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समाज सुधार की मिसाल: सकल प्रजापति समाज चोखला भींडर का वार्षिक सम्मेलन संपन्न

  • Dec 29, 2025
  • 2 min read

भींडर। "सुधार के छोटे-छोटे कदम ही समाज को बड़ा और सशक्त बनाते हैं।" यह विचार श्रीयादे प्रजापति समाज सेवा समिति के अध्यक्ष कैलाशचंद्र जाजपुरा ने सकल प्रजापति समाज चोखला भींडर के वार्षिक सम्मेलन के दौरान व्यक्त किए। नवनिर्मित भवन में आयोजित इस भव्य सम्मेलन में समाज उत्थान के लिए कई ऐतिहासिक और कड़े निर्णय लिए गए।

शिक्षा अनिवार्य और फिजूलखर्ची पर लगाम

सम्मेलन में समाज को आधुनिक और आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित किए गए:

  • अनिवार्य शिक्षा: समाज के प्रत्येक बालक-बालिका के लिए कक्षा 12वीं तक की शिक्षा अनिवार्य कर दी गई है।

  • कुरीतियों पर पाबंदी: आधुनिकता के नाम पर होने वाले प्री-वेडिंग शूट और आर्केस्ट्रा कार्यक्रमों पर पूर्णतः पाबंदी लगा दी गई है।

  • महंगाई से राहत: शादी-ब्याह में चढ़ाई जाने वाली सोने की मात्रा को 5 तोले से घटाकर 3 तोला कर दिया गया है, ताकि मध्यमवर्गीय परिवारों पर आर्थिक बोझ कम हो सके।

  • सामूहिक विवाह: फिजूलखर्ची रोकने के लिए वर्ष में एक बार सामूहिक विवाह सम्मेलन का आयोजन अनिवार्य किया गया है।

धार्मिक अनुष्ठान और चर्चा

कार्यक्रम का शुभारंभ भागीरथ प्रजापति एवं दिनेशचंद्र कुंभकार द्वारा गणपति वंदना, हनुमान चालीसा और माँ श्रीयादेवी की आरती के साथ हुआ। समाज के अध्यक्ष भभूतलाल प्रजापति ने सभी आगंतुकों का स्वागत किया।

सम्मेलन के प्रथम सत्र में युवाओं ने शिक्षा, खेल, रोजगार, करियर काउंसलिंग, वार्षिक पत्रिका प्रकाशन और 'सेव अरावली' जैसे विषयों पर अपने विचार रखे। इसमें कोटा से विजय कुमार, भगवानलाल, जसवंत, धीरज सहित अन्य प्रबुद्धजनों ने सक्रिय भागीदारी निभाई।

आगामी कार्यक्रम और घोषणाएं

  • 20 जनवरी 2026: इस दिन कुलदेवी माँ श्रीयादेवी का जन्मोत्सव हर्षोल्लास के साथ मनाया जाएगा।

  • भवन उद्घाटन: समाज के नवनिर्मित भवन का भव्य उद्घाटन भी इसी दिन संपन्न होगा।

महत्वपूर्ण योगदान

समिति के सचिव तुलसीराम प्रजापति ने युवाओं को समाज विकास में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने के लिए प्रेरित किया। कोषाध्यक्ष दिनेशचंद्र कुंभकार ने वार्षिक आय-व्यय का ब्यौरा पेश किया, वहीं देवीलाल प्रजापति ने समाज सुधार के नियमों को सर्वसम्मति से पारित करवाने में मुख्य भूमिका निभाई।

कार्यक्रम का संचालन कृष्णार्जन पार्थभक्ति ने किया। अंत में ऑनलाइन प्राप्त सुझावों पर चर्चा के बाद सामूहिक भोज (प्रसादी) के साथ सम्मेलन का समापन हुआ।


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