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लापरवाह अफसरों पर कलेक्टर का 'चाबुक': सीएम हेल्पलाइन में ढिलाई पर 37 अधिकारियों के वेतन काटने के निर्देशAdministrativeAction, PublicAccountability, GovernanceMatters

  • Feb 7
  • 2 min read

बैतूल: ज़िले में जन समस्याओं के निराकरण को लेकर प्रशासनिक मुस्तैदी न दिखाने वाले अधिकारियों पर गाज गिरी है। कलेक्टर नरेंद्र कुमार सूर्यवंशी ने सीएम हेल्पलाइन (CM Helpline) की शिकायतों की अनदेखी करने वाले 37 राजपत्रित और मैदानी अधिकारियों के खिलाफ कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई करते हुए उनके फरवरी माह के वेतन में कटौती के आदेश जारी किए हैं।

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'नॉन-अटेंड' शिकायतों पर सख्त एक्शन

समीक्षा बैठक के दौरान यह पाया गया कि कई विभागों के प्रमुखों और प्रबंधकों ने सीएम हेल्पलाइन पर दर्ज शिकायतों को समय सीमा के भीतर 'अटेंड' ही नहीं किया। कलेक्टर ने स्पष्ट किया कि जनसुनवाई और शिकायतों के निराकरण में किसी भी स्तर की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। लापरवाही की अवधि (दिनों की संख्या) के आधार पर वेतन कटौती तय की गई है।



इन बड़े अधिकारियों पर गिरी गाज (वेतन कटौती का विवरण):

अधिकारी का पद और नाम

कटौती (दिनों में)

श्री विख्यात हिडोंलिया (जिला प्रबंधक, MP Civil Supplies Corp)

9 दिन

श्री संतोष कुमार चंदेल (सहायक प्रबंधक, विद्युत वितरण केंद्र बोरदेही)

7 दिन

सुश्री शिवानी राय (CEO, जनपद पंचायत बैतूल)

6 दिन

श्री सुरेश कुमार परते (सचिव, कृषि उपज मंडी समिति)

6 दिन

सुश्री तीजा पवार (CEO, जनपद पंचायत घोड़ाडोंगरी)

5 दिन

श्री धम्मदीप भगत (श्रम पदाधिकारी, बैतूल)

5 दिन

श्री धर्मपाल सिंह मरकाम (CEO, जनपद पंचायत मुलताई)

5 दिन

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राजस्व और तकनीकी विभागों में भी हड़कंप

कार्यवाही की जद में सिर्फ पंचायत और आपूर्ति विभाग ही नहीं, बल्कि राजस्व और तकनीकी विभाग के अधिकारी भी आए हैं। मुलताई के प्रभारी तहसीलदार श्री संजय बरैया का 4 दिन, लोक निर्माण विभाग की कार्यपालन यंत्री सुश्री प्रीति पटेल का 4 दिन, और PHE बैतूल के कार्यपालन यंत्री श्री मनोज कुमार बघेल का 4 दिन का वेतन काटा जाएगा।

इसके अलावा, स्वास्थ्य विभाग (CMHO डॉ. मनोज हुरमाडे), परिवहन विभाग (RTO अनुराग शुक्ला), और सहकारिता विभाग सहित शिक्षा केंद्र के 20 से अधिक अन्य अधिकारियों का 1 से 3 दिन का वेतन काटने के निर्देश दिए गए हैं।

प्रशासनिक संदेश: 'काम नहीं तो वेतन नहीं'

कलेक्टर श्री सूर्यवंशी की इस कार्रवाई ने पूरे जिले के प्रशासनिक अमले में हड़कंप मचा दिया है। उन्होंने कड़े शब्दों में चेतावनी दी है कि शासन की प्राथमिकता नागरिकों की समस्याओं का त्वरित समाधान करना है। यदि शिकायतों के निराकरण में पोर्टल पर 'नॉन-अटेंड' स्टेटस पाया जाता है, तो भविष्य में और भी कठोर कार्यवाही की जाएगी।

स्रोत: जनसंपर्क कार्यालय, बैतूल

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