराम मंदिर में दलितों का प्रवेश कराने में बाबा साहब के विचार महत्वपूर्ण थे। सन् 1932 में पूना एक्ट के द्वारा दलितों को पृथक निर्वाचन का अधिकार दिलाने का कार्य बाबा साहब ने किया था।


बाबा साहब के विचार एवं उनके उच्च अध्ययन के कारण 9 दिसम्बर 1946 में गठित 7 सदस्यों वाली संविधान सभा के चैयरमेन बनें। चैयरमेन बनने के उपरांत 2 वर्ष 11 महिना और 8 दिन के समय में भारत के संविधान का मसौदा तैयार कर भारत का संविधान दिया जो विश्व में लोकप्रिय हैं। सारें दलितों को एक साथ लाने का विचार कर सन् 1942 में शेडयूल्ड कास्ट फेडरेशन का गठन कर सारे दलितों का एक साथ लाने का कार्य किया। सन् 1947 में हिन्दु कोडबिल का मसौदा तैयार कर संविधान सभा में रखा।


जातिगत विषमता के क्रूर व्यवहार से आहत होकर बाबा साहब ने हिन्दु धर्म का त्याग करने का विचार कर 24 मई 1956 को मुबंई में बाबा साहब ने घोषणा कि वह अक्टुबर में बौद्ध धर्म को अपनायेगें। बाबा साहब की घोषणा के साथ ही उन्हे अन्य धर्मो से आमंत्रण आने लगे कि वह उनका धर्म अपना ले किन्तु बाबा साहब ने विचार किया कि उनके धर्म परिवर्तन से भारत भूमि पर किसी प्रकार का कोई संकट उत्पन्न ना हों इसलिये भारत भूमि से सृजित हूये बौद्ध धर्म को 14 अक्टुबर 1956 को बौद्ध धर्म स्वीकार किया। धर्म परिवर्तन के विचार में भी भारत उनके विचारों के केन्द्र में था। बाबा साहब के विचारों की प्रासंगिकता के संबंध में विचार करें तो यह स्पष्ट हैं कि बाबा साहब का संपूर्ण जीवन मानव समाज के कल्याण के लिये लगा रहा। मानव समाज आत्मसम्मान के साथ जीवन यापन करें उसके लिये बाबा साहब कही संघर्ष किये हैं। बाबा साहब के विचारों में समानता, न्याय के लिये समान अवसर के लिये बाबा साहब ने सदैव प्रयास किया हैं। बाबा साहब ने दलित व असहाय वर्ग के लिए विचार किया था वह आज भी प्रांसगिक हैं।


निलेश कौशल अधिवक्ता हरसूद

मोबाइल - 9977883570

(लेखक भारतीय जनता पार्टी पिछड़ा वर्ग मोर्चा मध्यप्रदेश के प्रदेश प्रशिक्षण प्रभारी हैं।)

 
 

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