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पेयजल संकट पर 'मिशन मोड' में काम करें अधिकारी, लापरवाही बर्दाश्त नहीं: कलेक्टर सोनवणे

Apr 17
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जिले में गहराते जल संकट के बीच, कलेक्टर सौरभ संजय सोनवणे ने शुक्रवार को ग्रामीण विकास विभाग की समीक्षा बैठक में सख्त रुख अपनाया। कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में आयोजित इस बैठक में उन्होंने स्पष्ट किया कि ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल प्रबंधन में किसी भी प्रकार की शिथिलता स्वीकार नहीं की जाएगी और समस्याओं का निराकरण 'मिशन मोड' पर होना चाहिए।

मैदानी निरीक्षण और रिपोर्ट की डेडलाइन कलेक्टर ने जनपद पंचायतों के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों (CEO) और सहायक यंत्रियों को वातानुकूलित कमरों से बाहर निकलकर सतत 'फील्ड विजिट' करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि अधिकारी स्वयं मौके पर जाकर हस्तांतरित नल-जल योजनाओं की स्थिति का आकलन करें।

  • डेडलाइन: बंद पड़ी योजनाओं को तत्काल मरम्मत कर शुरू करने और इसकी विस्तृत रिपोर्ट सोमवार तक प्रस्तुत करने के कड़े निर्देश दिए गए हैं।

जल संरक्षण और आवास योजना की समीक्षा 'जल गंगा संवर्धन अभियान' के तहत चल रहे कार्यों की समीक्षा करते हुए सोनवणे ने खेत-तालाब, अमृत सरोवर और डगवेल रिचार्ज जैसे प्रोजेक्ट्स में गुणवत्ता से समझौता न करने की हिदायत दी। उन्होंने 'रिज-टू-वैली' (Ridge to Valley) सिद्धांत पर आधारित नई कार्ययोजना तैयार करने को भी कहा।

इसके अलावा, प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत वर्ष 2024-26 के लक्ष्यों को लेकर निर्देश दिए:

  • आवासों की शत-प्रतिशत स्वीकृति और पहली किश्त जल्द जारी की जाए।

  • यह सुनिश्चित किया जाए कि पानी की कमी के कारण किसी भी गरीब का आवास निर्माण कार्य न रुके।

अन्य प्रमुख निर्देश:

  • निरीक्षण: फील्ड विजिट के दौरान छात्रावासों, स्कूलों और आंगनवाड़ी केंद्रों की व्यवस्थाएं जांची जाएं।

  • महिला सशक्तिकरण: एनआरएलएम (NRLM) के तहत जिले में मॉडल ‘दीदी कैफे’ के प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश।

  • वृक्षारोपण: ‘एक बगिया मां के नाम’ योजना के तहत फेंसिंग और पौधरोपण कार्य में तेजी लाने को कहा गया।

बैठक में जिला पंचायत सीईओ अक्षत जैन सहित सभी जनपदों के सीईओ और तकनीकी अधिकारी मौजूद रहे। प्रशासन का यह कदम गर्मी के चरम पर पहुँचने से पहले ग्रामीण बुनियादी ढांचे को दुरुस्त करने की एक बड़ी कवायद माना जा रहा है।

 
 

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