राजस्थान विधानसभा: विधायक डूंगर राम गेदर ने उठाई ओबीसी को आबादी के अनुपात में आरक्षण देने की मांग OBCReservationRights, SocialJusticeRajasthan, EducationEmploymentEquality
- Feb 18
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जयपुर | 18 फरवरी, 2026 राजस्थान विधानसभा में सूरतगढ़ विधायक डूंगर राम गेदर ने अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के अधिकारों, शिक्षा और रोजगार में प्रतिनिधित्व को लेकर प्रदेश सरकार का ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने सदन में ओबीसी वर्ग के लिए आबादी के अनुपात में आरक्षण और प्रशासनिक सुधारों की पुरजोर वकालत की।

प्रमुख मांगें और उठाए गए बिंदु:
आबादी के अनुपात में आरक्षण: विधायक गेदर ने तर्क दिया कि राजस्थान में ओबीसी की आबादी लगभग 54% है, जबकि आरक्षण मात्र 21% है, जिसे जनसंख्या के अनुपात में बढ़ाया जाना चाहिए।
क्रीमी लेयर सीमा में वृद्धि: उन्होंने क्रीमी लेयर की वर्तमान सीमा को ₹8 लाख से बढ़ाकर ₹15 लाख करने की मांग रखी। साथ ही दस्तकारी जातियों को क्रीमी लेयर के दायरे से बाहर रखने की आवश्यकता पर बल दिया।
प्रमाण पत्र संबंधी सुधार: ओबीसी प्रमाण पत्र की वैधता को कम से कम 5 वर्ष करने और बार-बार शपथ पत्र (Affidavit) की अनिवार्यता को समाप्त करने का सुझाव दिया।
विवाहित महिलाओं के अधिकार: अन्य राज्यों से विवाह कर राजस्थान आने वाली ओबीसी महिलाओं को प्रदेश में ही प्रमाण पत्र जारी करने की सरल व्यवस्था की मांग की।
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भर्ती और प्रतिनिधित्व पर चिंता
विधायक ने भर्तियों में हो रही विसंगतियों पर गंभीर सवाल उठाए:
पदों में कटौती: एलडीसी भर्ती में ओबीसी के 500 पद और चतुर्थ श्रेणी भर्ती में 700 पद कम किए जाने पर चिंता जताई।
आरक्षण के भीतर कोटा: उन्होंने कहा कि 21% आरक्षण के भीतर ही दिव्यांग, खिलाड़ी, मंत्रालयिक कर्मचारियों और अनुकंपा नियुक्तियों को शामिल करने से वास्तविक पात्र अभ्यर्थियों के अवसर कम हो रहे हैं।
पदोन्नति और राजनीतिक आरक्षण: उन्होंने एससी/एसटी की तर्ज पर ओबीसी वर्ग को भी पदोन्नति में आरक्षण देने और सांसद-विधायक स्तर पर राजनीतिक आरक्षण प्रदान करने की मांग की।
ऐतिहासिक संदर्भ और सामाजिक न्याय
विधायक गेदर ने मंडल आयोग की सिफारिशों और 2006 में केंद्रीय संस्थानों (IIT, IIM, AIIMS) में ओबीसी आरक्षण लागू करने के निर्णयों का उल्लेख करते हुए कहा कि सामाजिक न्याय की अवधारणा तभी सार्थक होगी जब इस वर्ग को समान अवसर और समुचित प्रतिनिधित्व मिलेगा।
उन्होंने स्पष्ट किया कि मेरिट में आने वाले अभ्यर्थियों को सामान्य श्रेणी में ही रखा जाना चाहिए, ताकि आरक्षित पदों का लाभ वास्तविक पात्रों को मिल सके।









