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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जन्मदिन: राजनीतिक अपील से लेकर प्रशासनिक तंत्र तक ‘आशीर्वाद का दीया’ अभियान की इनसाइड स्टोरी!

5 days ago
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EDITORIAL:भारतीय राजनीति में कई बार राजनीतिक दलों के संगठनात्मक अभियानों और सरकारी महकमों के बीच की लकीरें इतनी धुंधली हो जाती हैं कि यह पहचानना मुश्किल हो जाता है कि कौन सा कार्यक्रम दल का है और कौन सा सरकार का। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 76वें जन्मदिन (17 सितंबर 2026) के अवसर पर देश भर में आयोजित 'आशीर्वाद का दीया' कार्यक्रम ने इस बहस को एक बार फिर केंद्र में ला दिया है।

Narendra Modi's Birthday, ‘Aashirwad ka Diya’ campaign,from political appeal to administrative machinery

इस पूरे घटनाक्रम की शुरुआत भारतीय जनता पार्टी के आंतरिक संगठनात्मक ढांचे से हुई थी। 14 सितंबर 2026 को भाजपा अध्यक्ष द्वारा सोशल मीडिया के माध्यम से एक अपील जारी की गई थी। इसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 25 वर्षों के सार्वजनिक जीवन की यात्रा को 'जनसेवा से देशसेवा' बताते हुए नागरिकों से आह्वान किया गया था कि वे 17 सितंबर को शाम 6 से 7 बजे के बीच अपने घरों में दीया जलाकर प्रधानमंत्री के उत्तम स्वास्थ्य और दीर्घायु की कामना करें। यह पहल पार्टी के महीने भर चलने वाले 'सेवा संकल्प अभियान' का हिस्सा थी। इसके अगले दिन, यानी 15 सितंबर को केंद्रीय स्तर पर इस अभियान का विस्तृत खाका पेश करते हुए इसे 'सेवा दिवस' के रूप में मनाने की घोषणा की गई, जिसके तहत पार्टी कार्यकर्ताओं को विभिन्न सेवा गतिविधियों से जुड़ना था।

Narendra Modi's Birthday, ‘Aashirwad ka Diya’ campaign,from political appeal to administrative machinery

शुरुआती दौर में यह पूरी तरह से एक राजनीतिक और संगठनात्मक गतिविधि प्रतीत हो रही थी, लेकिन जल्द ही कई राज्यों में सरकारी मशीनरी और प्रशासनिक अमला इसमें सक्रिय रूप से शामिल हो गया:

  • दिल्ली: राजधानी के लगभग 75 सरकारी (सीएम श्री) स्कूलों में 17 सितंबर को परिसर के भीतर दीये जलाने और उसकी वीडियो रिकॉर्डिंग कर गूगल ड्राइव पर अपलोड करने के सख्त निर्देश दिए गए थे। इसके अलावा, कर्तव्य पथ पर आयोजित मुख्य कार्यक्रम में स्कूली बच्चों और शिक्षकों की उपस्थिति को लेकर भी सवाल उठे, खासकर तब जब उस दौरान छात्रों की मध्यावधि परीक्षाएं चल रही थीं।

  • बिहार: यहाँ शिक्षा विभाग के विशेष सचिव द्वारा 14 सितंबर को ही सभी जिला शिक्षा पदाधिकारियों को एक आधिकारिक पत्र जारी कर दिया गया। इस आदेश के तहत राज्य के सभी सरकारी और निजी विद्यालयों तथा छात्रावासों में शिक्षकों की सक्रिय सहभागिता से 'आशीर्वाद का दीया' प्रज्वलित करने का निर्देश दिया गया, जिसमें 'विकसित भारत 2047' के संकल्प और जनकल्याणकारी योजनाओं के प्रचार का हवाला भी जोड़ा गया।

  • मध्य प्रदेश (भोपाल और बैतूल): मध्य प्रदेश सरकार के इस अभियान 3.55 करोड़ के आँकड़े का दावा किया वहीं भोपाल में कलेक्टर प्रियंक मिश्रा द्वारा रोशनपुरा चौराहे पर दीप प्रज्वलन किया गया। वहीं बैतूल के जेएच कॉलेज ऑडिटोरियम में केंद्रीय मंत्री जनजातीय कार्य विभाग दुर्गादास उईके, जन अभियान परिषद के उपाध्यक्ष मोहन नागर और कलेक्टर डॉ. सौरभ संजय सोनवणे की मौजूदगी में 2500 दीपों का प्रज्वलन किया गया। बैतूल जिले में कुल 9 लाख 77 हजार से अधिक दीप प्रज्वलित करने का दावा किया गया और मंच से आयुष्मान योजना सहित विभिन्न केंद्र प्रवर्तित योजनाओं के हितग्राहियों को लाभान्वित किया गया। उज्जैन में भी महाकाल लोक और शिप्रा घाटों पर 25 लाख से अधिक दीये जलाने के लिए प्रशासनिक साजो-सामान की व्यापक व्यवस्था संभाली गई।

  • हरियाणा और उत्तर प्रदेश: पलवल जिले में प्रशासन ने लगभग 2 लाख लाभार्थी परिवारों के बीच वितरण के लिए करीब 4 लाख दीये आवंटित किए, जिनका वितरण डिपो होल्डरों के माध्यम से किया गया। साथ ही, मुख्य सचिव स्तर पर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए इस अभियान की प्रशासनिक समीक्षा भी की गई। उत्तर प्रदेश के सभी 75 जिलों में कुल 5.90 करोड़ दीये जलाने का दावा किया गया, जिसमें गौतमबुद्ध नगर सहित कई जिलों के बेसिक शिक्षा अधिकारियों द्वारा स्कूलों और सरकारी कार्यालयों में अनिवार्य उपस्थिति के निर्देश दिए गए।

इस आयोजन के साथ कुछ अन्य पहलू भी चर्चा का विषय बने। एक तरफ जहाँ मई 2026 में प्रधानमंत्री ने देशवासियों से खाद्य तेल की खपत में 10 प्रतिशत की कमी लाने की अपील की थी, वहीं दूसरी तरफ सितंबर में हुए इन विशाल आयोजनों में बड़े पैमाने पर तेल और अन्य सामग्रियों की खपत हुई। हालांकि, विश्लेषकों का मानना है कि यह दावा करना जल्दबाजी होगी कि इन आयोजनों में इस्तेमाल किया गया तेल वही खाद्य तेल था, लेकिन इसने प्रशासनिक खर्चे और संसाधनों के उपयोग पर सवाल जरूर खड़े किए हैं। इसके साथ ही, नमो ऐप के माध्यम से 'एआई शुभकामना रील' और डिजिटल सेल्फी जैसे माध्यमों से इस जन्मदिन को डिजिटल रूप से भी व्यापक स्तर पर प्रमोट किया गया।


यह पूरा घटनाक्रम इस बात पर गंभीर विचार की मांग करता है कि जब किसी राजनीतिक दल द्वारा शुरू किया गया कोई सांस्कृतिक या राजनीतिक अभियान सरकारी स्कूलों, शिक्षकों, प्रशासनिक अधिकारियों, सरकारी भवनों और जिला प्रशासन के आयोजनों तक पहुँच जाता है, तो उसकी वास्तविक प्रकृति क्या रह जाती है। यह सवाल केवल एक दिन के आयोजन का नहीं, बल्कि इस बात का है कि क्या यह जनभागीदारी का एक स्वाभाविक रूप था, किसी दल का संगठनात्मक अभियान था, या फिर इन दोनों की सीमाओं के मिलने से उपजा एक नया प्रशासनिक स्वरूप?


 
 

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