राष्ट्र प्रथम: केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने हैदराबाद में कृषि सम्मेलन में कृषि विकास और किसानों की समृद्धि पर दिया जोर!
"मशीनें रोटी बना सकती हैं, लेकिन गेहूं नहीं उगा सकतीं; कृषि के बिना दुनिया नहीं चल सकती" – शिवराज सिंह चौहान
केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने हैदराबाद में दक्षिणी राज्यों के लिए आयोजित क्षेत्रीय कृषि सम्मेलन को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने क्षेत्र की कृषि चुनौतियों, संभावनाओं, और किसानों के सशक्तिकरण पर विस्तार से बात की। उन्होंने स्पष्ट किया कि 'राष्ट्र प्रथम' सरकार का मूल मंत्र है और विकास कार्यों में राजनीतिक सीमाओं से ऊपर उठकर काम किया जाता है।

राजनीति से ऊपर राष्ट्रहित: शिवराज सिंह चौहान ने जोर देकर कहा कि, "राष्ट्र प्रथम, राज्य में किसकी सरकार है, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता।" केंद्र सरकार किसी भी राज्य में राजनीतिक दल को देखे बिना, किसानों के जीवन स्तर को सुधारने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ काम कर रही है।
कृषि के तीन प्रमुख लक्ष्य: उन्होंने भारतीय कृषि के तीन मुख्य उद्देश्यों को रेखांकित किया—
देश की 140 करोड़ से अधिक आबादी के लिए खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करना।
अन्नदाता किसानों की आजीविका को सुरक्षित करते हुए उनकी आय बढ़ाना।
नागरिकों के लिए केवल भोजन ही नहीं, बल्कि पोषण सुरक्षा सुनिश्चित करना।
अन्नदाता ही जीवनदाता: आधुनिक तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के इस दौर में कृषि के महत्व को समझाते हुए उन्होंने कहा, "मशीनें रोटी बना सकती हैं, लेकिन गेहूं नहीं उगा सकतीं।" किसान केवल अन्नदाता नहीं, बल्कि जीवनदाता हैं।
सुधार और सरल प्रक्रियाएं: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने कहा कि नियम जनता की सेवा के लिए हैं, उन पर बोझ बनने के लिए नहीं। यदि पुराने अधिनियमों और प्रक्रियाओं में बदलाव की आवश्यकता है, तो राज्यों को अपने सुझाव लेकर आगे आना चाहिए। सरकार केवल फाइलों तक सीमित नहीं, बल्कि लोगों के जीवन में दिखाई देनी चाहिए।
क्षेत्रीय प्राथमिकताओं पर विशेष ध्यान: हर राज्य की जलवायु और परिस्थितियां अलग हैं, इसलिए देश के लिए एक जैसी नीति बनाने के बजाय ऐसे क्षेत्रीय सम्मेलन क्षेत्र-विशिष्ट योजनाएं तैयार करने में बेहद मददगार साबित होते हैं।
नारियल और बागवानी में अपार संभावनाएं: दक्षिण भारत में बागवानी की संभावनाओं पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने बताया कि भारत का नारियल निर्यात एक वर्ष में 4,349 करोड़ रुपये से बढ़कर 7,038 करोड़ रुपये (62% की वृद्धि) हो गया है। उन्होंने पुराने नारियल बागानों के चरणबद्ध पुनरुद्धार और काजू-कोको को बढ़ावा देने की बात कही।
वैश्विक बाजारों तक पहुंच: प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में हुए मुक्त व्यापार समझौतों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि इससे अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भारतीय कृषि उत्पादों के लिए नए अवसर खुले हैं। किसानों को अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों को अपनाकर इसका लाभ उठाना चाहिए।
तेलंगाना के लिए पीएमएवाई-जी के तहत आवास: इस अवसर पर तेलंगाना में ग्रामीण आवास योजना के तहत 2 लाख आवासों के निर्माण के लिए भारत सरकार की ओर से पहली किस्त मुख्यमंत्री को सौंपी गई, जिससे गरीबों को पक्का मकान मिलने का मार्ग प्रशस्त हुआ है।











