top of page

बैतूल: माचना नदी को जलकुंभी से मुक्त करने के लिए लाडो फाउंडेशन का संकल्प; अनिल यादव बोले- "प्रयास एक दिन में नहीं, मगर एक दिन जरूर होगा"

Apr 24
2 min read

बैतूल | 24 अप्रैल 2026

बैतूल जिले की जीवनदायिनी माचना नदी इन दिनों जलकुंभी के विकराल संकट से जूझ रही है। नदी की सतह पर फैली इस जलकुंभी ने नदी को एक दलदल में तब्दील करना शुरू कर दिया है, जिससे न केवल पानी सूख रहा है बल्कि नदी का अस्तित्व भी खतरे में है। इस समस्या को देखते हुए लाडो फाउंडेशन के संस्थापक अनिल यादव ने नदी की सफाई के लिए एक मुहिम की शुरुआत की है।

दलदल बन रही है माचना नदी

निरीक्षण के दौरान देखा गया कि जलकुंभी ने नदी को पूरी तरह से अपनी चपेट में ले लिया है। यह वनस्पति पानी की सतह पर तेजी से फैल रही है, जो सूर्य की रोशनी को पानी के अंदर जाने से रोकती है और धीरे-धीरे पानी को सोखकर उसे खत्म कर रही है। यदि जल्द ही इसका स्थायी समाधान नहीं निकाला गया, तो नदी पूरी तरह से दलदल में बदल सकती है।

लाडो फाउंडेशन की पहल और चुनौतियां

अनिल यादव ने अपनी टीम के साथ मिलकर जलकुंभी निकालने का प्रयास शुरू किया। उन्होंने बताया कि:

  • जलकुंभी पानी की सतह पर होने के कारण आसानी से निकल तो रही है, लेकिन इसका फैलाव इतना अधिक है कि एक हिस्सा साफ करते ही दूसरा हिस्सा वापस वहीं आ जाता है।

  • यह एक निरंतर प्रक्रिया है जिसे केवल कुछ लोगों के प्रयास से नहीं जीता जा सकता।

सामूहिक सहयोग की अपील

मुहिम के दौरान अनिल यादव ने एक प्रेरणादायक संदेश देते हुए कहा, "प्रयास एक दिन में सफल नहीं होता, मगर निरंतर किया जाए तो एक दिन जरूर सफल होता है।" उन्होंने जिला प्रशासन और स्थानीय नागरिकों से अपील की है कि माचना नदी को बचाने के लिए सबको साथ आना होगा।

उन्होंने जोर देकर कहा कि जलकुंभी को नदी से पूरी तरह साफ करने के लिए एक ठोस योजना और सामूहिक श्रमदान की आवश्यकता है। लाडो फाउंडेशन इस दिशा में लगातार काम करने के लिए प्रतिबद्ध है, ताकि बैतूल की इस अनमोल जल संपदा को सुरक्षित रखा जा सके।

 
 

Top Stories

1/16
bottom of page