बैतूल: जनसुनवाई में कलेक्टर ने दिए अवैध कब्जे हटाने और समस्याओं के त्वरित निराकरण के निर्देश
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मंगलवार को कलेक्ट्रेट सभा कक्ष में आयोजित साप्ताहिक जनसुनवाई के दौरान कलेक्टर नरेंद्र कुमार सूर्यवंशी ने नागरिकों की विभिन्न समस्याओं को सुना और उनके निराकरण के लिए कड़े कदम उठाए। इस दौरान मुख्य रूप से राजस्व, भूमि विवाद, पेंशन, आवास और बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी शिकायतें प्राप्त हुईं।

अवैध कब्जों और बुनियादी सुविधाओं पर सख्त कार्रवाई
जनसुनवाई में प्रभात पट्टन तहसील के ग्राम नागथाना से आए एक मामले में नलकूप पर अवैध कब्जे की शिकायत पर कलेक्टर ने तत्काल संज्ञान लिया। उन्होंने जनपद पंचायत सीईओ को निर्देश दिए कि नलकूप को तत्काल प्रभाव से अतिक्रमण मुक्त कराया जाए। इसी तरह ग्राम दीवान चारसी और पारड़सिंगा में भी भूमि पर अवैध कब्जे की शिकायतों की जांच कर तहसीलदार को शीघ्र कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए।
पीने के पानी और स्वच्छता से जुड़े मुद्दों पर भी कलेक्टर ने सख्त रुख अपनाया:
प्रदूषित पानी की समस्या: सेप्टिक टैंक का पानी ट्यूबवेल में मिलने की शिकायत पर कलेक्टर ने संबंधित कॉलोनाइजर पर नाराजगी व्यक्त की और डिप्टी कलेक्टर अनिता पटेल को मौके पर जाकर सुधार कार्य कराने के आदेश दिए।
नल-जल योजना: पारड़सिंगा में पाइपलाइन बदलने के आवेदन पर ईई पीएचई को त्वरित निराकरण हेतु निर्देशित किया गया।
राजस्व एवं कृषि संबंधी प्रकरणों का निपटारा
जनसुनवाई में बड़ी संख्या में किसान अपने खेतों के नक्शे और खसरा सुधार के आवेदन लेकर पहुंचे। आमला और मुलताई तहसील के ग्राम अम्बाड़ा व पिसाटा के प्रकरणों में संबंधित तहसीलदारों और पटवारियों को समय-सीमा के भीतर सुधार कार्य करने के निर्देश दिए गए। इसके अतिरिक्त, टेमरु रैय्यत के किसानों की सिंचाई बिजली की समस्या पर बिजली विभाग (MPEB) के अधिकारियों को समाधान सुनिश्चित करने को कहा गया।
ई-उपार्जन पोर्टल: 10 मार्च तक किसानों के सत्यापन का लक्ष्य
रबी विपणन वर्ष 2026-27 की तैयारियों को लेकर कलेक्टर नरेंद्र कुमार सूर्यवंशी ने राजस्व अधिकारियों को ई-उपार्जन पोर्टल पर पंजीकृत किसानों के भौतिक सत्यापन के निर्देश जारी किए हैं।
सत्यापन के मुख्य बिंदु:
समय-सीमा: सभी एसडीएम, तहसीलदार और नायब तहसीलदारों को 10 मार्च तक सत्यापन प्रक्रिया पूर्ण करने के निर्देश दिए गए हैं।
विशेष निगरानी: जिन किसानों के पंजीयन और गिरदावरी के रकबे में अंतर है, उनका विशेष सत्यापन होगा। विशेषकर 5 हेक्टेयर से अधिक रकबा वाले किसानों और पिछले वर्ष की तुलना में 50% से अधिक वृद्धि दिखाने वाले मामलों की अनिवार्य जांच की जाएगी।
श्रेणीबद्ध जांच: बटाईदार, कोटवार और वन पट्टाधारी किसानों के प्रकरणों का अलग से सत्यापन होगा। वन पट्टाधारियों के मामले में वन विभाग का अमला जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत करेगा।
कलेक्टर ने स्पष्ट किया कि सत्यापन की प्रक्रिया तय समय में पूरी की जाए ताकि उपार्जन (खरीदी) के समय किसानों को किसी भी प्रकार की तकनीकी या प्रशासनिक असुविधा का सामना न करना पड़े।









